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रूस ने दिया बड़ा ऑफर, भारत का एयर डिफेंस होगा और मजबूत, चीन-पाक की बढ़ेगी टेंशन

Gulabi Jagat
30 Aug 2026 8:30 PM IST
रूस ने दिया बड़ा ऑफर, भारत का एयर डिफेंस होगा और मजबूत, चीन-पाक की बढ़ेगी टेंशन
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संभावित सौदे की कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही

नई दिल्ली: भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ी खबर सामने आई है। रूस ने भारत को S-400 वायु रक्षा प्रणाली के पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन देने का प्रस्ताव सौंपा है। यह प्रस्ताव भारत की ओर से जारी निविदा के जवाब में दिया गया है और संभावित सौदे की कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। प्रस्ताव पर फिलहाल आगे की प्रक्रिया चल रही है।

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, भारत अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन के जरिए अपनी बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करना चाहता है। नई प्रणालियों को देश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर तैनात किए जाने की संभावना है।

रूस से मिल चुका है प्रस्ताव

रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत की निविदा पर रूस की प्रतिक्रिया मिल चुकी है। अब प्रस्ताव का मूल्यांकन और उससे जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि अतिरिक्त पांच स्क्वाड्रन की खरीद को लेकर अंतिम समझौता होने तक कीमत, डिलीवरी और अन्य शर्तों में बदलाव संभव है।

भारत ने इससे पहले अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदने के लिए लगभग 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था। इस प्रणाली को भारतीय वायुसेना में शामिल करने के बाद देश की लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।

भारत को मिल चुके हैं चार स्क्वाड्रन

पहले समझौते के तहत भारत को पांच में से चार S-400 स्क्वाड्रन मिल चुके हैं। पांचवें और अंतिम स्क्वाड्रन की डिलीवरी का इंतजार किया जा रहा है। अगर पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन की खरीद के लिए नया समझौता होता है तो भारत के पास S-400 की कुल संख्या में बड़ा इजाफा होगा। नए समझौते के बाद प्रणालियों की डिलीवरी शुरू होने में करीब तीन साल लगने की संभावना जताई गई है।

ऑपरेशन सिंदूर में चर्चा में रहा S-400

S-400 प्रणाली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी भूमिका को लेकर काफी चर्चा में रही। भारतीय सैन्य अधिकारियों की ओर से अभियान के बाद लंबी दूरी पर पाकिस्तानी हवाई गतिविधियों के खिलाफ भारतीय एयर डिफेंस की प्रभावशीलता का जिक्र किया गया था।

पश्चिमी वायु कमान से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी ने भी S-400 की लंबी दूरी की क्षमता को लेकर जानकारी साझा की थी। हालांकि युद्ध के दौरान नष्ट किए गए विमानों की संख्या और प्रकार को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, इसलिए इन आंकड़ों को आधिकारिक रूप से पुष्ट विवरण के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

280 से अधिक मिसाइलों की खरीद की भी योजना

भारत अपने S-400 शस्त्रागार को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त मिसाइलें हासिल करने की दिशा में भी काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक 280 से अधिक मिसाइलों की खरीद की योजना है।

S-400 की खासियत अलग-अलग ऊंचाई और दूरी पर आने वाले हवाई खतरों का पता लगाकर उन्हें निशाना बनाने की क्षमता है। यह लड़ाकू विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे विभिन्न हवाई खतरों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित प्रणाली है।

प्रोजेक्ट कुशा पर भी तेजी से काम

विदेशी एयर डिफेंस सिस्टम के साथ भारत स्वदेशी क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। प्रोजेक्ट कुशा के तहत लंबी दूरी की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक और बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा मिशन सुदर्शन चक्र के तहत भी देश की महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

अगर रूस के पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन का प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इससे भारत की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर हवाई निगरानी और रक्षा क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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