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दिल्ली-एनसीआर
स्कूल सुधार अभियान को SC की हरी झंडी लेकिन तय नियमों के साथ
Ratna Netam
3 Sept 2026 4:41 PM IST

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नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर चलाए जा रहे **कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'स्कूल ठीक करो' अभियान** को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है। अब स्कूल परिसर में जाने, फोटो खींचने, वीडियो बनाने या किसी तरह की रिकॉर्डिंग करने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं है। इसके बाद फिलहाल दोनों राज्यों में सरकारी स्कूलों को लेकर जारी दिशा-निर्देश लागू रहेंगे।
क्या है CJP का 'स्कूल ठीक करो' अभियान
कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत कार्यकर्ता और स्वयंसेवक सरकारी स्कूलों में जाकर वहां की सुविधाओं का जायजा लेते थे और कमियों को सामने लाने के लिए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते थे।
अभियान के दौरान कई जगहों पर स्कूलों में खराब शौचालय, टूटी इमारतें, पेयजल की समस्या, फर्नीचर की कमी और मिड-डे मील से जुड़ी शिकायतों को उठाया गया। इसके बाद सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा शुरू हो गई।
CJP का तर्क था कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए लोगों को वहां जाकर निरीक्षण करने और समस्याओं को रिकॉर्ड करने का अधिकार होना चाहिए।
सरकारों ने क्यों लगाई पाबंदी
उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर नियम सख्त किए थे। सरकारों का कहना था कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निजता और शैक्षणिक माहौल बनाए रखना जरूरी है।
राजस्थान में सरकारी स्कूल परिसर में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य से अनुमति लेने और फोटो, वीडियो, इंटरव्यू या लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पहले से मंजूरी लेने का प्रावधान किया गया था। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी बिना अनुमति स्कूलों में प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए थे।
सरकारों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश से पहले उचित जांच और अनुमति जरूरी है।
याचिका में क्या दलील दी गई
इन प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकारी स्कूलों की कमियां सामने लाने के लिए स्वतंत्र निरीक्षण जरूरी है।
याचिका में दावा किया गया कि इस तरह की रोक से पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है और सरकारी संस्थानों की वास्तविक स्थिति जनता तक पहुंचने में बाधा आ सकती है।
याचिकाकर्ता ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार से जोड़ते हुए चुनौती दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
बच्चों की सुरक्षा बनाम पारदर्शिता की बहस
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता के बीच संतुलन का है।
एक पक्ष का कहना है कि स्कूलों में बाहरी लोगों की अनियंत्रित आवाजाही बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि सरकारी स्कूलों की कमियां सामने लाने के लिए सामाजिक निगरानी जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें बच्चों की निजता और सुरक्षा भी बनी रहे और स्कूलों की वास्तविक स्थिति की जांच भी संभव हो सके।
अभियान से उठे कई सवाल
CJP के अभियान ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए। अभियान के बाद कई जगह प्रशासन ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने शुरू किए।
कई राज्यों में स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल और अन्य सुविधाओं को लेकर समीक्षा की गई। इस अभियान को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई और विपक्षी दलों ने इसे सरकारों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने के मौके के रूप में इस्तेमाल किया।
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP के कार्यकर्ताओं को सरकारी स्कूलों में जाने से पहले अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति प्रवेश या रिकॉर्डिंग करने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और सुविधाएं बेहतर करने का मुद्दा अभी भी चर्चा में बना रहेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकारें स्कूलों की कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्कूलों में प्रवेश और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर सरकारों के नियमों को मजबूती मिली है, जबकि CJP के अभियान के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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