छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुंगनूर नस्ल की गायों से लिया आशीर्वाद

Shantanu Roy
26 Oct 2025 9:26 PM IST
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुंगनूर नस्ल की गायों से लिया आशीर्वाद
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Raipur. रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर के शंकरनगर मंडल के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 127वें एपिसोड का प्रसारण सुना। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं के साथ पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए संदेश और विचारों पर चर्चा की और आगामी योजनाओं तथा जन जागरूकता अभियानों के प्रति दिशा-निर्देश दिए।
कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री को पुंगनूर नस्ल की गायों के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। ये गायें बछिया के सदृश्य बौने नस्ल की हैं, जिन्हें देखकर मुख्यमंत्री काफी प्रभावित हुए। उन्होंने इन गायों को हरा चारा खिलाया और उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने पशु संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गायों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गायों की प्रजातियों और नस्लों के संरक्षण से ग्रामीण समुदायों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर पशु कल्याण और कृषि विकास से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाएँ। मुख्यमंत्री ने यह भी जोर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुंगनूर जैसी विशेष नस्लों के संवर्धन से दूध उत्पादन और कृषि से जुड़ी आमदनी में सुधार होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के संदेशों को सुनकर प्रेरणा प्राप्त की और इसे अपने जनसंपर्क अभियान में शामिल करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में इस तरह के कार्यक्रमों से जनता के बीच सरकार की योजनाओं की जानकारी बढ़ेगी और जन सहभागिता सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए कहा कि प्रत्येक योजना का लाभ सीधे ग्रामीण और किसान समुदाय तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों को इस दिशा में और अधिक सक्रिय रहने का निर्देश दिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने पुंगनूर नस्ल की गायों की देखभाल और उनके संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता जताई और कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएँ। इस तरह कार्यक्रम ने न केवल प्रधानमंत्री के संदेश को साझा किया, बल्कि ग्रामीण और पशु कल्याण के महत्व को भी उजागर किया।
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