- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- सेंट स्टीफंस कॉलेज ने...

x
Delhi इस मामले में हिंदी और रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) विभागों के फैकल्टी सदस्य शामिल हैं। ये उन 25 असिस्टेंट प्रोफेसरों में से हैं, जिन्हें 9 मई को नियुक्त किया गया था—यानी वर्गीस का कार्यकाल खत्म होने से कुछ समय पहले। रसायन विज्ञान विभाग के फैकल्टी सदस्य ने इस्तीफा दे दिया, जबकि हिंदी के प्रोफेसर ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। ये अनियमितताएँ तब सामने आईं जब 1 जून को सुसान एलियास ने प्रिंसिपल का पद संभाला और मामले की समीक्षा शुरू की। जांच में भर्ती के रिकॉर्ड देखे गए, जिसमें उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और मूल्यांकन में गड़बड़ियां पाई गईं। इसके बाद, कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने 29 सितंबर को हुई अपनी बैठक में दोनों फैकल्टी सदस्यों से इस्तीफा मांगने का फैसला किया।
हिंदी के प्रोफेसर का एकेडमिक स्कोर 100 में से 76.67 था, जो इंटरव्यू के लिए जरूरी 78 अंकों के कटऑफ से कम था। जांच में पाया गया कि रिसर्च फेलोशिप और पढ़ाने के अनुभव से जुड़े कुछ दावों को भर्ती के नियमों के तहत नहीं माना जा सकता था। फैकल्टी सदस्य द्वारा जमा किए गए अनुभव प्रमाण पत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) पर भी सवाल उठे; बताया गया है कि इसमें सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (Seventh Central Pay Commission) के ढांचे के तहत मिलने वाले वेतन का जरूरी विवरण नहीं था।
कॉलेज ने अपने टर्मिनेशन लेटर (नौकरी से निकालने के पत्र) में कहा कि प्रोफेसर एक वैध अनुभव प्रमाण पत्र देने में विफल रहे। कॉलेज ने बताया कि इस दस्तावेज में उस अवधि के दौरान मिलने वाले वेतन का जिक्र नहीं था, जिसका दावा किया गया था। कॉलेज का यह भी कहना है कि उम्मीदवार को ऐसी जानकारी के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया था जो कई अहम बातों में गलत थी, और इसमें एकेडमिक स्कोर की गणना के लिए जरूरी विवरण भी शामिल नहीं किए गए थे।
कार्रवाई करने से पहले, कॉलेज ने 15 सितंबर को एक 'शो-कॉज नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) जारी किया और 29 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया। हालांकि, जवाब और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच करने के बाद, अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि यह नियुक्ति तय नियमों और शर्तों को पूरा नहीं करती है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ समय पहले ही एड-हॉक (अस्थायी) शिक्षकों के एक समूह ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 13 मई को, कोर्ट ने निर्देश दिया था कि चयन समिति की सिफारिशों को कोर्ट की अनुमति के बिना लागू नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, प्रोफेसर इंद्र मोहन कपाही की अध्यक्षता वाली दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की पांच सदस्यीय समिति ने भी भर्ती प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की ओर इशारा किया है। DU की 2024 की संशोधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के तहत, कॉलेज पहली रिक्ति के लिए 40 उम्मीदवारों को और उसके बाद की प्रत्येक रिक्ति के लिए 20 अतिरिक्त उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट कर सकते हैं। हालाँकि, खबरों के अनुसार सेंट स्टीफंस ने हर अनारक्षित रिक्ति के लिए 70 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने की नीति अपनाई थी, और कुछ विषयों में तो 75 से अधिक उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था।
Next Story





