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IMEC का बढ़ सकता है दायरा कई देशों ने दिखाई रुचि

Ratna Netam
6 Oct 2026 8:15 PM IST
IMEC का बढ़ सकता है दायरा कई देशों ने दिखाई रुचि
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नई दिल्ली। इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC का दायरा आने वाले समय में बढ़ सकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति के IMEC मामलों के विशेष दूत जेरार्ड मेस्ट्रलेट ने मंगलवार को कहा कि मिस्र, लेबनान, ओमान, ग्रीस और साइप्रस समेत कई देशों ने इस महत्वाकांक्षी आर्थिक कॉरिडोर के साथ जुड़ने या इसमें शामिल होने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि इस साल के अंत तक IMEC की मंत्री-स्तरीय बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें सदस्यता बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है।मेस्ट्रलेट 5 से 7 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य IMEC परियोजना और कनेक्टिविटी से जुड़े क्षेत्रों में फ्रांस और भारत के बीच सहयोग को आगे बढ़ाना है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि कॉरिडोर में नए देशों को शामिल करने का फैसला कोई एक देश नहीं कर सकता। इसके लिए मौजूदा आठ हस्ताक्षरकर्ताओं की सहमति जरूरी होगी।
उन्होंने कहा कि IMEC के मौजूदा आठ हस्ताक्षरकर्ता भारत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ हैं। यह समझौता सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया था। इसका उद्देश्य भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए एक नया मल्टी-मॉडल नेटवर्क विकसित करना है।मेस्ट्रलेट ने कहा, “हमारे पास आठ हस्ताक्षरकर्ता हैं और संभावित विस्तार का निर्णय केवल ये आठ सरकारें ही करेंगी।” उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित मंत्री-स्तरीय बैठक में सदस्यता के विस्तार और परियोजना के अगले चरणों को लेकर ठोस निर्णय किए जा सकते हैं। फरवरी 2026 में भारत और फ्रांस के संयुक्त बयान में भी IMEC की पहली मंत्री-स्तरीय बैठक आयोजित कर परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का समर्थन किया गया था।
फ्रांसीसी विशेष दूत ने खास तौर पर मिस्र, लेबनान और ओमान का नाम लिया। उनके अनुसार इन देशों ने कॉरिडोर के साथ काम करने या भविष्य में इससे औपचारिक रूप से जुड़ने में रुचि जताई है। वहीं ग्रीस और साइप्रस को उन्होंने ऐसे यूरोपीय देशों के रूप में बताया जो पूर्ण सदस्यता को लेकर विशेष रूप से उत्सुक हैं।IMEC का प्रस्तावित नेटवर्क लगभग 6,400 किलोमीटर लंबा बताया गया है। इसमें भारत से अरब प्रायद्वीप तक समुद्री मार्ग, पश्चिम एशिया के भीतर रेल संपर्क और फिर भूमध्य सागर के रास्ते यूरोप तक समुद्री कनेक्टिविटी शामिल है। इसके अलावा परियोजना में बिजली ट्रांसमिशन, ग्रीन हाइड्रोजन पाइपलाइन और डिजिटल डेटा केबल जैसे घटकों की भी परिकल्पना की गई है।
मेस्ट्रलेट ने जॉर्डन और इजराइल की स्थिति को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों देश 2023 के मूल समझौते के आठ औपचारिक हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं थे, लेकिन समझौते में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया था। प्रस्तावित स्थल मार्ग अरब प्रायद्वीप से जॉर्डन होते हुए इजराइल के हाइफा बंदरगाह तक जाने की योजना से जुड़ा है।उन्होंने कहा कि जॉर्डन और इजराइल ने मूल समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए क्योंकि वे उस समय हस्ताक्षर करने वाले समूह का हिस्सा नहीं थे, लेकिन कॉरिडोर की संरचना में उनकी भौगोलिक भूमिका महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि IMEC की सदस्यता और उसके वास्तविक परिचालन नेटवर्क के बीच अंतर को समझना जरूरी है।IMEC को भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार की आवाजाही तेज करने और मौजूदा समुद्री मार्गों के विकल्प विकसित करने की एक बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावित रेल और समुद्री नेटवर्क के जरिए माल परिवहन का समय कम करने, सप्लाई चेन को अधिक लचीला बनाने और ऊर्जा तथा डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने का लक्ष्य है।फ्रांस इस परियोजना में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मेस्ट्रलेट को फरवरी 2024 में IMEC के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था। फ्रांस ने बार-बार यह कहा है कि वह भूमध्य सागर के जरिए यूरोप तक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी विकसित करने में केंद्रीय भूमिका निभाना चाहता है।
भारत और फ्रांस ने भी फरवरी 2026 में जारी संयुक्त बयान में IMEC की वैश्विक व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने की क्षमता पर जोर दिया था। दोनों देशों ने परियोजना की पहली मंत्री-स्तरीय बैठक आयोजित करने का समर्थन किया, ताकि योजनाओं को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदला जा सके।ग्रीस की रुचि भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूरोप में अपनी भौगोलिक स्थिति और बड़े बंदरगाह नेटवर्क के कारण ग्रीस खुद को IMEC के यूरोपीय प्रवेश द्वारों में से एक के रूप में स्थापित करना चाहता है। साइप्रस भी पूर्वी भूमध्य सागर में अपनी स्थिति के कारण परियोजना से जुड़ने में दिलचस्पी दिखा रहा है।वहीं मिस्र और ओमान जैसे देशों की संभावित भागीदारी से कॉरिडोर को वैकल्पिक समुद्री और लॉजिस्टिक लिंक मिल सकते हैं। हालांकि फिलहाल इनमें से किसी देश की औपचारिक सदस्यता तय नहीं हुई है। मेस्ट्रलेट ने साफ किया कि सदस्यता विस्तार पर अंतिम फैसला आठ मौजूदा हस्ताक्षरकर्ता ही सामूहिक रूप से करेंगे।
IMEC की राह में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत, फ्रांस और दूसरे साझेदार इसे दीर्घकालिक आर्थिक एवं कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।अब नजर प्रस्तावित मंत्री-स्तरीय बैठक पर रहेगी। यदि आठ हस्ताक्षरकर्ता सदस्यता विस्तार पर सहमत होते हैं तो IMEC का भौगोलिक और आर्थिक दायरा काफी बड़ा हो सकता है। इससे भारत से पश्चिम एशिया और आगे यूरोप तक व्यापार, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए नए रास्ते खुलने की संभावना है।
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