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समाधान अभियान NGO की शिखा रॉय ने की सराहना

Ratna Netam
4 Oct 2026 9:44 PM IST
समाधान अभियान NGO की शिखा रॉय ने की सराहना
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New दिल्ली : बीजेपी विधायक शिखा रॉय ने रविवार को ‘समाधान अभियान’ गैर-सरकारी संगठन (NGO) की ओर से कानूनी जागरूकता को लेकर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपराध रोकने के लिए कानून बनाना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण आम लोगों और विशेष रूप से बच्चों को इन कानूनों की सही जानकारी देना भी है। उन्होंने पीड़ितों को उचित कानूनी सहायता तक पहुंचाने में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।शिखा रॉय ने कहा कि कानून और आम जनता के बीच जागरूकता की जो दूरी है, उसे कम करने में सामाजिक संगठन अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने ‘समाधान अभियान’ की गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि यह संगठन लोगों को कानूनों की जानकारी देने के साथ यह भी समझाने का प्रयास कर रहा है कि जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रावधानों का सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
बच्चों को कानून की जानकारी देना जरूरी
शिखा रॉय ने खास तौर पर बच्चों को कानूनी अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि अगर बच्चों को कम उम्र से ही उनके अधिकारों, सुरक्षा और कानूनी मदद के तरीकों की जानकारी दी जाए तो वे कठिन परिस्थितियों में बेहतर तरीके से अपनी बात रख सकते हैं।कई बार बच्चों और उनके परिवारों को यह पता नहीं होता कि किसी अपराध या उत्पीड़न की स्थिति में उन्हें किस संस्था से संपर्क करना चाहिए या कानूनी प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। ऐसे में जागरूकता अभियान उनके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।रॉय के मुताबिक, सिर्फ कानून बना देना पर्याप्त नहीं है। कानून की जानकारी समाज के उस व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए, जिसके संरक्षण के लिए वह कानून बनाया गया है। इसी दिशा में NGO और सामाजिक संगठन महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
सरकार और समाज के बीच सेतु का काम
शिखा रॉय ने गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि ऐसे संगठन सरकार और समाज के बीच सेतु का काम कर सकते हैं। सरकार विभिन्न प्रकार के अपराधों को रोकने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानून और व्यवस्थाएं बनाती है, लेकिन इन व्यवस्थाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाना भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि अर्चना के नेतृत्व में चल रहा ‘समाधान अभियान’ सरकार के एक विस्तार की तरह प्रभावी रूप से काम कर रहा है। संगठन कानूनों के बारे में सही जानकारी फैलाने, बच्चों को शिक्षित करने और पीड़ितों को कानूनी सहायता तक पहुंचने का रास्ता बताने में भूमिका निभा रहा है।
पीड़ितों को सही कानूनी रास्ता दिखाना अहम
अपराध का शिकार होने के बाद पीड़ित और उसका परिवार कई बार यह तय नहीं कर पाता कि उसे सबसे पहले कहां शिकायत करनी चाहिए और किस तरह कानूनी सहायता प्राप्त करनी चाहिए। जानकारी की कमी के कारण कई मामलों में लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में परेशानी महसूस करते हैं।शिखा रॉय ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में जागरूकता फैलाने वाले संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर पीड़ित को सही समय पर उचित कानूनी प्रक्रिया की जानकारी मिल जाए तो वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल बेहतर तरीके से कर सकता है।‘समाधान अभियान’ की ओर से इसी तरह की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि उनके पास कौन-कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर वे किस प्रकार सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
अपराध की रोकथाम में जागरूकता की भूमिका
अपराध रोकने के लिए पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है, लेकिन सामाजिक जागरूकता भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। जब लोगों को अपने अधिकारों और कानूनों की जानकारी होती है तो वे गलत गतिविधियों की पहचान करने और उनके खिलाफ आवाज उठाने में अधिक सक्षम होते हैं।बच्चों के मामले में यह जागरूकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सरल भाषा में सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी देने से उन्हें संभावित खतरों को समझने में मदद मिल सकती है।इसके साथ ही अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के अन्य लोगों को भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी होना जरूरी है, ताकि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में सही कदम उठाया जा सके।
कानून की जानकारी सरल भाषा में पहुंचाने पर जोर
कानूनी प्रावधान अक्सर आम लोगों के लिए जटिल लग सकते हैं। कानून की भाषा और प्रक्रियाओं की जानकारी न होने के कारण लोग अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए कानून को सरल तरीके से समझाना उपयोगी हो सकता है।शिखा रॉय ने इसी पहलू पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को केवल कानून का नाम बताना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें यह भी समझाना जरूरी है कि कानून का सही इस्तेमाल किस तरह किया जाए।उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता बढ़ने पर लोग कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थाओं से संपर्क कर सकेंगे।
सामाजिक संगठनों की भागीदारी को बताया महत्वपूर्ण
शिखा रॉय के बयान में सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर रहा। उनका मानना है कि सरकार अपने स्तर पर कानून और व्यवस्थाएं तैयार करती है, जबकि NGO जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचकर उनकी जानकारी बढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं।उन्होंने ‘समाधान अभियान’ के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संगठन बच्चों को कानूनी प्रावधानों के बारे में शिक्षित करने, कानूनों की सही जानकारी पहुंचाने और पीड़ितों को कानूनी सहायता का रास्ता दिखाने का काम कर रहा है।रॉय के मुताबिक, कानून तभी अधिक प्रभावी हो सकता है जब आम लोगों को उसकी जानकारी हो और वे यह जानते हों कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उसका उपयोग कैसे करना है। इसी कारण कानूनी जागरूकता अभियान अपराध की रोकथाम और पीड़ितों की सहायता, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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