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DMK से नाराज हुए ओ. पन्नीरसेल्वम, बेटे संग TVK में होंगे शामिल!
Shantanu Roy
30 July 2026 1:27 PM IST

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Tamil Nadu. तमिलनाडु। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने की चर्चा तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधायक ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) के सत्तारूढ़ डीएमके से नाराज होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी में अपेक्षित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलने से ओपीएस असंतुष्ट हैं। यही वजह है कि अब उनके अपने बेटे ओपी रवींद्रनाथ के साथ डीएमके छोड़ने और अभिनेता थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले ओ. पन्नीरसेल्वम अपने समर्थकों के साथ डीएमके में शामिल हुए थे। उस समय यह माना जा रहा था कि उनका अनुभव और थेनी क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ पार्टी के लिए लाभदायक साबित होगी। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद से अब तक उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं, उनके बेटे ओपी रवींद्रनाथ को भी पार्टी में कोई महत्वपूर्ण पद नहीं मिला, जिससे दोनों की नाराजगी लगातार बढ़ती गई।
सूत्रों के अनुसार, ओ. पन्नीरसेल्वम की सबसे बड़ी इच्छा थी कि उन्हें थेनी लोकसभा क्षेत्र में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जाए। उन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में थेनी क्षेत्र से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत भी साबित की थी। लेकिन डीएमके नेतृत्व ने इस क्षेत्र की जिम्मेदारी पार्टी के मौजूदा सांसद थंगा तमिल सेल्वन के पास ही बनाए रखी। बताया जा रहा है कि सेल्वन के प्रभाव और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कोई बदलाव नहीं किया। इसी फैसले से ओपीएस काफी नाराज बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ओ. पन्नीरसेल्वम वास्तव में डीएमके छोड़ते हैं तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। वहीं, टीवीके के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त साबित होगी। थलापति विजय की पार्टी लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रही है और विभिन्न दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने में सफल होती दिखाई दे रही है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति का समीकरण भी काफी बदल चुका है। इस चुनाव में थलापति विजय की पार्टी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद डीएमके 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली AIADMK 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गई।
AIADMK की स्थिति लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है। चुनाव के बाद पार्टी के चार पूर्व मंत्रियों और कई विधायकों ने पार्टी छोड़कर टीवीके का दामन थाम लिया। इसके अलावा विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान AIADMK के लगभग 25 विधायकों ने पार्टी व्हिप की अनदेखी करते हुए टीवीके के पक्ष में मतदान किया था। वहीं तीन अन्य विधायकों ने इस्तीफा देकर भी टीवीके की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया कि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी से बदल रहा है और विजय की पार्टी विपक्षी नेताओं के लिए नया राजनीतिक विकल्प बनती जा रही है।
विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणामों में टीवीके को 108 सीटें मिलीं, जबकि डीएमके ने 59 सीटों पर जीत हासिल की। AIADMK को 47 सीटें मिलीं। कांग्रेस के खाते में 5 सीटें आईं, पीएमके को 4 सीटें मिलीं, जबकि आईयूएमएल, सीपीआई, वीसीके और सीपीआई(एम) को दो-दो सीटें प्राप्त हुईं। इसके अलावा बीजेपी, डीएमडीके और एएमएमके-एमएनकेजेड गठबंधन को एक-एक सीट मिली। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि ओ. पन्नीरसेल्वम आगे क्या फैसला लेते हैं। यदि वे अपने बेटे के साथ टीवीके में शामिल होते हैं तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव माना जाएगा और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
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