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SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी, विपक्ष से संपर्क में कांग्रेस

Kavita2
24 Sept 2026 5:37 PM IST
SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी, विपक्ष से संपर्क में कांग्रेस
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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष ने दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है और इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में इस संबंध में नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं और इसे अगले दो सप्ताह के भीतर पेश किया जा सकता है।

हालांकि संवैधानिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया को आम तौर पर राजनीतिक विमर्श में ‘महाभियोग’ कहा जा रहा है, लेकिन संविधान में इसके लिए ‘रिमूवल’ यानी पद से हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है। मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान आधार और प्रक्रिया के तहत पद से हटाया जा सकता है।

विपक्ष की ताजा पहल ऐसे समय सामने आई है जब SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का भी फैसला किया है।

दो सप्ताह में नोटिस देने की तैयारी

रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया नोटिस लाने के लिए विपक्षी दलों से बातचीत की है। विपक्षी दल लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में हैं।

इससे पहले भी विपक्ष ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर संसदीय प्रक्रिया का सहारा ले चुका है। 24 अप्रैल को 73 विपक्षी सांसदों की ओर से राज्यसभा में दिया गया एक नोटिस अभी लंबित बताया गया है। अब हालिया विवाद के बाद विपक्ष नए तथ्यों और घटनाक्रम को आधार बनाकर एक और नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।

विपक्ष की रणनीति केवल संसद तक सीमित नहीं रहने वाली है। कांग्रेस ने अपनी प्रदेश इकाइयों को भी सड़क पर उतरने के निर्देश दिए हैं।

25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन

कांग्रेस ने सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को 25 सितंबर को अपने-अपने राज्यों में चुनाव आयोग से संबंधित कार्यालयों तक विरोध मार्च आयोजित करने को कहा है। पार्टी की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की जा रही है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार पार्टी ने प्रदेश इकाइयों को बड़े स्तर पर विरोध मार्च आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी की है।

ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उन्हें पद से हटाने की मांग कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी नेताओं की राजनीतिक मांग है। किसी गिरफ्तारी या आपराधिक जिम्मेदारी के बारे में फैसला सक्षम जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

विवाद को नई तेजी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद मिली है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और SIR से जुड़े कुछ मुद्दे शामिल बताए गए हैं। विपक्ष ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग का कहना है कि पिछले एक वर्ष में उसके सभी आदेश पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं।

विपक्ष ने तेज किए हमले

कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अलग-अलग मांगें रखी हैं। कुछ नेताओं ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है, जबकि कुछ ने पूरे मामले की स्वतंत्र या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग उठाई है।

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ फैसलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता से संबंधित गंभीर सवाल हैं। ये विपक्षी दलों के आरोप हैं और चुनाव आयोग ने अपनी ओर से कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य है।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज

भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयुक्तों के बीच किसी विषय पर अलग-अलग विचार होना संस्था के भीतर लोकतांत्रिक विचार-विमर्श को दर्शाता है।

भाजपा नेताओं ने तर्क दिया है कि किसी मुद्दे पर अधिकारियों के अलग विचार सामने आने को चुनाव आयोग की निष्पक्षता के खिलाफ प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस तरह चुनाव आयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं

भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी प्रक्रिया अपनानी होती है। इसके लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया और विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

यही कारण है कि विपक्ष की ओर से नोटिस दिए जाने मात्र से मुख्य चुनाव आयुक्त पद से नहीं हट जाते। प्रस्ताव को संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुजरना होता है।

इससे पहले मार्च 2026 में भी विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिए थे। रिपोर्टों के अनुसार उस समय दोनों सदनों में दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए थे। इसके बाद अप्रैल में राज्यसभा में एक और नोटिस दिया गया, जो अभी लंबित बताया गया है।

SIR विवाद बना राजनीतिक टकराव का केंद्र

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पिछले कुछ समय से विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया और निर्णयों का बचाव करता रहा है।

अब चुनाव आयोग के भीतर मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस ने इसे संसद से सड़क तक उठाने की रणनीति बनाई है। 25 सितंबर के विरोध मार्च और अगले दो सप्ताह के भीतर प्रस्ताव से संबंधित नया नोटिस देने की तैयारी के कारण CEC ज्ञानेश कुमार और SIR का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहने की संभावना है।

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