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ऋषभ सिंह संब्याल का खुलासा इस त्याग ने बदल दी जिंदगी
Ratna Netam
11 Sept 2026 5:07 PM IST

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एड-डी-कैंप (ADC) मेजर **ऋषभ सिंह संब्याल** एक बार फिर चर्चा में हैं। राष्ट्रपति के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों में अपनी अनुशासित मौजूदगी के कारण सोशल मीडिया पर पहचान बनाने वाले संब्याल ने अब ADC के तौर पर अपनी जिंदगी से जुड़ी ऐसी बात बताई है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। उन्होंने बताया कि इस बेहद प्रतिष्ठित जिम्मेदारी को निभाते हुए निजी जिंदगी में कई त्याग करने पड़ते हैं। इनमें एक बड़ा त्याग **शादी को टालना** भी था। उनके मुताबिक राष्ट्रपति के ADC के रूप में रहते हुए जिम्मेदारियां और प्रोटोकॉल इतने सख्त होते हैं कि निजी जीवन के कई फैसलों को पीछे रखना पड़ता है।
मेजर संब्याल ने लगभग 12 साल तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद समय से पहले रिटायरमेंट लिया है। उनका कहना है कि सेना छोड़ना उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जिस वर्दी को पहनना बचपन का सपना था, उसे इस तरह समय से पहले उतारना पड़ेगा।
ADC रहते शादी को रखा पीछे
मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के हालिया खुलासे में सबसे ज्यादा ध्यान उनकी निजी जिंदगी से जुड़े त्याग ने खींचा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के ADC की भूमिका सामान्य सैन्य पोस्टिंग जैसी नहीं होती। इसमें अधिकारी को राष्ट्रपति के बेहद व्यस्त कार्यक्रम के अनुसार खुद को उपलब्ध रखना पड़ता है। आधिकारिक समारोहों से लेकर यात्राओं और दूसरे कार्यक्रमों तक ADC की जिम्मेदारियां लगातार चलती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक संब्याल ने बताया कि इस दौरान शादी जैसे निजी फैसले को भी टालना पड़ा। उन्होंने इसे अपनी सेवा के दौरान किए गए त्यागों में गिना।
उनके मुताबिक ADC के तौर पर सेवा करते समय कई तरह के सख्त प्रोटोकॉल का पालन करना होता है और जिम्मेदारी को निजी प्राथमिकताओं से ऊपर रखना पड़ता है।
आखिर क्या होता है राष्ट्रपति का ADC?
ADC का पूरा नाम **Aide-de-Camp** होता है। राष्ट्रपति के ADC के तौर पर चुना जाना सैन्य अधिकारियों के लिए बेहद प्रतिष्ठित जिम्मेदारी मानी जाती है।
ADC राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों में उनके साथ रहता है और प्रोटोकॉल, समन्वय, कार्यक्रमों तथा अन्य आधिकारिक जिम्मेदारियों को संभालने में भूमिका निभाता है।
संब्याल भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय समारोहों, राजनयिक कार्यक्रमों और विदेश यात्राओं समेत कई महत्वपूर्ण मौकों पर दिखाई दिए थे।
उनकी यही मौजूदगी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
सोशल मीडिया पर बने चर्चित चेहरा
राष्ट्रपति मुर्मू के साथ मेजर संब्याल के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।
कभी राष्ट्रपति के लिए छाता पकड़े तो कभी किसी भावुक मौके पर उनकी सहायता करते संब्याल के वीडियो लोगों को पसंद आए। उनके सैन्य अनुशासन और व्यक्तित्व को लेकर सोशल मीडिया पर इतनी चर्चा हुई कि कुछ यूजर्स उन्हें 'नेशनल क्रश' तक कहने लगे।
हालांकि इस वायरल लोकप्रियता से काफी पहले संब्याल का सैन्य करियर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से जुड़ा रहा है।
NDA से शुरू हुआ सेना का सफर
ऋषभ सिंह संब्याल ने 2013 में NDA की परीक्षा पास की थी और इसके बाद सैन्य प्रशिक्षण का रास्ता चुना। वह 2014 में शुरू हुए 133वें NDA कोर्स का हिस्सा रहे और बाद में भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण लिया।
उनके सैन्य करियर का एक महत्वपूर्ण मौका 2021 के गणतंत्र दिवस पर आया।
तत्कालीन कैप्टन ऋषभ संब्याल ने गणतंत्र दिवस परेड में **जाट रेजिमेंट** की टुकड़ी का नेतृत्व किया था। उनकी टुकड़ी ने सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंजेंट की ट्रॉफी भी जीती थी।
इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना की एलीट **4 पैरा स्पेशल फोर्सेज** यूनिट में भी सेवा दी। यह यूनिट 'डैगर्स' के नाम से जानी जाती है।
राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा सफर
सेना में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद संब्याल को राष्ट्रपति के ADC के रूप में चुना गया।
राष्ट्रपति भवन में पोस्टिंग के बाद वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का हिस्सा बनने लगे।
राष्ट्रपति के ADC का काम केवल उनके पीछे खड़े रहना या समारोह में मौजूद रहना नहीं होता। आधिकारिक कार्यक्रमों का समन्वय, प्रोटोकॉल और राष्ट्रपति के कार्यक्रम से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां इस भूमिका का हिस्सा होती हैं।
यही कारण है कि ADC की दिनचर्या बेहद अनुशासित और व्यस्त हो सकती है।
क्यों लिया समय से पहले रिटायरमेंट?
सबसे बड़ा सवाल यह था कि शानदार सैन्य करियर और प्रतिष्ठित जिम्मेदारी के बावजूद संब्याल ने सेना से समय से पहले रिटायरमेंट क्यों लिया?
उन्होंने बताया कि इस फैसले के पीछे निजी और पारिवारिक जिम्मेदारियां थीं।
उनके मुताबिक उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें सेना छोड़ने का फैसला करना पड़ेगा। इस निर्णय तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्होंने करीब चार महीने तक इस पर विचार किया।
उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे कठिन फैसलों में से एक बताया।
परिवार के साथ बातचीत और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद आखिरकार उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लेने का निर्णय किया।
'स्वार्थी नहीं बनना चाहता था'
संब्याल के मुताबिक उनके सामने निजी और पेशेवर जिंदगी के बीच कठिन चुनाव की स्थिति थी।
वह अपनी जिम्मेदारियों को केवल अपनी इच्छा के आधार पर नहीं देखना चाहते थे। परिवार की जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी था। इसी कारण उन्होंने ऐसा रास्ता चुना, जिसकी कभी कल्पना तक नहीं की थी।
उनकी बातों से यह भी सामने आता है कि किसी प्रतिष्ठित सैन्य पद की चमक के पीछे व्यक्तिगत स्तर पर कई समझौते और त्याग छिपे हो सकते हैं।
वर्दी उतारना था बेहद मुश्किल
संब्याल के लिए भारतीय सेना केवल नौकरी नहीं थी।
उन्होंने बताया कि सेना की वर्दी पहनना बचपन से उनका सपना था। इसलिए लगभग 12 वर्षों की सेवा के बाद उसे छोड़ने का फैसला भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रहा।
सेना छोड़ने के बाद भी उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी रोजमर्रा की सैन्य दिनचर्या और वर्दी की याद आती है।
यही वजह है कि उनके समय से पहले रिटायरमेंट ने सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों को भी चौंका दिया था।
राष्ट्रपति मुर्मू से की मुलाकात
रिटायरमेंट के बाद संब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
उन्होंने इस मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं और राष्ट्रपति से मिले मार्गदर्शन तथा सीख के लिए आभार जताया। उन्होंने राष्ट्रपति के परिवार से दोबारा मिलने पर भी खुशी जाहिर की।
राष्ट्रपति के ADC के तौर पर उनकी पहचान इतनी मजबूत हो गई थी कि पद छोड़ने के बाद भी उनकी राष्ट्रपति मुर्मू के साथ तस्वीरों की खूब चर्चा हुई।
अब आगे क्या करेंगे ऋषभ संब्याल?
सेना से रिटायरमेंट का मतलब संब्याल के लिए सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाना नहीं है।
उन्होंने बताया है कि वह भविष्य के लिए एक मॉडल पर काम कर रहे हैं, जिसमें युवाओं को प्रेरित करना भी शामिल है। साथ ही वह देश के विकास में योगदान देने और अपनी व्यक्तिगत प्रगति पर काम करने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि उन्होंने अपने अगले पेशेवर कदम की हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
उन्होंने इतना जरूर संकेत दिया है कि सेना के बाद शुरू होने वाली जिंदगी का नया अध्याय भी उनके लिए महत्वपूर्ण होगा।
शादी का त्याग क्यों बना चर्चा का विषय?
संब्याल की कहानी में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि ADC जैसी प्रतिष्ठित जिम्मेदारी के साथ निजी जिंदगी किस तरह प्रभावित होती है।
बाहर से देखने पर राष्ट्रपति के साथ देश-विदेश के बड़े कार्यक्रमों में शामिल होना बेहद ग्लैमरस दिखाई दे सकता है। लेकिन इसके पीछे लगातार उपलब्ध रहने की जिम्मेदारी, अनुशासन और प्रोटोकॉल होते हैं।
संब्याल ने इसी संदर्भ में निजी जीवन में किए गए त्यागों का जिक्र किया है। शादी को टालना उन्हीं में से एक था।
हालांकि इसे सभी ADC अधिकारियों पर लागू होने वाला सार्वभौमिक नियम समझने के बजाय संब्याल द्वारा अपने कार्यकाल और परिस्थितियों के बारे में बताया गया व्यक्तिगत अनुभव मानना अधिक सही होगा।
12 साल की सेवा के बाद जिंदगी का नया अध्याय
ऋषभ सिंह संब्याल की कहानी केवल सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक सैन्य अधिकारी की नहीं है।
NDA से शुरुआत, गणतंत्र दिवस पर जाट रेजिमेंट का नेतृत्व, 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में सेवा और फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC की प्रतिष्ठित जिम्मेदारी—उनका करीब 12 साल का सैन्य सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा।
अब उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते समय से पहले सेना छोड़कर जीवन का नया अध्याय शुरू किया है।
इस बीच उनका सबसे चर्चित खुलासा यही है कि राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें निजी जिंदगी में कई चीजों का त्याग करना पड़ा और शादी को भी पीछे रखना पड़ा।
वर्दी उतारने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन संब्याल की बातों से साफ है कि उन्होंने इसे जिंदगी की बदलती परिस्थितियों और परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर लिया।
अब उनके प्रशंसकों की निगाह इस बात पर है कि राष्ट्रपति भवन और भारतीय सेना से विदाई के बाद ऋषभ सिंह संब्याल अपनी जिंदगी की अगली पारी किस दिशा में ले जाते हैं।
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