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आज मौसम का कहर कई राज्यों में, मूसलाधार बारिश के आसार

आज मौसम का कहर कई राज्यों में, मूसलाधार बारिश के आसार
नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का दौर जारी है। 2 सितंबर को उत्तर, पूर्व और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के साथ गरज-चमक तथा तेज हवाओं की स्थिति बनने की संभावना है। वहीं पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने के खतरे को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से 1 सितंबर को जारी जानकारी के अनुसार सितंबर के शुरुआती दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां बनी हुई हैं। हालांकि अगले एक सप्ताह के दौरान प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना जताई गई है।
उत्तर भारत में बारिश का दौर
उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ वज्रपात का खतरा भी बना रह सकता है। पहले से बारिश और बाढ़ का सामना कर रहे इलाकों में नदियों और नालों के जलस्तर पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में भी बादल छाए रहने तथा कुछ स्थानों पर बारिश की स्थिति बन सकती है। बारिश के दौरान तेज हवाएं चलने से यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
देखें सेटेलाइट तस्वीर , समय 7: 23AM
बिहार झारखंड और बंगाल में भी बदलेगा मौसम
पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम प्रणाली के प्रभाव से इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। लगातार या तेज बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति पैदा हो सकती है।
उत्तर ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल से जुड़े क्षेत्रों में विकसित होने वाली मौसम प्रणालियों पर भी नजर रखी जा रही है। ऐसी प्रणालियां पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के कारण संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन, पहाड़ों से पत्थर गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने का खतरा रहता है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भारी बारिश वाले क्षेत्रों में यात्रियों और स्थानीय लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
पहाड़ों पर लगातार बारिश होने से छोटी नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
बारिश के साथ कई क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाएं परेशानी बढ़ा सकती हैं। वज्रपात की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों को भी स्थानीय मौसम चेतावनी पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
IMD मौसम की निगरानी के लिए सैटेलाइट सहित विभिन्न प्रणालियों का इस्तेमाल करता है, जिनसे बादलों और बारिश वाली मौसम प्रणालियों को ट्रैक किया जाता है।





