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दिल्ली-एनसीआर
पराली जलाने पर कड़ी नजर 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात
Ratna Netam
5 Oct 2026 9:31 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम और नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को और तेज कर दिया है। आयोग ने दोनों राज्यों के कुल 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। ये टीमें जमीनी स्तर पर निगरानी करेंगी और पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों पर नजर रखेंगी।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, CAQM की ओर से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को किए गए संचार के बाद पंजाब और हरियाणा के चिन्हित जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की गई है। इन टीमों की तैनाती 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक की अवधि के लिए की गई है।
धान की कटाई के बाद की महत्वपूर्ण अवधि को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। इस दौरान खेतों में बचने वाली धान की पराली के प्रबंधन और उसे जलाने की घटनाओं को रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए आयोग ने क्षेत्र स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
जानकारी के मुताबिक, पंजाब के 18 जिलों और हरियाणा के 16 जिलों को इस निगरानी व्यवस्था में शामिल किया गया है। इस तरह दोनों राज्यों के कुल 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। इन जिलों में टीमों की मौजूदगी के जरिए व्यापक स्तर पर क्षेत्रीय निगरानी सुनिश्चित करने की तैयारी है।
CAQM का फोकस उन क्षेत्रों पर है, जहां धान की कटाई के बाद पराली प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है। आयोग की कोशिश है कि जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाकर पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित किया जाए और संबंधित व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
पंजाब और हरियाणा में धान की कटाई के समय पराली प्रबंधन का मुद्दा महत्वपूर्ण रहता है। खेतों से धान की फसल निकालने के बाद बचने वाले अवशेषों का उचित तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करना जरूरी होता है। इसी को देखते हुए आयोग ने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक के समय को ध्यान में रखते हुए फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं।
फ्लाइंग स्क्वॉड का मुख्य उद्देश्य चिन्हित जिलों में क्षेत्र स्तर पर निगरानी को मजबूत करना है। ये टीमें स्थानीय परिस्थितियों और पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के साथ रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की स्थिति को भी देखेंगी। इससे आयोग को जमीनी स्तर की स्थिति की जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।
आयोग ने इस बार समन्वित क्षेत्र-स्तरीय निगरानी तंत्र पर विशेष जोर दिया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तरों पर काम कर रही व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और पराली जलाने की घटनाओं पर समय रहते ध्यान देना है। दोनों राज्यों के चिन्हित जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है।
NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को लेकर CAQM लगातार निगरानी की जिम्मेदारी निभाता है। धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करना भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। आयोग ने इस दिशा में पंजाब और हरियाणा में क्षेत्र स्तर पर अपनी निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पंजाब के 18 जिलों को निगरानी के दायरे में रखा गया है। इसी तरह हरियाणा के 16 जिलों में भी फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की गई है। दोनों राज्यों में इन टीमों की मौजूदगी से महत्वपूर्ण अवधि के दौरान व्यापक निगरानी की व्यवस्था तैयार की गई है।
अक्टूबर और नवंबर के दौरान धान की कटाई और उसके बाद खेतों में बचे अवशेषों के प्रबंधन का काम बड़े स्तर पर होता है। ऐसे समय में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए जमीनी निगरानी की भूमिका बढ़ जाती है। यही कारण है कि फ्लाइंग स्क्वॉड को दो महीने की अवधि के लिए तैनात किया गया है।
CAQM ने अपने निगरानी तंत्र को इस तरह तैयार किया है कि चिन्हित जिलों में क्षेत्र स्तर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। इसके जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित उपायों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
इस व्यवस्था में CPCB की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। आयोग द्वारा किए गए संचार के बाद फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की गई है। इससे केंद्र और राज्य स्तर पर काम कर रही संबंधित व्यवस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
पराली जलाने की रोकथाम को लेकर इस बार शुरुआत से ही निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। 1 अक्टूबर से टीमों की तैनाती का उद्देश्य यही है कि धान की कटाई के पूरे महत्वपूर्ण समय में जमीनी स्थिति पर नजर रखी जा सके। निगरानी की यह अवधि 30 नवंबर तक जारी रहेगी।
पंजाब और हरियाणा में कुल 34 जिलों को शामिल करना इस अभियान के व्यापक स्तर को दर्शाता है। आयोग की रणनीति केवल किसी एक क्षेत्र पर केंद्रित रहने के बजाय चिन्हित जिलों में समन्वित तरीके से निगरानी करने की है।
CAQM के इस कदम का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम और नियंत्रण के लिए क्षेत्र-स्तरीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती के साथ 30 नवंबर तक निगरानी जारी रहेगी। इस दौरान आयोग की नजर पराली प्रबंधन से जुड़े जमीनी प्रयासों और धान की कटाई के बाद की स्थिति पर बनी रहेगी।
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