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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के मौके पर देश के विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि इतिहास 1947 के बंटवारे के उस दर्दनाक अध्याय को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के विभाजन का घाव कांग्रेस की देन था और इसके कारण लाखों लोगों को अमानवीय पीड़ा झेलनी पड़ी।
अमित शाह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक संदेश साझा करते हुए 14 अगस्त, 1947 के दिन को इतिहास के सबसे दुखद और क्रूर अध्यायों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत के विभाजन के दौरान करोड़ों लोगों को अपना घर, संपत्ति और अपनों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा, अत्याचार और पीड़ा का सामना किया।
गृह मंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि विभाजन की त्रासदी ने लाखों परिवारों को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और अत्याचारों का सामना करने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अमित शाह ने कहा कि इतिहास देश के विभाजन के दर्द को कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने अपने संदेश में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को मिले विभाजन के घाव को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह घटना भारत के इतिहास में एक ऐसी त्रासदी है, जिसने समाज और परिवारों पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान का विभाजन 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी के समय हुआ था। इस विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हुआ। लाखों लोग सीमाओं के दोनों ओर जाने के लिए मजबूर हुए। इस दौरान सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।
विभाजन विभीषिका दिवस का आयोजन उन लोगों की याद में किया जाता है, जिन्होंने विभाजन के समय दर्द, संघर्ष और विस्थापन का सामना किया। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करना है।
अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि हमें उन लोगों को याद रखना चाहिए, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया और अपने जीवन का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेकर देश को एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
गृह मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है। भाजपा लंबे समय से विभाजन के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाती रही है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल कई बार भाजपा पर इतिहास को राजनीतिक नजरिए से पेश करने का आरोप लगाते रहे हैं।
विभाजन की घटना भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में गिनी जाती है। उस समय लाखों परिवारों को अपने घर छोड़कर नए स्थानों पर जाना पड़ा। कई लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया और वर्षों तक विस्थापन की पीड़ा झेली।
अमित शाह ने अपने संदेश के माध्यम से विभाजन के पीड़ितों को याद करते हुए कहा कि देश को उन लोगों के बलिदान को हमेशा सम्मान देना चाहिए, जिन्होंने उस कठिन दौर को सहा। उन्होंने कहा कि इतिहास की इन घटनाओं को याद रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे सीख ले सकें।
विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों की कहानियों और संघर्षों को याद किया गया। सरकार का कहना है कि इस दिवस का उद्देश्य समाज में एकता, भाईचारे और शांति का संदेश देना है।
14 अगस्त का दिन भारत के इतिहास में जहां आजादी की पूर्व संध्या के रूप में दर्ज है, वहीं यह विभाजन के दर्द और लाखों लोगों के संघर्ष की याद भी दिलाता है। अमित शाह ने इसी संदर्भ में विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि देश उस पीड़ा को कभी नहीं भूल सकता।





