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Starlink विवाद में राहुल गांधी की एंट्री सरकार ने आरोप खारिज किए

Ratna Netam
8 Oct 2026 9:14 PM IST
Starlink विवाद में राहुल गांधी की एंट्री सरकार ने आरोप खारिज किए
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नई दिल्ली। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को लेकर नया विवाद सामने आया है। स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने भारत में कंपनी की व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सभी भारतीय कानूनों और आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करने के बावजूद कंपनी को अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस विवाद में गुरुवार, 8 अक्टूबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मस्क की टिप्पणियों का जवाब दिया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कंपनी के साथ भेदभाव किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियम निष्पक्ष और सभी कंपनियों के लिए समान हैं।
एलन मस्क ने X पर कई पोस्ट के माध्यम से भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू नहीं हो पाने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कंपनी पिछले करीब पांच वर्षों से भारत की नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए काम कर रही है। इसके बावजूद व्यावसायिक सेवाओं की शुरुआत नहीं हो पाई है। मस्क ने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी के भारत में प्रवेश को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि दूरसंचार क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रख सकें।
मस्क के इन आरोपों के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मस्क को भारत में स्वागत करते हुए लिखा, "Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy." यानी भारत में आपका स्वागत है एलन, अभी दूसरे व्यक्ति के बारे में जानना बाकी है।राहुल गांधी की इस टिप्पणी को भारत के बड़े उद्योगपतियों और राजनीतिक संबंधों पर उनके पहले से दिए जाते रहे बयानों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपनी इस पोस्ट में किसी उद्योगपति का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया।दरअसल, स्टारलिंक लंबे समय से भारतीय बाजार में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का उद्देश्य उपग्रहों के माध्यम से उन क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाना है, जहां पारंपरिक फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावरों के जरिए कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना कठिन होता है।
एलन मस्क ने दावा किया कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक के प्रवेश में बाधाएं पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे देश के उन नागरिकों को नुकसान हो रहा है, जिन्हें बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने अपने शुरुआती आरोपों में किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ विशिष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए।इस विवाद पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लागू नियामकीय ढांचा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि किसी कंपनी के साथ पक्षपात या भेदभाव किए जाने के आरोप निराधार हैं।
सरकार के अनुसार, देश में तीन सैटेलाइट संचार कंपनियों को आवश्यक दूरसंचार लाइसेंस दिए जा चुके हैं। इनमें एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समूह से जुड़ी वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस शामिल हैं। तीनों कंपनियां लगभग समान नियामकीय चरण में हैं और उनकी सुरक्षा संबंधी जांच चल रही है।संचार मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं का पालन करना सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य है। इन आवश्यकताओं की जांच पूरी होने के बाद ही कंपनियां स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगी। सरकार का कहना है कि किसी एक कंपनी को अन्य कंपनियों की तुलना में विशेष अनुमति देना स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं होगा।
स्टारलिंक को भारत में पहले ही कुछ महत्वपूर्ण नियामकीय मंजूरियां मिल चुकी हैं। कंपनी को दूरसंचार विभाग से ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट यानी GMPCS लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) से भी आवश्यक प्राधिकरण मिला है।हालांकि, इन शुरुआती अनुमतियों का अर्थ तत्काल व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी नहीं है। कंपनी को सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं और आवश्यक स्पेक्ट्रम प्राप्त करना है। इसी वजह से स्टारलिंक अभी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए नियमित व्यावसायिक इंटरनेट सेवाएं शुरू नहीं कर पाई है।
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि उपग्रह संचार सेवाओं से संबंधित सुरक्षा मामलों की जांच गृह मंत्रालय के स्तर पर जारी है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग द्वारा कंपनियों को लाइसेंस और अस्थायी स्पेक्ट्रम संबंधी अनुमतियां दी गई हैं, लेकिन अंतिम व्यावसायिक संचालन के लिए सभी शर्तें पूरी होना आवश्यक है।भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का विस्तार दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, दूरदराज गांवों और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों में उपग्रह आधारित इंटरनेट एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।
पारंपरिक इंटरनेट नेटवर्क के लिए जमीन पर फाइबर केबल, मोबाइल टावर और अन्य बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। वहीं, सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं में पृथ्वी की कक्षा में मौजूद उपग्रहों के माध्यम से डेटा संचार उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, इन सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता और लागत तकनीकी व्यवस्था, उपकरणों तथा परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करती है।भारत के दूरसंचार बाजार में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है। दोनों कंपनियां सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वर्ष 2025 में इन कंपनियों ने स्टारलिंक उपकरणों की बिक्री और वितरण से संबंधित समझौतों की घोषणा की थी।
इसके बावजूद सैटेलाइट स्पेक्ट्रम और नई सेवाओं के नियामकीय ढांचे को लेकर अलग-अलग कारोबारी हितों के बीच मतभेद रहे हैं। स्टारलिंक और भारतीय दूरसंचार कंपनियों के बीच बाजार में प्रतिस्पर्धा की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।एलन मस्क के आरोपों के बाद यह मुद्दा केवल दूरसंचार क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया से इसमें राजनीतिक पहलू भी जुड़ गया है। कांग्रेस नेता की टिप्पणी को भारतीय उद्योग जगत में बड़े कारोबारी समूहों के प्रभाव को लेकर उठाए जाने वाले राजनीतिक सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सैटेलाइट कंपनियों को मंजूरी देने की प्रक्रिया नियमों और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर संचालित हो रही है। मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि किसी कारोबारी समूह के दबाव में स्टारलिंक की सेवाओं को रोका जा रहा है।फिलहाल स्टारलिंक के भारत में व्यावसायिक संचालन की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। कंपनी के सामने सुरक्षा जांच पूरी करने और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया से गुजरने जैसी आवश्यकताएं बाकी हैं।
गुरुवार को एलन मस्क और राहुल गांधी की टिप्पणियों ने स्टारलिंक की भारत में लॉन्चिंग से जुड़े विवाद को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर मस्क कंपनी के व्यावसायिक संचालन में देरी को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार अपने नियामकीय ढांचे को निष्पक्ष बता रही है।अब इस मामले में आगे का घटनाक्रम सुरक्षा संबंधी मंजूरियों, स्पेक्ट्रम आवंटन और नियामकीय प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्टारलिंक भारत में अपनी व्यावसायिक इंटरनेट सेवाएं कब शुरू कर पाएगी।
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