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SC ने वरिष्ठ अधिकारियों रोहिणी सिंधुरी, डी रूपा को मध्यस्थता के लिए भेजा

New Delhi, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीनियर IPS अधिकारी डी रूपा मौदगिल और सीनियर IAS अधिकारी रोहिणी सिंधुरी से कहा कि वे अपने लंबे समय से चल रहे विवाद को बातचीत (मध्यस्थता) से सुलझा लें। कोर्ट ने कहा कि लगातार चल रहे कानूनी विवाद से कर्नाटक की इन दोनों सीनियर अधिकारियों के करियर पर बुरा असर पड़ रहा है। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने उनके बीच मानहानि के मामले को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म करने की कोशिश में इसे मध्यस्थता के लिए भेज दिया।
बेंच ने कहा, "दोनों बेहतरीन अधिकारी हैं। वे एक-दूसरे का करियर बर्बाद कर रहे हैं... इस कोर्ट का मानना है कि मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है।" इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के बीच समझौता कराने के लिए पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया। अंतरिम उपाय के तौर पर, कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों अधिकारियों के बीच लंबित मामलों में आगे की सभी कार्यवाही अगले आदेश तक रुकी रहेगी। 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने सिंधुरी द्वारा रूपा के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कर्नाटक की इन सीनियर सिविल सर्वेंट्स को मीडिया से बात न करने का निर्देश भी दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह कार्यवाही तब रोकी थी जब IPS अधिकारी रूपा ने पिछले आदेश के तहत IAS अधिकारी सिंधुरी के खिलाफ विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के लिए हलफनामा दायर किया था।सिंधुरी द्वारा दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत को रद्द करने के लिए रूपा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें पोस्ट हटाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट, रूपा द्वारा कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें हाई कोर्ट ने सिंधुरी द्वारा उनके खिलाफ शुरू किए गए आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
सिंधुरी का दावा था कि रूपा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कथित तौर पर उनकी "छवि खराब" (character assassination) करने की कोशिश की। सिंधुरी ने अपनी मानहानि की शिकायत में आरोप लगाया कि रूपा ने तस्वीरें शेयर कीं, सोशल मीडिया पर आरोप लगाए और मीडिया में बयान देकर उनके निजी और पेशेवर आचरण पर सवाल उठाए, ताकि जनता और सहयोगियों के सामने उनकी छवि खराब हो सके। इसके चलते दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से झगड़ा हुआ, जिसके बाद राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया।
सिंधुरी ने रूपा को कानूनी नोटिस भेजा और बिना शर्त माफी के साथ-साथ अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान और मानसिक परेशानी के लिए 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की। बेंगलुरु की एक अदालत ने सिंदूरी की ओर से दायर निजी मुकदमे पर सुनवाई करते हुए रूपा के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद रूपा ने मामला रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद, रूपा ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर अधिकारी आपस में लड़ते रहे और मध्यस्थता से इनकार करते रहे, तो राज्य प्रशासन ठप हो जाएगा।





