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सुजाता होटल को हाई कोर्ट से राहत PMLA आरोपों पर लगी रोक
Ratna Netam
5 Oct 2026 2:51 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम यानी IRCTC के दो होटलों के ठेके दिए जाने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल सुजाता होटल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में तय किए गए आरोपों की कार्यवाही पर रोक रहेगी।
जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। होटल ने राउज एवेन्यू कोर्ट के सितंबर 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत आरोप तय किए गए थे। सुजाता होटल की ओर से हाई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की गई थी।
सोमवार की सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दी गई अंतरिम सुरक्षा सिर्फ सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड तक सीमित रहेगी। मामले में शामिल दूसरे आरोपियों को इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा। यानी अन्य आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर इस आदेश का सीधा असर नहीं पड़ेगा। हाई कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को भी नोटिस जारी किया है और एजेंसी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
मामले की जड़ IRCTC के दो होटल प्रोजेक्ट से जुड़ी है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के प्रबंधन, संचालन और विकास से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं की गई थीं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पात्रता शर्तों में बदलाव और बोली के मूल्यांकन से जुड़े फैसलों के जरिए सुजाता होटल को लाभ पहुंचाया गया। बाद में इसी कथित प्रक्रिया से जुड़े लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दायरे में लिया गया।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सितंबर में मामले के कई आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत के 10 सितंबर 2026 के विस्तृत आदेश में सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया था। अदालत के अनुसार अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि कंपनी को IRCTC के रांची और पुरी स्थित होटलों का ठेका दिलाने में कथित तौर पर अनियमित तरीके अपनाए गए और इससे जुड़े भूमि लेन-देन को कथित अपराध की आय यानी 'proceeds of crime' के तौर पर देखा गया।
मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA के तहत जांच की थी। ED का आरोप रहा है कि कथित आपराधिक साजिश के तहत सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित कर होटल टेंडर का लाभ सुजाता होटल को पहुंचाया गया और इसके बदले संबंधित भूमि लेन-देन के जरिए आर्थिक लाभ की व्यवस्था की गई। इन आरोपों को लेकर निचली अदालत ने सुनवाई के बाद कुछ आरोपियों के खिलाफ मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए आरोप तय किए थे। हालांकि, आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
सितंबर के आदेश के बाद इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने लगी थी। 3 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोपों को औपचारिक रूप से पढ़े जाने और आरोपियों की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट किए जाने की प्रक्रिया तय थी। उस समय मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अब दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से सुजाता होटल को मिली अंतरिम राहत से मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित हो गया है। हाई कोर्ट ने ED को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने वाले आदेश के खिलाफ सुजाता होटल की चुनौती पर आगे किस तरह सुनवाई की जाएगी।
अदालत का यह आदेश केवल सुजाता होटल के संबंध में है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतरिम सुरक्षा का दायरा अन्य आरोपियों तक नहीं बढ़ाया गया है। इसलिए मामले में शामिल बाकी आरोपियों के खिलाफ पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी रह सकती है। इस अंतर को देखते हुए हाई कोर्ट का सोमवार का आदेश मामले के एक पक्ष को मिली सीमित राहत के रूप में देखा जा रहा है।
मामले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह कई साल पुराने IRCTC होटल टेंडर और उससे जुड़े कथित भूमि लेन-देन से संबंधित है। जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार के कथित मूल अपराध और उसके बाद कथित मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी के रूप में देख रही हैं। वहीं आरोपी पक्षों को अपनी कानूनी दलीलें रखने का पूरा अधिकार है और आरोपों का अंतिम परीक्षण अदालत में होना है।
सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश अब इस मुकदमे में एक नया कानूनी मोड़ लेकर आया है। फिलहाल कंपनी के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने वाले निचली अदालत के आदेश पर रोक है, जबकि ED को चार सप्ताह में जवाब देना है। आगे की सुनवाई में हाई कोर्ट यह देखेगा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर क्या निर्देश दिए जाते हैं। तब तक सुजाता होटल के संबंध में सोमवार को दी गई अंतरिम सुरक्षा प्रभावी रहेगी।
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