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94वें वायुसेना दिवस पर टीम शक्ति का शानदार प्रदर्शन

Ratna Netam
8 Oct 2026 7:16 PM IST
94वें वायुसेना दिवस पर टीम शक्ति का शानदार प्रदर्शन
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नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। कभी सैन्य नर्सिंग और सहायक सेवाओं तक सीमित रहने वाली महिलाओं की भूमिका अब लड़ाकू विमानों के संचालन, सैन्य नेतृत्व, तकनीकी सेवाओं और महत्वपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियों तक पहुंच चुकी है। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार, 8 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर महिला वायु योद्धाओं की बढ़ती भूमिका का विशेष प्रदर्शन किया गया। समारोह में पूरी तरह महिलाओं से बनी 'टीम शक्ति' ने अनुशासन, साहस और बेहतरीन तालमेल के साथ अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। अपने 94 वर्षों के इतिहास में वायुसेना ने तकनीकी विकास और परिचालन क्षमताओं के साथ मानव संसाधन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं। इनमें महिला अधिकारियों और महिला अग्निवीरों की बढ़ती भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वर्तमान में महिलाएं वायुसेना की उड़ान, प्रशासनिक, तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण शाखाओं में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित स्थापना दिवस समारोह में महिला सशक्तीकरण की झलक विशेष रूप से दिखाई दी। महिला वायु योद्धाओं की विशेष ड्रिल टीम 'टीम शक्ति' ने हथियारों के साथ समन्वित गतिविधियों का प्रदर्शन किया। इस टीम में 28 महिला वायु योद्धाओं की भागीदारी की जानकारी सामने आई है। टीम ने सटीक तालमेल, अनुशासन और सामूहिक अभ्यास के माध्यम से अपनी सैन्य प्रशिक्षण क्षमता का प्रदर्शन किया।
टीम शक्ति भारतीय वायुसेना की पूरी तरह महिला सदस्यों वाली विशेष ड्रिल टीम है। इसकी प्रस्तुतियों में अनुशासन, शारीरिक क्षमता और हथियारों के सुरक्षित संचालन से जुड़ी दक्षता दिखाई जाती है। इस वर्ष स्थापना दिवस समारोह से पहले आयोजित फुल ड्रेस रिहर्सल में भी महिला वायु योद्धाओं ने अपने प्रदर्शन से ध्यान आकर्षित किया था।
महिला अधिकारियों की भूमिका केवल परेड और औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। भारतीय वायुसेना में महिलाएं अब निर्णय लेने वाले पदों, लड़ाकू विमान संचालन, प्रशिक्षण और विभिन्न ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में काम कर रही हैं। प्रशासन, अकाउंट्स, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभागों में भी महिला अग्निवीर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
भारतीय वायुसेना की सेवानिवृत्त फ्लाइट लेफ्टिनेंट वीणा नागराजन ने महिला वायु योद्धाओं की भूमिका पर कहा कि वायुसेना में लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि महिला अग्निवीर प्रशासन, लेखा, रखरखाव और आईटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। उनके अनुसार, वायुसेना ने महिलाओं को अवसर उपलब्ध कराने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है।
भारतीय सैन्य इतिहास में महिलाओं की भागीदारी की जड़ें काफी पुरानी हैं। औपनिवेशिक काल में सैन्य नर्सिंग सेवाओं के माध्यम से महिलाओं की औपचारिक भागीदारी शुरू हुई। इसके बाद स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली आजाद हिंद फौज में झांसी की रानी रेजिमेंट का गठन महिला सैन्य भागीदारी के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना बना।
स्वतंत्रता के बाद सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार धीरे-धीरे हुआ। भारतीय वायुसेना में महिलाओं को विभिन्न अधिकारी पदों पर प्रवेश मिला और समय के साथ उनकी जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ता गया। लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर महत्वपूर्ण सैन्य निर्णयों में भागीदारी तक महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
वायुसेना में महिला अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सितंबर 2026 में सामने आई, जब एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भारतीय रक्षा सेवाओं में गैर-चिकित्सा शाखा से दो सितारा रैंक प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। उन्होंने 1 सितंबर को वायु मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) का पदभार संभाला।
शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में कमीशन मिला था। अपने लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमान मुख्यालयों और वायु मुख्यालय में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी नियुक्ति को वायुसेना में महिला अधिकारियों के नेतृत्व संबंधी अवसरों के विस्तार का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी NDA के माध्यम से महिलाओं को सैन्य अधिकारी बनने का अवसर मिलना भी महत्वपूर्ण बदलाव है। जून 2026 में वायुसेना अकादमी, डुंडीगल में आयोजित संयुक्त स्नातक परेड के दौरान NDA से प्रशिक्षण प्राप्त महिला कैडेटों के पहले बैच को वायुसेना में अधिकारी के रूप में कमीशन दिया गया।
इस कार्यक्रम में कुल 231 फ्लाइट कैडेटों को कमीशन दिया गया था, जिनमें 37 महिलाएं शामिल थीं। इस उपलब्धि ने महिलाओं के लिए सैन्य प्रशिक्षण और नेतृत्व संबंधी अवसरों के विस्तार को नया आयाम दिया।
अग्निपथ योजना के माध्यम से भी महिलाओं के लिए वायुसेना में सेवा करने के नए अवसर खुले हैं। दिसंबर 2023 में कर्नाटक के बेलगावी स्थित एयरमेन ट्रेनिंग स्कूल में महिला अग्निवीरवायु के पहले बैच की पासिंग आउट परेड आयोजित हुई थी। इसमें 153 महिला अग्निवीरों ने प्रशिक्षण पूरा कर पुरुष अग्निवीरों के साथ परेड में हिस्सा लिया था।
इसके बाद महिला अग्निवीरों की भागीदारी विभिन्न सेवाओं में आगे बढ़ी। प्रशासनिक कार्यों के साथ तकनीकी और परिचालन सहायता से जुड़े क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी वायुसेना के बदलते कार्यबल को दर्शाती है।
वायुसेना की आधुनिक परिचालन व्यवस्था में केवल लड़ाकू विमानों के पायलट ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि विमान रखरखाव, संचार, लॉजिस्टिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी भी आवश्यक भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों में महिला अधिकारियों और अग्निवीरों की भागीदारी बढ़ने से उन्हें विभिन्न सैन्य विशेषज्ञताओं में कार्य करने का अवसर मिल रहा है।
94वें वायुसेना दिवस के अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी सैन्य क्षमताओं और वायु योद्धाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना की वास्तविक ताकत केवल आधुनिक हथियारों और तकनीक में नहीं, बल्कि उसके प्रशिक्षित और समर्पित वायु योद्धाओं में निहित है।
हिंडन एयरबेस पर आयोजित समारोह में वायुसेना की परिचालन तैयारियों, अनुशासन और आधुनिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान महिला वायु योद्धाओं की भागीदारी ने भारतीय सैन्य सेवाओं में बदलते अवसरों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
हालांकि, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका के विस्तार के साथ प्रशिक्षण, करियर प्रगति और विभिन्न पदों पर समान अवसर सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। सैन्य सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी का आकलन केवल उनकी संख्या से नहीं, बल्कि उन्हें मिलने वाली जिम्मेदारियों और नेतृत्व के अवसरों से भी किया जाता है।
भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर 'टीम शक्ति' का प्रदर्शन और महिला अग्निवीरों की विभिन्न विभागों में सक्रिय भूमिका इस बदलाव का उदाहरण है। सैन्य नर्सिंग सेवाओं और ऐतिहासिक महिला रेजिमेंट से शुरू हुई यात्रा आज लड़ाकू विमान संचालन, उच्च अधिकारी पदों और तकनीकी सेवाओं तक पहुंच चुकी है।
महिला वायु योद्धाओं की बढ़ती भागीदारी भारतीय वायुसेना के बदलते स्वरूप और उसके मानव संसाधन में हो रहे विस्तार को दर्शाती है। स्थापना दिवस समारोह में इन उपलब्धियों को प्रमुखता देकर वायुसेना ने प्रशिक्षण, नेतृत्व और सैन्य जिम्मेदारियों में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया।
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