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सर्जिकल स्ट्राइक को याद कर पीएम मोदी बोले- आतंकवाद का मुकाबला निर्णायक जवाब से करेगा भारत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पहले सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ भारत ने निर्णायक जवाब देकर अपना संकल्प दिखाया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला मजबूत और निर्णायक जवाब के साथ किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 2016 में नियंत्रण रेखा यानी LoC के पार आतंकी लॉन्च पैड पर भारतीय सेना की कार्रवाई को याद किया। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले देश ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के कारण लंबे समय से चले आ रहे दर्द का निर्णायक जवाब दिया था। उनके मुताबिक इस कार्रवाई ने भारत के संकल्प को प्रदर्शित किया।
सर्जिकल स्ट्राइक सितंबर 2016 में भारतीय सेना द्वारा नियंत्रण रेखा के पार आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी इस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति के संदर्भ में रख चुके हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड में भी सर्जिकल स्ट्राइक को सीमा पार आतंकी लॉन्च पैड को निशाना बनाने वाली कार्रवाई के तौर पर वर्णित किया गया है।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला मजबूत और निर्णायक जवाब से किया जाएगा। उनके संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े विषय प्रमुख रहे।
सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने 2016 की उस कार्रवाई को भारत के संकल्प से जोड़ा, जब नियंत्रण रेखा के पार मौजूद आतंकी लॉन्च पैड को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ देश ने अपना रुख स्पष्ट किया था।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आतंकवाद के खिलाफ भारत की सुरक्षा नीति में सैन्य कार्रवाई के विभिन्न उदाहरणों का उल्लेख किया जाता रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले मौकों पर भी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के जवाब को रेखांकित किया है।
‘मन की बात’ के दौरान प्रधानमंत्री ने केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि देश में चल रही जनगणना का भी उल्लेख किया। उन्होंने जनगणना को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया और कहा कि इसमें हर नागरिक की भूमिका है।
भारत में जनगणना 2027 की प्रक्रिया दो चरणों में आयोजित की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी। केंद्र सरकार के अनुसार पहले चरण की प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सुविधा के अनुसार कराई जा रही है।
जनगणना की दूसरी चरण की प्रक्रिया फरवरी 2027 में निर्धारित है। हालांकि जम्मू-कश्मीर के बर्फीले और असमकालिक क्षेत्रों के साथ लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में यह चरण सितंबर 2026 में कराया जा रहा है।
केंद्र सरकार के अनुसार जनगणना 2027 में आधुनिक डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन और निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैनात किए गए हैं। पहली बार लोगों को स्वयं-गणना यानी Self-Enumeration की सुविधा भी दी गई है।
जनगणना को राष्ट्रीय महत्व का बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास माना जाता है। सरकार के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारी शामिल होंगे। जनगणना से मिलने वाला आंकड़ा भविष्य की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में उपयोग किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से जनगणना की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने की अपील करते हुए इसे राष्ट्रीय जिम्मेदारी से जोड़ा। जनगणना के दौरान परिवारों और व्यक्तियों से जुड़ी विभिन्न जानकारियां एकत्र की जाती हैं। इससे देश की जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से संबंधित आंकड़े तैयार होते हैं।
जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास और प्रजनन से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी। केंद्र सरकार के अनुसार इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी।
प्रधानमंत्री के रविवार के संबोधन में सर्जिकल स्ट्राइक और जनगणना जैसे अलग-अलग विषयों का उल्लेख हुआ। एक ओर उन्होंने 2016 की सैन्य कार्रवाई को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प की बात कही, वहीं दूसरी ओर जनगणना में नागरिकों की भागीदारी को राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में सामने रखा।
सर्जिकल स्ट्राइक का संदर्भ देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जवाब देने का अपना संकल्प दिखाया था। यह कार्रवाई 2016 में नियंत्रण रेखा के पार आतंकी लॉन्च पैड पर की गई थी। बाद के वर्षों में प्रधानमंत्री ने इसे भारत की आतंकवाद विरोधी नीति के महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल किया।
आतंकवाद के खिलाफ भारत के सैन्य अभियानों का उल्लेख प्रधानमंत्री के विभिन्न संबोधनों में होता रहा है। 2025 में लोकसभा में दिए गए एक संबोधन में भी उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के जवाब की चर्चा की थी।
रविवार के ‘मन की बात’ संबोधन में प्रधानमंत्री ने 2016 की घटना को करीब एक दशक बाद फिर याद किया। उन्होंने इसे देश के संकल्प और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के संदर्भ में रखा। साथ ही उन्होंने जनगणना में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
इस तरह प्रधानमंत्री के संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी दोनों विषय सामने आए। सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत जवाब देने की बात कही, जबकि जनगणना के संदर्भ में नागरिकों से इस राष्ट्रीय प्रक्रिया में सहयोग की अपेक्षा जताई।
जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया सितंबर 2026 में कई क्षेत्रों में जारी है और देश के अन्य हिस्सों में इसके चरण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेंगे। सरकार की योजना के अनुसार जनसंख्या गणना का व्यापक चरण फरवरी 2027 में होगा।
प्रधानमंत्री का रविवार का संदेश ऐसे समय में आया है जब 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को दस वर्ष पूरे होने की अवधि करीब है। उन्होंने इस कार्रवाई को याद करते हुए कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना संकल्प दिखाया था और आतंकवाद का मुकाबला मजबूत तथा निर्णायक जवाब के साथ किया जाएगा।





