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अजीत भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Ratna Netam
24 Sept 2026 5:47 PM IST
अजीत भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। मामला उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। भारती के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया SC/ST एक्ट के तहत अपराध बनता दिखाई देता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अग्रिम जमानत देने पर कानून में वैधानिक रोक लागू होती है। अदालत ने भारती की याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। विस्तृत आदेश का इंतजार है।
अजीत भारती ने इससे पहले निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने 7 सितंबर को उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद भारती ने गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद ट्रायल कोर्ट का उन्हें अग्रिम जमानत न देने का फैसला फिलहाल प्रभावी है।मामले में एफआईआर 23 अगस्त 2026 को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, FIR में SC/ST एक्ट के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 196(1)(c) तथा 351(3) भी लगाई गई हैं। मामला सोशल मीडिया पर कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।
हाई कोर्ट ने विशेष रूप से SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत प्रथम दृष्टया अपराध बनने की बात कही। धारा 3(1)(r) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को सार्वजनिक दृष्टि के भीतर अपमानित करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित या डराने-धमकाने से संबंधित है। वहीं धारा 3(1)(s) सार्वजनिक दृष्टि के भीतर SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को जातिसूचक नाम से अपमानित करने से जुड़ी है।यह मामला नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की शिकायत से जुड़ा है। आजाद ने आरोप लगाया था कि भारती ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ और अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों तथा डॉ. बीआर आंबेडकर को लेकर जाति आधारित, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। ये आरोप शिकायत और अभियोजन पक्ष के दावे हैं; मामले में अंतिम रूप से दोष या निर्दोषता का निर्धारण ट्रायल के दौरान होगा।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने भारती की अग्रिम जमानत का विरोध किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि कथित टिप्पणियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की गई थीं और इसलिए मामला सार्वजनिक दृष्टि से जुड़ी कानूनी शर्तों के दायरे में आता है। चंद्रशेखर आजाद की ओर से भी अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कथित टिप्पणियों को जानबूझकर और अपमानजनक बताया गया।दूसरी तरफ अजीत भारती की ओर से पेश वकील ने राहत की मांग करते हुए दलील दी थी कि कथित टिप्पणियों के पीछे जाति के आधार पर अपमानित करने का इरादा नहीं था। बचाव पक्ष का तर्क था कि टिप्पणियों को उस संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसमें वे की गई थीं और SC/ST एक्ट के संबंधित प्रावधान लागू करने के लिए आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं।
इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से यह भी पूछा था कि भारती को नोटिस क्यों नहीं दिया गया और क्या उनकी हिरासत में पूछताछ जरूरी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 16 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 24 सितंबर को कोर्ट ने अग्रिम जमानत की मांग स्वीकार नहीं की।इस मामले में SC/ST एक्ट के तहत अग्रिम जमानत से संबंधित कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने मौजूदा चरण में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए कहा कि संबंधित अपराध प्रथम दृष्टया बनते हैं और इसी आधार पर अग्रिम जमानत पर वैधानिक रोक लागू होती है। हालांकि यह फैसला अग्रिम जमानत के सवाल से संबंधित है और इसे मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।अब विस्तृत आदेश सामने आने पर अदालत के कानूनी तर्क और स्पष्ट होंगे। फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से अजीत भारती को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत की राहत नहीं मिली है। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही संबंधित अदालतों और जांच प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।
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