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आइशी घोष को राहत, अदालत ने 2021 मामले में जारी गैर-जमानती वारंट किए रद्द

नई दिल्ली। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की जॉइंट सेक्रेटरी आइशी घोष को 2021 के एक मामले में अदालत से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को रद्द कर दिया। यह फैसला उस समय आया, जब घोष अदालत में पेश हुईं।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विजयश्री राठौर ने सुनवाई के दौरान आइशी घोष की मौजूदगी के बाद उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश का अभी इंतजार है।
इससे पहले बुधवार को अदालत ने घोष के खिलाफ जारी NBW पर अस्थायी रोक लगा दी थी। घोष के वकील ने अदालत को बताया था कि कुछ "अनिवार्य परिस्थितियों" के कारण वह पिछली सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित नहीं हो सकी थीं। वकील की दलील के बाद अदालत ने वारंट पर रोक लगाने का फैसला किया था।
अदालत की कार्रवाई के बाद गुरुवार को घोष की पेशी हुई, जिसके बाद उनके खिलाफ जारी वारंट को वापस ले लिया गया। अदालत के इस फैसले से घोष को फिलहाल राहत मिली है।
मामला वर्ष 2021 से जुड़ा हुआ है, जिसमें आइशी घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही थी। मामले में अदालत ने उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया था। हालांकि, उनके वकील की ओर से अनुपस्थिति के कारणों को सामने रखने के बाद अदालत ने मामले पर विचार किया।
कानूनी प्रक्रिया के तहत जब कोई आरोपी अदालत में निर्धारित तारीख पर पेश नहीं होता है, तो अदालत उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वारंट जारी कर सकती है। ऐसे मामलों में आरोपी के अदालत में पेश होने और उचित कारण बताने के बाद अदालत वारंट रद्द करने पर फैसला ले सकती है।
आइशी घोष छात्र राजनीति में सक्रिय चेहरा रही हैं और SFI में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वह इससे पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। छात्र आंदोलनों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण वह लगातार चर्चा में रही हैं।
NBW रद्द होने के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई अदालत के तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी। अदालत के विस्तृत आदेश में यह स्पष्ट होगा कि वारंट रद्द करने के पीछे किन परिस्थितियों और कानूनी आधारों को ध्यान में रखा गया।
घोष के वकील ने अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा था कि उनकी अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी और इसके पीछे मजबूरी वाली परिस्थितियां थीं। अदालत ने इन दलीलों को सुनने के बाद पहले वारंट पर रोक लगाई और फिर उनकी पेशी के बाद उसे रद्द कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद SFI समर्थकों ने राहत जताई है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वारंट रद्द होने का मतलब यह है कि फिलहाल अदालत ने आरोपी की उपस्थिति और परिस्थितियों को देखते हुए राहत दी है, लेकिन मामले की मूल सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
अब सभी की नजरें अदालत के विस्तृत आदेश पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।





