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राजघाट पहुंचे राहुल गांधी खड़गे और प्रियंका ने दी श्रद्धांजलि

Ratna Netam
8 Oct 2026 7:30 PM IST
राजघाट पहुंचे राहुल गांधी खड़गे और प्रियंका ने दी श्रद्धांजलि
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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार, 8 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां हुई हैं, जिनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने लगातार तीसरे दिन अपना विरोध जारी रखते हुए राजघाट जाने का कार्यक्रम बनाया। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एक रेस्तरां में INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं के लिए दोपहर के भोजन का आयोजन किया। बैठक में कांग्रेस के साथ कई सहयोगी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। इसके बाद सांसद बसों में सवार होकर महात्मा गांधी के स्मारक की ओर रवाना हुए।इस बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना उद्धव गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट और वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजघाट जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्षी सांसद शांतिपूर्ण तरीके से महात्मा गांधी के स्मारक पर धरना देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे वहां प्रार्थना करेंगे कि केंद्र सरकार को अपने निर्णयों और नीतियों के बारे में विचार करने की समझ मिले। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कई सरकारी नीतियों की आलोचना की।खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े विवाद, बढ़ती महंगाई और युवाओं की समस्याओं जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार का रवैया जनहित के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रख रहा है और इसके लिए शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता अपनाया गया है।
कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने भी विपक्ष के इस कदम के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। राजघाट जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम महात्मा गांधी के अहिंसा और शांतिपूर्ण विरोध के सिद्धांतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसद मंगलवार, 6 अक्टूबर से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। पहले दिन कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसदों ने चुनाव आयोग तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया।
मंगलवार को प्रदर्शनकारी संसद मार्ग और आकाशवाणी भवन के आसपास एकत्र हुए थे। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की मांग की और कई घंटे तक धरना दिया। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया था।इसके अगले दिन बुधवार, 7 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की ओर से आयोजित दोपहर के भोजन के बाद नेता जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं ने सड़क पर बैठकर विरोध दर्ज कराया।
बुधवार के प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच गतिरोध देखने को मिला। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई सांसदों को हिरासत में लिया गया। विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है।गुरुवार को राजघाट पर कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला इसी आंदोलन की अगली कड़ी था। विपक्षी नेताओं का कहना है कि महात्मा गांधी के स्मारक पर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर वे लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ी अपनी मांगों को सामने रखना चाहते हैं।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने राजघाट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। राजधानी में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की। प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों को लेकर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच मतभेद भी बने रहे।मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी इस आंदोलन के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अन्य कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में राजनीतिक पक्षपात तथा गड़बड़ी के आरोपों का खंडन किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और अपात्र तथा दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान करना है।विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाए। उनके अनुसार, चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा है कि विपक्ष इस मुद्दे को उठाना जारी रखेगा। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने भी स्पष्ट किया है कि गठबंधन अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा।गुरुवार को राजघाट पहुंचे विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर अपने विरोध को अहिंसा और शांतिपूर्ण आंदोलन के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में बनाए रखने का संकेत दिया।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं भाजपा और चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं।लगातार तीन दिनों तक दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद राजघाट पर आयोजित कार्यक्रम ने विपक्ष के आंदोलन को एक और मंच दिया है। विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी मांगों को आगे भी उठाते रहेंगे। वहीं, इस विवाद का आगे का घटनाक्रम चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया, कानूनी प्रक्रियाओं और राजनीतिक दलों के आगामी कदमों पर निर्भर करेगा।
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