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बाबरी मस्जिद पर सोनिया गांधी के बयान से सियासी बवाल, मोहसिन रजा का पलटवार

Ratna Netam
8 Nov 2026 9:02 PM IST
बाबरी मस्जिद पर सोनिया गांधी के बयान से सियासी बवाल, मोहसिन रजा का पलटवार
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नई दिल्ली। अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता मोहसिन रजा ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने लगातार देश की महान ऐतिहासिक शख्सियतों का अपमान किया है। बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर सोनिया गांधी के भावुक होने संबंधी बयान के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की राजनीतिक सोच और उसके ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाए हैं।दरअसल, सोनिया गांधी ने ब्रिटिश समाचार पत्र 'द गार्जियन' को दिए एक साक्षात्कार में 1992 की घटना को याद किया था। उन्होंने बताया था कि जब उन्होंने टेलीविजन पर अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराए जाने की तस्वीरें देखीं, तो वह रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू सहित अन्य नेताओं ने जिस धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण के लिए प्रयास किया था, उसकी रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।
मोहसिन रजा ने सोनिया गांधी पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी की टिप्पणी सामने आने के बाद भाजपा नेता मोहसिन रजा ने उन पर निशाना साधा। उनके बयान के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी लगातार देश की महान ऐतिहासिक शख्सियतों का अपमान करती रही हैं। बाबरी मस्जिद से जुड़े उनके बयान को लेकर भाजपा नेता ने कांग्रेस के ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाए।इस मामले में भाजपा की ओर से अन्य नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोनिया गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महात्मा गांधी के रामराज्य की अवधारणा से दूर हो गई है। भाजपा नेताओं की इन टिप्पणियों के बाद बाबरी विध्वंस का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
सोनिया गांधी ने साक्षात्कार में 1992 की घटना को किया याद
सोनिया गांधी ने अपनी आगामी पुस्तक 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के विमोचन से पहले ब्रिटिश अखबार को साक्षात्कार दिया था। इस बातचीत में उन्होंने अपने राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़े कई अनुभव साझा किए। इसी दौरान उन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस का भी जिक्र किया।सोनिया गांधी के मुताबिक, 6 दिसंबर 1992 को हुई इस घटना ने उन्हें काफी भावुक कर दिया था। उन्होंने कहा कि टेलीविजन पर ढांचे को गिराए जाने की तस्वीरें देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उनके अनुसार, इस घटना के बाद उन्हें एहसास हुआ कि देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा।उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस कई मामलों में राजनीतिक रूप से जरूरत से ज्यादा आश्वस्त रही। पार्टी का रवैया कुछ हद तक लापरवाही भरा था और इसकी वजह से भाजपा तथा उसकी हिंदुत्व आधारित राजनीति के उभार को भी जगह मिली।
बीजेपी ने कांग्रेस की विचारधारा पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी के बयान पर भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की टिप्पणी से कांग्रेस की राजनीतिक सोच सामने आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महात्मा गांधी के रामराज्य के विचार से दूर होकर बाबर का उल्लेख करने वाली राजनीति तक पहुंच गई है।त्रिवेदी ने कांग्रेस पर दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की ओर से अलग-अलग घटनाओं पर दिखाई जाने वाली संवेदनशीलता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सोनिया गांधी के गाजा से जुड़े बयानों और बाटला हाउस मुठभेड़ के आरोपियों के संदर्भ का भी उल्लेख किया।भाजपा सांसद ने गांधी परिवार के सदस्यों की बाबर के मकबरे से जुड़ी यात्राओं का जिक्र करते हुए जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राहुल गांधी का नाम लिया। ये सभी आरोप और टिप्पणियां भाजपा नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।
टेलीविजन पर घटना देखने के दावे पर भी सवाल
भाजपा नेताओं ने सोनिया गांधी के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने बाबरी ढांचे के विध्वंस की तस्वीरें टेलीविजन पर देखने की बात कही थी। सुधांशु त्रिवेदी ने पूछा कि 6 दिसंबर 1992 को किस भारतीय टेलीविजन चैनल पर यह दृश्य प्रसारित किया जा रहा थाउन्होंने उस दिन की घटनाओं के समयक्रम का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी से यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्होंने घटना कब और किस माध्यम से देखी थी। भाजपा नेता ने इस संबंध में बीबीसी की कवरेज का भी उल्लेख किया।इस मुद्दे पर भाजपा ने सोनिया गांधी के बयान की प्रामाणिकता और उसके राजनीतिक संदर्भ को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सोनिया गांधी की ओर से इस विशेष सवाल पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
आपातकाल को लेकर भी सोनिया गांधी ने की थी टिप्पणी
अपने साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने केवल बाबरी विध्वंस का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि आपातकाल के दौर को लेकर भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने 1975 में लगाए गए आपातकाल के फैसले को गलती बताया। साथ ही कहा कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी बाद में इस फैसले को लेकर सहज नहीं रही होंगी।सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण में संजय गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि संजय गांधी को नियंत्रित रखा गया होता तो आपातकाल के दौरान हुए नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।उनकी इन टिप्पणियों को कांग्रेस के इतिहास, नेतृत्व और पुराने राजनीतिक फैसलों पर आत्ममंथन के रूप में देखा जा रहा है।
10 नवंबर को जारी होगी सोनिया गांधी की पुस्तक
सोनिया गांधी की पुस्तक 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का विमोचन 10 नवंबर को प्रस्तावित है। यह उनका निजी संस्मरण है, जिसमें उनके जीवन के अनुभवों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।पुस्तक के विमोचन से पहले दिए गए साक्षात्कार में बाबरी विध्वंस से जुड़ी उनकी टिप्पणी सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।कुल मिलाकर, बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर सोनिया गांधी की पुरानी यादों और भावनात्मक प्रतिक्रिया ने एक बार फिर अयोध्या तथा देश की राजनीति से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। भाजपा नेता मोहसिन रजा की आलोचनात्मक टिप्पणी और सुधांशु त्रिवेदी के पलटवार के बाद यह विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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