- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- तंजानिया में 153वीं...
दिल्ली-एनसीआर
तंजानिया में 153वीं IPU असेंबली में भारत की भागीदारी
Ratna Netam
9 Oct 2026 8:50 PM IST

x
नई दिल्ली। तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं अंतर-संसदीय संघ (IPU) असेंबली में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी चौथे दिन भी जारी रही। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं, संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा से निपटने की क्षमता और सुशासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आयोजित चर्चाओं में हिस्सा लिया। इस दौरान हिमालयी क्षेत्र सहित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील इलाकों में लचीलापन मजबूत करने के लिए तत्काल संसदीय कार्रवाई की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया।भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने असेंबली में आयोजित उस चर्चा में भी भाग लिया, जिसका विषय समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के माध्यम से सुशासन को बेहतर बनाना तथा समुदायों को सशक्त करना था। इस विषय के अंतर्गत लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, नागरिकों की भागीदारी और शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं आईपीयू असेंबली में भाग ले रहे हैं।असेंबली के चौथे दिन भारतीय प्रतिनिधियों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आयोजित चर्चाओं में अपनी भागीदारी जारी रखी।इस आयोजन में अलग-अलग देशों की संसदों के प्रतिनिधि वैश्विक चुनौतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श करते हैं।भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी संसदीय संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रक्रिया का हिस्सा है।
जलवायु आपदाओं पर तत्काल संसदीय कार्रवाई का मुद्दा
असेंबली में जलवायु-संबंधी आपदाओं से निपटने और हिमालयी क्षेत्र सहित अन्य संवेदनशील इलाकों में लचीलापन मजबूत करने के लिए तत्काल संसदीय कार्रवाई के विषय पर चर्चा हुई।यह विषय नेपाल की ओर से प्रस्तावित किया गया था। आईपीयू की 153वीं असेंबली के तीसरे दिन इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया था।चौथे दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय पर आयोजित विचार-विमर्श में हिस्सा लिया।जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए संसदीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। संसदें कानून बनाने, नीतियों की समीक्षा करने और सरकारों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में भूमिका निभाती हैं।ऐसे में जलवायु आपदाओं से संबंधित विषय पर संसदीय चर्चा का उद्देश्य विभिन्न देशों के अनुभवों और नीतिगत दृष्टिकोणों को सामने लाना है।
हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता पर चर्चा
नेपाल की ओर से प्रस्तावित विषय में हिमालयी क्षेत्र का विशेष उल्लेख किया गया है।हिमालयी क्षेत्र अपनी भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है।इस क्षेत्र में भारी वर्षा, भूस्खलन, हिमनद झीलों से अचानक बाढ़ और अन्य प्राकृतिक जोखिमों से संबंधित चुनौतियां सामने आती हैं।इन परिस्थितियों में आपदा पूर्व तैयारी, समय पर चेतावनी, सुरक्षित बुनियादी ढांचे और प्रभावित समुदायों की सहायता जैसे उपाय महत्वपूर्ण होते हैं।आईपीयू असेंबली में इस विषय को उठाए जाने से पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय स्तर पर विचार-विमर्श का अवसर मिला है।हालांकि, उपलब्ध विवरण में भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा इस चर्चा में दिए गए किसी विशेष प्रस्ताव या भाषण का पूरा पाठ उपलब्ध नहीं है।
संवेदनशील क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने पर जोर
जलवायु आपदाओं से निपटने के संदर्भ में लचीलापन यानी ऐसी क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण है, जिससे समुदाय और संस्थाएं प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम कर सकें और उनके बाद सामान्य गतिविधियों को फिर शुरू कर सकें।इसके लिए आपदा प्रबंधन की तैयारी, सार्वजनिक सेवाओं की निरंतरता और जोखिम वाले क्षेत्रों में उपयुक्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।संसदीय संस्थाएं इन विषयों पर नीतिगत चर्चा, बजटीय निगरानी और कानूनों की समीक्षा के माध्यम से योगदान दे सकती हैं।असेंबली में हिमालयी क्षेत्र के साथ अन्य संवेदनशील इलाकों को भी चर्चा के दायरे में रखा गया है।इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रस्ताव केवल किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु जोखिमों का सामना करने वाले विभिन्न समुदायों से संबंधित है।
सुशासन और समावेशिता पर भी हुई चर्चा
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आईपीयू असेंबली की आम चर्चा में भी भाग लिया।इस चर्चा का विषय था, "समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के माध्यम से सुशासन को बेहतर बनाना और समुदायों को सशक्त बनाना।"इस विषय में शासन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, सहभागी और समावेशी बनाने पर ध्यान दिया गया है।सुशासन की अवधारणा में पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिक भागीदारी और सार्वजनिक संस्थाओं में विश्वास जैसे तत्व शामिल होते हैं।समावेशिता का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि समाज के विभिन्न वर्गों को सार्वजनिक निर्णयों और अवसरों में उचित भागीदारी मिल सके।इस प्रकार की चर्चा में विभिन्न देशों की संसदीय व्यवस्थाओं और उनके अनुभवों को समझने का अवसर मिलता है।
समुदायों को सशक्त बनाने में संसदों की भूमिका
आईपीयू असेंबली की आम चर्चा में समुदायों को सशक्त बनाने का विषय भी शामिल है।किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण संस्थागत माध्यम होती है।संसद के सदस्य नागरिकों की समस्याओं को उठाने, कानूनों पर विचार करने और सरकारी नीतियों की समीक्षा करने में भूमिका निभाते हैं।समुदायों को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा, सूचना तक पहुंच, सार्वजनिक सेवाओं और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंच पर इन विषयों पर चर्चा से देशों को अपने अनुभव साझा करने और विभिन्न नीतिगत उपायों को समझने का अवसर मिलता है।
क्या है अंतर-संसदीय संघ?
अंतर-संसदीय संघ यानी इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (IPU) राष्ट्रीय संसदों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन है।इसकी स्थापना वर्ष 1889 में हुई थी। संगठन का उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना, विभिन्न देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाना और वैश्विक मुद्दों पर संवाद को प्रोत्साहित करना है।आईपीयू की असेंबली में सदस्य देशों के सांसद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विषयों पर चर्चा करते हैं।इनमें लोकतंत्र, शांति, मानवाधिकार, विकास, पर्यावरण और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
वैश्विक संसदीय संवाद में भारत की भागीदारी
भारत का संसदीय प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय मंच पर विभिन्न विषयों पर आयोजित चर्चाओं में भाग ले रहा है।राज्यसभा उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति भारत की संसदीय सहभागिता का हिस्सा है।जलवायु आपदाओं और सुशासन जैसे मुद्दे विभिन्न देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा से संसदीय संस्थाओं के बीच संवाद को बढ़ावा मिलता है।तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं आईपीयू असेंबली के चौथे दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जलवायु आपदाओं से निपटने, हिमालयी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में लचीलापन मजबूत करने तथा समावेशी सुशासन पर आयोजित चर्चाओं में हिस्सा लिया।** राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय संसदीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण गतिविधि रही।
Next Story





