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नेशनल हेराल्ड केस में ED को झटका हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत
Ratna Netam
12 Oct 2026 7:02 PM IST

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नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस मांग पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसके जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को अपनी अटैच की गई संपत्तियां छुड़ाने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपीलीय ट्रिब्यूनल जाने से रोका जाना था। हाई कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब ईडी ने निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती दी है। उस आदेश में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था।दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि एजेएल निचली अदालत के आदेश का इस्तेमाल अपनी अटैच संपत्तियों को मुक्त कराने के लिए कर रहा है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस स्तर पर एजेएल को अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष जाने से रोकने वाला अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
दिल्ली हाई कोर्ट में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई
सोमवार को न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की अदालत में नेशनल हेराल्ड मामले से जुड़ी ईडी की याचिका पर सुनवाई हुई।प्रवर्तन निदेशालय ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार किया गया था।ईडी की याचिका में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा यंग इंडियन, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड और अन्य आरोपियों से संबंधित मामला शामिल है।सुनवाई के दौरान एजेंसी ने अदालत के सामने अटैच संपत्तियों का मुद्दा भी उठाया।ईडी की चिंता थी कि निचली अदालत के आदेश का उपयोग करके एजेएल अपनी संपत्तियों को अटैचमेंट से मुक्त कराने की कोशिश कर रहा है।
AJL को रोकने की मांग स्वीकार नहीं
प्रवर्तन निदेशालय चाहता था कि हाई कोर्ट फिलहाल एजेएल को पीएमएलए के तहत अपीलीय ट्रिब्यूनल में संपत्तियां छुड़ाने की कार्रवाई आगे बढ़ाने से रोके।हालांकि, न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने इस संबंध में अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।इसका अर्थ है कि हाई कोर्ट ने सुनवाई के इस चरण में एजेएल के खिलाफ ईडी द्वारा मांगी गई विशेष रोक नहीं लगाईहालांकि, अदालत का अंतरिम आदेश देने से इनकार करना संपत्तियों को स्वतः मुक्त करने का आदेश नहीं है।अटैचमेंट से संबंधित किसी भी राहत का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के आदेशों के अनुसार होगा।
ED ने अदालत में क्या दलील दी?
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अदालत में पेश हुएउन्होंने एजेएल द्वारा निचली अदालत के आदेश का सहारा लिए जाने पर आपत्ति जताई।राजू ने अदालत को बताया कि कंपनी एजेंसी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को मुक्त कराने के लिए उस आदेश का उपयोग कर रही है।उन्होंने कहा, "वे संपत्तियों को छुड़ाने के लिए इस आदेश का इस्तेमाल कर रहे हैं।"ईडी की ओर से यह दलील निचली अदालत के आदेश के संभावित प्रभाव को लेकर दी गई।एजेंसी का प्रयास था कि उसकी चुनौती पर विचार किए जाने के दौरान एजेएल को संपत्तियों के संबंध में अंतरिम राहत हासिल करने की प्रक्रिया से रोका जाए।हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मांग के अनुरूप तत्काल रोक नहीं लगाई।
ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती
नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की मौजूदा याचिका का प्रमुख विषय निचली अदालत का आदेश है।ट्रायल कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, यंग इंडियन, एजेएल और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार किया था।प्रवर्तन निदेशालय ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।किसी आपराधिक शिकायत पर संज्ञान लेने का अर्थ है कि अदालत कानून के अनुसार मामले को न्यायिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रारंभिक निर्णय करती है।निचली अदालत द्वारा संज्ञान लेने से इनकार किए जाने और हाई कोर्ट में उस आदेश को चुनौती दिए जाने के बीच कानूनी अंतर है।हाई कोर्ट में चुनौती लंबित रहने का अर्थ यह नहीं है कि निचली अदालत का आदेश स्वतः निरस्त हो गया है।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़ा मामला
नेशनल हेराल्ड मामला कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नाम से जुड़े होने के कारण लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है।मौजूदा सुनवाई में यंग इंडियन और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का नाम भी शामिल है।ईडी ने संबंधित पक्षों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती दी है।हालांकि, सोमवार की सुनवाई का तत्काल मुद्दा एजेएल की अटैच संपत्तियों को लेकर अंतरिम रोक लगाने की मांग थी।इस सुनवाई के आधार पर किसी भी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित आरोपों का परीक्षण लागू कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाएगा।
क्या है PMLA के तहत संपत्ति अटैचमेंट?
धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत प्रवर्तन निदेशालय को निर्धारित कानूनी शर्तों के अनुसार संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की शक्ति प्राप्त है।संपत्ति अटैच करने का उद्देश्य संबंधित संपत्ति के हस्तांतरण या निपटान पर कानूनी नियंत्रण स्थापित करना हो सकता है।हालांकि, संपत्ति अटैच होने का अर्थ अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है।पीएमएलए में अटैचमेंट से संबंधित आदेशों को चुनौती देने और उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने की व्यवस्था भी है।इसी संदर्भ में एजेएल द्वारा अपीलीय ट्रिब्यूनल से राहत प्राप्त करने के प्रयास का मुद्दा हाई कोर्ट के सामने आया।ईडी ने इस प्रक्रिया को रोकने के लिए अंतरिम आदेश मांगा था, लेकिन अदालत ने तत्काल ऐसा आदेश नहीं दिया।
अपीलीय ट्रिब्यूनल की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
पीएमएलए के तहत अपीलीय ट्रिब्यूनल निर्धारित आदेशों के खिलाफ दायर अपीलों पर कानून के अनुसार विचार करता है।किसी पक्ष को संबंधित आदेश से आपत्ति होने पर वह लागू प्रावधानों के अंतर्गत राहत मांग सकता है।एजेएल की अटैच संपत्तियों के मामले में भी अपीलीय प्रक्रिया का मुद्दा सामने आया है।ईडी का कहना था कि कंपनी निचली अदालत के आदेश का सहारा लेकर अपनी संपत्तियां मुक्त कराने की कोशिश कर रही है।हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल इस प्रयास पर रोक लगाने से इनकार किया है।इसका यह अर्थ नहीं है कि ट्रिब्यूनल ने संपत्तियां मुक्त करने का फैसला दे दिया है। उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई अंतिम आदेश दर्ज नहीं है।
ED की मुख्य याचिका पर फैसला बाकी
सोमवार की सुनवाई में अंतरिम राहत से संबंधित मांग पर अदालत का रुख सामने आया है।लेकिन ईडी की मुख्य याचिका, जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है, उसका अंतिम परिणाम इस जानकारी से स्पष्ट नहीं होता।हाई कोर्ट को संबंधित कानूनी प्रश्नों और पक्षों की दलीलों के आधार पर निर्णय करना होगा।यह भी महत्वपूर्ण है कि अंतरिम आदेश देने से इनकार करने और मुख्य याचिका को खारिज करने में अंतर होता है।इसलिए सोमवार की कार्यवाही को ईडी की पूरी याचिका पर अंतिम हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आगे की कानूनी कार्यवाही पर नजर
नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की सोमवार की सुनवाई के बाद अब ईडी की मुख्य याचिका और एजेएल की संपत्तियों से संबंधित अपीलीय कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।ईडी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए एजेएल को संपत्तियां मुक्त कराने की कोशिश से रोकने की मांग की थी।हालांकि, न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने इस चरण में अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।फिलहाल एजेएल की अटैच संपत्तियों की अंतिम स्थिति और मनी लॉन्ड्रिंग शिकायत से संबंधित कानूनी विवाद का निपटारा होना बाकी है।आगे की न्यायिक कार्यवाही में यह स्पष्ट होगा कि निचली अदालत के आदेश पर हाई कोर्ट क्या फैसला देता है और संपत्तियों के अटैचमेंट से संबंधित कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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