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कांग्रेस के प्रदर्शन में दूसरे दिन नदारद रही सपा, उठे सियासी सवाल
Kanchan Paikara
7 Oct 2026 8:50 PM IST

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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे विपक्षी प्रदर्शन के दूसरे दिन समाजवादी पार्टी की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाएं तेज कर दीं। 6 अक्टूबर को हुए पहले दिन के प्रदर्शन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और पार्टी के कई सांसद सक्रिय रूप से शामिल हुए थे। अखिलेश यादव को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। लेकिन 7 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से आयोजित लंच मीटिंग और उसके बाद जंतर-मंतर की ओर निकले प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी का कोई प्रमुख सांसद नजर नहीं आया।
सपा की इस दूरी के बाद सवाल उठने लगे कि क्या INDIA गठबंधन के भीतर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि सपा नेताओं की ओर से किसी बड़े राजनीतिक मतभेद की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में इसके पीछे संचार में देरी, औपचारिक न्योते का अभाव और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक रणनीति जैसे कारण बताए गए हैं।
पहले दिन राहुल के साथ सड़क पर उतरे थे अखिलेश
एक दिन पहले यानी 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसद चुनाव आयोग की ओर मार्च कर रहे थे। उनका मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग थी।
इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ अखिलेश यादव भी शामिल हुए। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका और कई नेताओं को हिरासत में लिया। अखिलेश यादव भी हिरासत में लिए गए नेताओं में शामिल थे।
इसलिए दूसरे दिन उनकी और सपा सांसदों की पूरी तरह गैरमौजूदगी ज्यादा चर्चा का विषय बन गई।
खड़गे के लंच में भी नहीं पहुंची सपा
बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली के जनपथ स्थित एक रेस्टोरेंट में INDIA ब्लॉक के सांसदों के लिए लंच आयोजित किया था। इसका मकसद विपक्षी एकजुटता दिखाना और आगे की प्रदर्शन रणनीति पर चर्चा करना बताया गया।
लेकिन इस बैठक में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं दिखा। कई विपक्षी नेताओं ने भी बैठक के दौरान सपा की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल किए।
लंच के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेता जंतर-मंतर की ओर निकले, जहां पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोका और कई नेताओं को हिरासत में लिया। दूसरे दिन के इस प्रदर्शन में भी सपा का कोई बड़ा चेहरा मौजूद नहीं था।
क्या सपा को न्योता ही नहीं मिला?
समाजवादी पार्टी की गैरमौजूदगी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण दावा यह सामने आया कि पार्टी के नेताओं को कांग्रेस की तरफ से औपचारिक रूप से लंच मीटिंग के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था।
कुछ रिपोर्टों में सपा सूत्रों के हवाले से कहा गया कि पार्टी को कार्यक्रम की जानकारी समय पर नहीं दी गई। एक वरिष्ठ सपा पदाधिकारी ने देरी से हुई बातचीत को कारण बताया।
यही वजह बताई गई कि सपा नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
हालांकि कांग्रेस की ओर से इसे गठबंधन में किसी बड़े मतभेद के रूप में पेश नहीं किया गया।
सहयोगी दल रणनीति से नाराज?
इसी बीच एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि INDIA ब्लॉक के कुछ सहयोगी कांग्रेस की प्रदर्शन रणनीति को लेकर असहज थे। खासकर इस बात को लेकर नाराजगी थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने और धरना देने जैसे फैसलों पर सभी सहयोगी दलों से पहले पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।
इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सहयोगी दलों से संपर्क कर नाराजगी दूर करने की कोशिश भी की।
अगर यही कारण सपा की दूरी के पीछे भी रहा हो, तो यह सीधे गठबंधन टूटने का संकेत नहीं बल्कि रणनीति तय करने की प्रक्रिया को लेकर असहमति मानी जा सकती है।
अखिलेश ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने अपनी गैरमौजूदगी को लेकर किसी गंभीर नाराजगी की बात नहीं कही। उनसे जब खड़गे के लंच में शामिल नहीं होने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि भविष्य में विपक्षी नेता चाय पर भी मिल सकते हैं और समोसे खाते हुए भी बैठ सकते हैं।
उनके इस बयान से यह संकेत मिला कि वह लंच बैठक से दूरी को बड़े राजनीतिक विवाद में बदलना नहीं चाहते।
यानी सार्वजनिक तौर पर अखिलेश यादव ने कांग्रेस या राहुल गांधी के खिलाफ कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी।
यूपी की राजनीति भी हो सकती है वजह
राजनीतिक विश्लेषण में एक वजह उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है और राज्य में कांग्रेस के साथ उसका सीट बंटवारा तथा राजनीतिक संतुलन लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बना रहता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी संकेत दिया गया कि यूपी की राजनीतिक परिस्थितियां सपा के फैसले के पीछे एक कारक हो सकती हैं, हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की।
सपा अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान भी बनाए रखना चाहती है। ऐसे में हर कांग्रेस-नेतृत्व वाले कार्यक्रम में शामिल होना पार्टी के लिए जरूरी नहीं माना जाता।
क्या INDIA ब्लॉक में दरार है?
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि समाजवादी पार्टी राहुल गांधी के आंदोलन से पूरी तरह अलग हो गई है।
एक दिन पहले ही अखिलेश यादव खुद राहुल गांधी के साथ प्रदर्शन में शामिल थे और पुलिस हिरासत में भी लिए गए थे। इससे साफ है कि चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर दोनों दलों का विरोध अभी भी काफी हद तक साझा है।
दूसरे दिन की गैरमौजूदगी को लेकर भी सपा ने यह नहीं कहा कि वह आंदोलन का विरोध कर रही है।
राहुल गांधी का प्रदर्शन जारी
राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक उनका विरोध जारी रहेगा। जंतर-मंतर जाने की कोशिश के दौरान उन्हें और प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताएं हुई हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है और प्रक्रिया को नियमों के तहत बताया है।
आगे साथ दिखेंगे कांग्रेस-सपा?
समाजवादी पार्टी की दूसरे दिन की गैरमौजूदगी ने भले ही सवाल खड़े किए हों, लेकिन इसे अभी स्थायी राजनीतिक दूरी मानना सही नहीं होगा।
पहले दिन की साझा भागीदारी, अखिलेश यादव का हिरासत में लिया जाना और बाद में उनके द्वारा विवाद को हल्के अंदाज में लेना यह संकेत देता है कि दोनों दलों के बीच संपर्क पूरी तरह टूटा नहीं है।
कुल मिलाकर सपा के दूसरे दिन प्रदर्शन से दूर रहने के पीछे आधिकारिक तौर पर किसी बड़े राजनीतिक ब्रेकअप की पुष्टि नहीं हुई है। अभी तक सामने आई जानकारी में सबसे प्रमुख वजह देर से सूचना या औपचारिक आमंत्रण का अभाव बताया गया है। साथ ही विपक्षी गठबंधन के भीतर प्रदर्शन की रणनीति पर कुछ सहयोगियों की नाराजगी भी सामने आई है। इसलिए सपा की गैरमौजूदगी को फिलहाल गठबंधन में तनाव के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे कांग्रेस और सपा के बीच राजनीतिक संबंध खत्म होने का सबूत नहीं माना जा सकता।
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