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संसद के सेंट्रल हॉल में राहुल गांधी ने विपक्ष को किया एकजुट
Ratna Netam
9 Oct 2026 9:19 PM IST

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नई दिल्ली। संसद के सेंट्रल हॉल में शुक्रवार को विपक्षी सांसदों की बैठक के दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के वर्ष 1947 के ऐतिहासिक भाषण की याद दिलाई गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस अवसर पर विपक्षी सांसदों को एकजुट करते हुए भारतीय लोकतंत्र के बुनियादी मूल्यों और संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को चर्चा के केंद्र में रखा। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।विपक्षी गठबंधन INDIA ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। गठबंधन के नेताओं ने आयोग पर संस्थागत पक्षपात और राजनीतिक भेदभाव के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस विवाद के बीच संसद के सेंट्रल हॉल में हुई बैठक को विपक्ष की साझा रणनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
नेहरू के 1947 के ऐतिहासिक भाषण की याद
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा में ऐतिहासिक भाषण दिया था। यह भाषण 'नियति से साक्षात्कार' यानी 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' के नाम से प्रसिद्ध है।इस भाषण में स्वतंत्र भारत के निर्माण, जनता की सेवा और देश के भविष्य के प्रति जिम्मेदारी जैसे विचारों को प्रमुखता दी गई थी।शुक्रवार को संसद के सेंट्रल हॉल में विपक्षी सांसदों की बैठक के दौरान इसी ऐतिहासिक भाषण की याद दिलाई गई।बैठक के संदर्भ में लोकतंत्र के बुनियादी वादों और संस्थाओं की भूमिका को प्रमुखता दी गई।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में राहुल गांधी द्वारा भाषण की किन पंक्तियों का उल्लेख किया गया या उन्होंने सांसदों से क्या शब्दशः कहा, इसका विस्तृत विवरण नहीं है।
राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों को किया एकजुट
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सेंट्रल हॉल में विपक्षी सांसदों को एक मंच पर लाने की पहल की।यह बैठक चुनाव आयोग और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच हुई।INDIA गठबंधन में शामिल दल चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है।बैठक के दौरान ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।हालांकि, बैठक में किसी नए प्रस्ताव को पारित किए जाने या किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा होने की पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं की गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद
विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहा है।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है।विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े फैसलों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।इसी मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया और राहुल गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया था।
राहुल गांधी ने सरकार पर भी साधा निशाना
शुक्रवार की बैठक में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के विवाद को केंद्र सरकार से भी जोड़ा।समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा कि मामला केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ी समस्या मौजूद है।राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि विपक्ष पिछले कुछ दिनों की तरह दबाव बनाए रखता है, तो मौजूदा सरकार गिर सकती है।यह राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है, न कि सरकार के भविष्य को लेकर कोई स्थापित निष्कर्ष।
SIR प्रक्रिया पर क्यों उठ रहे सवाल?
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है।इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और आवश्यक संशोधन करना है। हालांकि, प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और दस्तावेजों की जांच को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है।विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को आवश्यक प्रक्रिया बताया है और पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।इस विवाद के बीच मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और आपत्तियों के निस्तारण जैसे विषय राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
विपक्ष का संयुक्त अभियान तेज
INDIA गठबंधन के सांसद पिछले कई दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।मंगलवार को चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च के बाद गुरुवार को विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर भी विरोध दर्ज कराया।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई विपक्षी नेता इस अभियान में शामिल हुए हैं। गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।शुक्रवार को सेंट्रल हॉल में हुई बैठक इसी अभियान की अगली कड़ी के रूप में सामने आई।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर
भारत में चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। वहीं, किसी भी संवैधानिक संस्था के खिलाफ लगाए गए आरोपों का मूल्यांकन प्रमाणों और लागू कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर होना चाहिए।राहुल गांधी द्वारा नेहरू के ऐतिहासिक भाषण को याद किए जाने से बैठक में स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों का संदर्भ भी जुड़ा।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बीच हुई बैठक
शुक्रवार को विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात की और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।राष्ट्रपति से मुलाकात विपक्ष के जारी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया।संसद के सेंट्रल हॉल में राहुल गांधी द्वारा विपक्षी सांसदों को संबोधित करना और नेहरू के 1947 के भाषण को याद करना ऐसे समय हुआ है, जब चुनाव आयोग और SIR को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है।** INDIA गठबंधन चुनावी पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है, जबकि चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप राजनीतिक और संस्थागत विवाद का विषय बने हुए हैं।
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