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संदिग्ध लेनदेन का डर दिखाकर ठगी, दो युवतियों समेत छह गिरफ्तार

nidhi
23 Oct 2026 7:42 AM IST
संदिग्ध लेनदेन का डर दिखाकर ठगी, दो युवतियों समेत छह गिरफ्तार
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संदिग्ध लेनदेन का डर दिखाकर ठगी
नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली की साइबर पुलिस ने अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर ठगने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। तिलक नगर के ओल्ड महावीर नगर में एक इमारत की चौथी मंजिल पर चल रहे केंद्र से दो युवतियों समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को एप्पल का तकनीकी सहायक बताकर लोगों से संपर्क करते थे। मौके से चार लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं।
पुलिस का दावा है कि अमेरिकी नागरिकों को फर्जी पॉप-अप संदेश दिखाकर उनकी एप्पल आईडी से 149.99 डॉलर का संदिग्ध लेनदेन होने की बात कही जाती थी। संदेश में सहायता के लिए एक टोल फ्री नंबर दिया जाता था। उस नंबर पर संपर्क करने वाले लोगों को कथित तकनीकी सहायक भरोसे में लेते थे। इसके बाद बैंक अधिकारी से बात कराने का झांसा देकर गिफ्ट कार्ड के जरिए रकम मांगी जाती थी।
गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के बाद पुलिस अब पीड़ितों, कथित नेटवर्क और कुल रकम की जानकारी जुटा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट में नुकसान का अंतिम आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए कितने अमेरिकी नागरिक प्रभावित हुए और प्रत्येक से कितनी रकम ली गई, यह अभी स्पष्ट नहीं है। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा। इस तरह की धोखाधड़ी में किसी परिचित कंपनी का नाम भरोसा पैदा करने का साधन बनता है। मोबाइल या कंप्यूटर पर अचानक भुगतान का संदेश आने पर उपयोगकर्ता घबरा सकता है। इसी घबराहट में वह संदेश में दिए संपर्क नंबर को सही मान लेता है। लेकिन किसी पॉप-अप पर कंपनी का नाम या लोगो होना उसकी प्रामाणिकता का प्रमाण नहीं है। तकनीकी सहायता का दावा करने वाले की पहचान अलग से जांचना जरूरी है।
अलर्ट दिखे तो स्वतंत्र रूप से करें पुष्टि
एप्पल की आधिकारिक सुरक्षा जानकारी के अनुसार, उसके सपोर्ट प्रतिनिधियों के नाम पर फर्जी फोन और संदेश भेजे जा सकते हैं। संदिग्ध संपर्क के दौरान पासवर्ड, डिवाइस पासकोड या सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। समस्या की पुष्टि के लिए संदेश में दिए नंबर के बजाय स्वयं आधिकारिक सहायता माध्यम तक पहुंचना सुरक्षित तरीका है। किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर खाते की सुरक्षा सुविधाएं बंद करना भी जोखिम पैदा कर सकता है। यह सावधानी खासकर तब महत्वपूर्ण होती है, जब कॉल करने वाला तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाए। खाते के बंद होने, पैसे कटने या डेटा खतरे में होने की बात सुनकर जल्दबाजी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बातचीत रोककर जानकारी की पुष्टि करना उपयोगी है। असली समस्या होने पर भी उसका समाधान सत्यापित माध्यम से किया जा सकता है; अनजान व्यक्ति की बताई प्रक्रिया तुरंत मानना आवश्यक नहीं है।
गिफ्ट कार्ड से भुगतान की मांग पर रहें सतर्क
अमेरिकी उपभोक्ता सुरक्षा जानकारी के अनुसार, धोखाधड़ी वाले संदेश अक्सर भरोसेमंद संस्थाओं की पहचान अपनाकर निजी या वित्तीय विवरण हासिल करने का प्रयास करते हैं। किसी संदेश में दिए लिंक से जानकारी भरने के बजाय संबंधित संस्था से उस माध्यम पर संपर्क करना चाहिए, जिसे व्यक्ति पहले से सही जानता हो। ऐसा कदम संदेश में किए गए दावे को स्वतंत्र रूप से जांचने में मदद करता है। इस मामले में गिफ्ट कार्ड से रकम लेने का आरोप विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। किसी अनजान तकनीकी सहायक की मांग पर कार्ड खरीदने या उसका कोड बताने से पहले भुगतान की वैधता जांचनी चाहिए। सहायता देने वाला व्यक्ति यदि बातचीत के दौरान बैंक प्रतिनिधि से जोड़ने का दावा करे, तो उसे स्वतंत्र पुष्टि का विकल्प नहीं समझना चाहिए। उसी कॉल पर मिली दूसरी पहचान भी जांच योग्य है।
हर तकनीकी चेतावनी असली नहीं होती
तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी में डर पैदा करने वाले स्क्रीन संदेश भी इस्तेमाल होते हैं। आधिकारिक साइबर सुरक्षा मार्गदर्शन में ऐसे उदाहरण बताए गए हैं, जिनमें डिवाइस में समस्या या वायरस होने की चेतावनी के साथ तुरंत फोन करने को कहा जाता है। अनजान संपर्क के कहने पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना, स्क्रीन साझा करना या निजी जानकारी देना नुकसान का जोखिम बढ़ा सकता है। यह सामान्य सुरक्षा संदर्भ है; दिल्ली के इस मामले में हर तरीका अपनाए जाने की पुष्टि नहीं है।
कंपनी का नाम इस्तेमाल होना उस कंपनी की संलिप्तता का संकेत भी नहीं है। यहां आरोप उसकी पहचान का दुरुपयोग करने का है। इसी तरह किसी कॉल सेंटर से उपकरण बरामद होना जांच की शुरुआत है; प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अलग साक्ष्यों से स्पष्ट होगी। इस मामले को दूसरे स्थानों पर हुई समान गिरफ्तारियों के आंकड़ों से नहीं जोड़ना चाहिए। फिलहाल पुलिस की पड़ताल पीड़ितों और रकम के विवरण पर केंद्रित है। आगे की जानकारी से कथित गतिविधियों का दायरा स्पष्ट होगा। उपभोक्ताओं के लिए मुख्य सीख किसी डराने वाले अलर्ट पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी स्वतंत्र पुष्टि करना है। तकनीकी मदद हमेशा सत्यापित माध्यम से लें और निजी सुरक्षा विवरण अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
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