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पीएम मोदी ने दिया ‘We Will Do It’ का नारा, 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सरकार के मुखिया के तौर पर 25 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए “We Will Do It” यानी “हम यह कर दिखाएंगे” का नारा दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य कठिन जरूर है, लेकिन दूरदर्शी नीतियों, निरंतर मेहनत और देशवासियों के सामूहिक प्रयास से इसे हासिल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प होना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि देश एक दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहा तो आज देखा जा रहा विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।
मोदी ने अपने संबोधन में सामाजिक विभाजन की राजनीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि देश के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक समाज को वोट के आधार पर अलग-अलग खांचों में बांटना है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसी किसान के खेत में पानी नहीं पहुंचता तो क्या वह समस्या केवल एक जाति की होती है? जब बिजली नहीं होती तो क्या अंधेरा किसी एक समुदाय तक सीमित रहता है?
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी समस्याएं पूरे समाज को प्रभावित करती हैं, इसलिए उनका समाधान भी सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने विकास को जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर बांटने के बजाय जरूरत के आधार पर हर व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया।
मोदी ने कहा कि देश की नीतियों का केंद्र गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को सशक्त बनाना होना चाहिए। विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर उन्होंने पहले भी कहा है कि गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति देश की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने 25 साल के शासन नेतृत्व की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद 2014 में वह प्रधानमंत्री बने। 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के मुखिया के रूप में उनकी इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे हुए। भाजपा ने इस अवसर को ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जोड़ा है।
इस अभियान के तहत देशभर में सेवा ज्योति यात्राएं, जनसंपर्क कार्यक्रम, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाजपा की ओर से विकसित भारत और जनसेवा को अभियान का मुख्य विषय बनाया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों के अनुभव ने उन्हें यह सिखाया है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए आत्मविश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने “We Will Do It” के भाव को देश की नई सोच से जोड़ा और कहा कि भारत अब ऐसी मानसिकता के साथ आगे बढ़ रहा है जिसमें चुनौती को देखकर पीछे हटने के बजाय उसे पूरा करने का संकल्प लिया जाता है।
मोदी ने कहा कि आने वाले करीब दो दशक भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 2047 में देश अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि उस समय तक भारत विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंच जाए।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, उद्योग, कृषि, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में भी निरंतर सुधार करना होगा।
प्रधानमंत्री ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत को उत्पादकता और आर्थिक विकास में बदलना जरूरी है। इसके लिए युवाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए घरेलू उत्पादन और नवाचार को भी बढ़ावा देना होगा। देश में बने उत्पादों की गुणवत्ता ऐसी होनी चाहिए कि वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह संदेश भी दिया कि विकसित भारत की यात्रा में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का प्रभाव तभी व्यापक होगा जब लोग स्वयं भी राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे।
मोदी ने कहा कि समाज के किसी हिस्से को पीछे छोड़कर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। गांव, शहर, किसान, श्रमिक, महिलाएं, युवा और गरीब—सभी को विकास प्रक्रिया में समान रूप से शामिल करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने पिछले वर्षों में अपनी सोच में बड़ा बदलाव देखा है। पहले कई समस्याओं को लंबे समय तक स्वीकार कर लिया जाता था, लेकिन अब नागरिकों में उन्हें बदलने और समाधान खोजने का आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने पहले भी इस सोच को “यह हो सकता है और हम इसे करेंगे” की भावना के रूप में व्यक्त किया है।
अपने संबोधन के दौरान मोदी ने राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय लक्ष्यों पर एकजुटता की जरूरत बताई। उनका कहना था कि पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें किसी खास जाति या समुदाय तक सीमित नहीं होतीं, इसलिए नीतियां भी सार्वभौमिक दृष्टिकोण से बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास रखना होगा कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने “We Will Do It” का नारा दोहराया।
भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल पूरे होने के अवसर पर सितंबर से अक्टूबर तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को देश के विभिन्न जिलों में सेवा ज्योति यात्राओं और विकसित भारत से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 का लक्ष्य केवल सरकार के कार्यकाल से जुड़ा लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से संबंधित है। इसलिए दीर्घकालिक योजनाओं और निरंतर नीति निर्माण की आवश्यकता है।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे निराशा की सोच छोड़कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उनके मुताबिक भारत के पास युवा आबादी, तकनीकी क्षमता, कृषि शक्ति और उद्यमशीलता जैसी अनेक ताकतें हैं, जिन्हें सही दिशा में उपयोग कर देश विकसित राष्ट्र बन सकता है।
मोदी ने कहा कि आज भारत के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन उनसे निपटने की क्षमता भी पहले से अधिक मजबूत हुई है। उनका कहना था कि सामूहिक संकल्प और लगातार मेहनत से कोई भी बड़ा लक्ष्य असंभव नहीं है।
विकसित भारत संकल्प सभा में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यही रहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को जनता का आंदोलन बनाया जाए। “We Will Do It” के नारे के साथ उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक विकास के नए स्तर तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर समस्याएं समाज के हर वर्ग की हैं तो उनका समाधान भी बिना भेदभाव हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच को विकसित भारत की बुनियाद बताते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आने वाले वर्षों में एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।





