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SC ने भूपेश बघेल की चुनाव याचिका मामले में दखल से किया इनकार, HC में जारी रहेगी सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज करने से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के इनकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से बघेल को अपना पक्ष रखने और बचाव करने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले भूपेश बघेल का मामला ऐसा है जिस पर विस्तृत बहस की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर समाप्त करना उचित नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बघेल की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि एसएलपी खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान बघेल अपने सभी कानूनी तर्क और बचाव के आधार पेश करने से वंचित हो जाएंगे।
पीठ ने कहा कि चुनाव याचिका पर आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को कानून के अनुसार अपने-अपने पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। अदालत का यह रुख भूपेश बघेल के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।
मामला 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। चुनाव परिणाम के बाद बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया और उससे जुड़े कुछ मुद्दों को आधार बनाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की थी।
भूपेश बघेल की ओर से इस याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। उनका पक्ष था कि चुनाव याचिका में पर्याप्त आधार नहीं हैं और इसे आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया था।
हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बघेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था कि चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त कर दिया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब चुनाव याचिका की सुनवाई हाई कोर्ट में जारी रहेगी। इस दौरान याचिकाकर्ता और भूपेश बघेल दोनों को अपने-अपने पक्ष में साक्ष्य और कानूनी दलीलें पेश करने का अवसर मिलेगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव याचिकाओं में अदालतें आमतौर पर शुरुआती स्तर पर तभी हस्तक्षेप करती हैं जब मामला पूरी तरह आधारहीन हो या कानून के तहत सुनवाई योग्य न हो। यदि मामले में तथ्य और कानूनी मुद्दों पर बहस की संभावना होती है, तो अदालतें अक्सर विस्तृत सुनवाई का रास्ता अपनाती हैं।
भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह 2018 से 2023 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे और 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट से जीत दर्ज की थी। चुनाव याचिका के कारण अब उनके निर्वाचन को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि शीर्ष अदालत ने फिलहाल चुनाव याचिका की मेरिट पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल इतना तय किया है कि मामले को शुरुआती स्तर पर समाप्त नहीं किया जा सकता और इसकी सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए।
अब सभी की नजरें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर रहेंगी। चुनाव याचिका में उठाए गए मुद्दों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
इस फैसले के साथ भूपेश बघेल को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अपना बचाव प्रस्तुत करने का अवसर बरकरार है। वहीं, याचिकाकर्ता को भी अपने आरोपों के समर्थन में अदालत के सामने तथ्य रखने होंगे।





