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लाल किला Dyslexia Awareness Campaign के लिए रोशनी में नहा

SHIDDHANT
26 Oct 2025 9:53 PM IST
लाल किला Dyslexia Awareness Campaign के लिए रोशनी में नहा
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Delhi दिल्ली: राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किला Dyslexia Awareness Campaign के तहत लाल रंग की रोशनी से जगमगाया। इस पहल का उद्देश्य समाज में डिस्लेक्सिया (Dyslexia) के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके लक्षण, पहचान और सहयोग के तरीकों से अवगत कराना है। इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि डिस्लेक्सिया एक न्यूरोलॉजिकल अवस्था है, जिसमें व्यक्ति को पढ़ने, लिखने और शब्दों को समझने में कठिनाई होती है। यह अभियान बच्चों और युवाओं में इस समस्या को पहचानने और उनके लिए उचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए आयोजित किया गया है। लाल किला की लाल रोशनी ने पूरे शहर में एक संदेश पहुँचाया कि डिस्लेक्सिया के प्रति समाज में जागरूकता और समझ जरूरी है। आयोजकों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक और प्रतीकात्मक पहल लोगों को सोचने और इस समस्या के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करती है।
इस अवसर पर कई विशेषज्ञ, शिक्षक और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर भी उपस्थित रहे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि डिस्लेक्सिया को समय रहते पहचानना और उचित शिक्षा व सहायक संसाधनों की व्यवस्था करना बच्चों और युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी है। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से अपील की कि वे इस विषय में जागरूक रहें और बच्चों के पढ़ाई के अनुभव पर ध्यान दें। लाल किले को विशेष रूप से लाल रोशनी से सजाने के पीछे यह संदेश भी छिपा है कि सामाजिक जागरूकता और समर्थन से डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोग अपने जीवन में समान अवसर और सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह की पहल लोगों को सामाजिक समावेशन और समझ की दिशा में प्रेरित करती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और NGOs ने इस अवसर पर कहा कि इस तरह के अभियान बच्चों और परिवारों के लिए उम्मीद की किरण हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस विषय पर जानकारी लें और समाज में सहयोग और समझ का माहौल बनाएं। डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लाल किले की रोशनी ने प्रतीकात्मक रूप से संदेश फैलाया। शहरवासियों ने इस रोशनी को देखकर सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की और अभियान के समर्थन में पोस्ट किए। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों, शैक्षिक संस्थानों और समुदायिक केंद्रों में भी वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों और अभिभावकों को मार्गदर्शन और सहायता मिल सके।
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