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FSSAI की कार्रवाई, AWL एग्री बिजनेस पर घटिया फोर्टिफाइड सूरजमुखी तेल बेचने के मामले में जुर्माना

Kavita2
7 Aug 2026 1:34 PM IST
FSSAI की कार्रवाई, AWL एग्री बिजनेस पर घटिया फोर्टिफाइड सूरजमुखी तेल बेचने के मामले में जुर्माना
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नई दिल्ली। खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती दिखाते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाने के तेल की बड़ी कंपनी AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की है। कंपनी पर घटिया गुणवत्ता वाले फोर्टिफाइड सूरजमुखी कुकिंग ऑयल के निर्माण और बिक्री के मामले में जुर्माना लगाया गया है।

अहमदाबाद स्थित AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड अपने खाने के तेल को लोकप्रिय ‘फॉर्च्यून’ ब्रांड के तहत बाजार में बेचती है। FSSAI की जांच में सामने आया कि कंपनी के एक फोर्टिफाइड सूरजमुखी तेल के नमूने में निर्धारित मानकों के अनुसार विटामिन D की मात्रा नहीं पाई गई।

खाद्य नियामक के अनुसार, यह मामला गोवा से लिए गए एक तेल के नमूने की जांच के बाद सामने आया। लैब परीक्षण में पाया गया कि नमूने में विटामिन D का स्तर तय सीमा से काफी कम था। इसके बाद नियामक ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

FSSAI ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि मामले में एडजुडिकेशन ऑर्डर पारित किया गया है और AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड पर जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, नियामक की ओर से जुर्माने की राशि की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त पोषक तत्व मिलाए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं को आवश्यक विटामिन और खनिज मिल सकें। भारत में खाद्य तेलों को भी कई बार विटामिन A और विटामिन D से फोर्टिफाइड किया जाता है, ताकि पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में मदद मिल सके।

विटामिन D शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। यह हड्डियों की मजबूती, कैल्शियम के अवशोषण और शरीर की कई अन्य प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में फोर्टिफाइड उत्पादों में तय मात्रा में पोषक तत्वों की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।

FSSAI देश में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर बाजार से नमूने लेकर उनकी जांच करता है। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पादों और कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड भारत की प्रमुख खाद्य तेल कंपनियों में शामिल है। कंपनी कई तरह के खाद्य तेलों का उत्पादन और बिक्री करती है। ‘फॉर्च्यून’ ब्रांड देशभर में उपभोक्ताओं के बीच जाना-पहचाना नाम है।

खाद्य नियामक की इस कार्रवाई को उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि उपभोक्ता इन उत्पादों को अतिरिक्त पोषण की उम्मीद के साथ खरीदते हैं।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कंपनियों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने उत्पादों में निर्धारित मानकों का पालन करें। किसी भी उत्पाद में पोषक तत्वों की मात्रा तय सीमा से कम या ज्यादा पाए जाने पर नियामक कार्रवाई कर सकता है।

FSSAI लगातार खाद्य उत्पादों की निगरानी के लिए अभियान चलाता रहता है। खासतौर पर उन उत्पादों पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जिनका सेवन बड़ी संख्या में लोग करते हैं।

इस मामले में नियामक की जांच प्रक्रिया के तहत नमूना संग्रह, लैब परीक्षण और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई की गई। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि खाद्य गुणवत्ता से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

उपभोक्ताओं के लिए भी यह घटना एक संदेश है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय लेबल, गुणवत्ता प्रमाणन और पैकिंग संबंधी जानकारी पर ध्यान दें। वहीं, कंपनियों के लिए यह जरूरी है कि वे उत्पादन प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण को प्राथमिकता दें।

AWL एग्री बिजनेस के खिलाफ हुई यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में गुणवत्ता मानकों के महत्व को फिर से रेखांकित करती है। आने वाले समय में FSSAI की निगरानी और सख्त जांच व्यवस्था से खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की कोशिश जारी रहने की उम्मीद है।

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