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बढ़ते प्रदूषण से बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा: डॉक्टर अतुल माथुर की चेतावनी
SHIDDHANT
30 Oct 2025 9:22 PM IST

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Delhiदिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण (Air Pollution) ने एक बार फिर से स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन (कार्डियोलॉजी) और चीफ ऑफ कैथ लैब्स डॉ. अतुल माथुर ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण अब केवल सांस और फेफड़ों की बीमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक का बड़ा कारण बन चुका है। डॉ. माथुर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से प्रदूषण पर कई वैज्ञानिक अध्ययन (Studies) हो चुके हैं और यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदूषित हवा का दिल पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि शहरों में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत वाहन उत्सर्जन (Vehicular Emission) और औद्योगिक गैसें (Toxic Industries Emission) हैं, जिनसे निकलने वाले सूक्ष्म कण — खासकर PM 2.5 और PM 10 — मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं।
उन्होंने समझाया कि इन कणों का आकार बेहद छोटा होता है — 0.25 से 10 माइक्रॉन (ppm) तक — जो सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ये कण और गैसें शरीर में सूजन (Inflammation) पैदा करती हैं, जिससे दिल की धमनियों की परत (Arterial Lining) को नुकसान पहुंचता है। डॉ. माथुर ने कहा, “जब हृदय की कोरोनरी आर्टरी की अंदरूनी परत में सूजन होती है या वह घायल होती है, तो वहां ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। यही आगे चलकर ब्लॉकेज और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। विशेषज्ञ ने बताया कि लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल असंतुलन और हृदय संबंधी विकारों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि यह खतरा न केवल बुजुर्गों में बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है, खासकर उन लोगों में जो मेट्रो शहरों में रहते हैं और अधिक समय बाहर बिताते हैं।
डॉ. माथुर ने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “जब हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो, तो लोग बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें। सामान्य कपड़े या मोटे मास्क से सांस लेने में परेशानी हो सकती है, इसलिए हल्के और फिल्टर वाले मास्क का इस्तेमाल करें।” उन्होंने यह भी कहा कि सुबह की सैर (Morning Walk) या आउटडोर एक्सरसाइज जैसी गतिविधियां ऐसे दिनों में टालनी चाहिए जब AQI बेहद खराब (Severe) श्रेणी में हो। उन्होंने सरकार और नगर निगम से आग्रह किया कि वे वाहनों के उत्सर्जन नियंत्रण, औद्योगिक धुएं की निगरानी और हरियाली बढ़ाने जैसे कदमों पर तेजी से काम करें। उनका कहना है कि केवल व्यक्तिगत स्तर पर सावधानी काफी नहीं है — जब तक सामूहिक प्रयास नहीं होंगे, तब तक लोगों को प्रदूषण के खतरों से नहीं बचाया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में इस मौसम में हर साल स्मॉग, वाहन धुआं और पराली जलाने के कारण प्रदूषण स्तर चरम पर पहुंच जाता है, जिससे अस्पतालों में हृदय और श्वसन संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
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