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CBSE विवाद पर राहुल गांधी का हमला, सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

Delhi दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में सरकार की चुप्पी गंभीर चिंता का विषय है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और COEMPT को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट को लेकर जो विवाद सामने आया है, उस पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई न होना यह दिखाता है कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों और उनके भविष्य की बजाय केवल सत्ता बचाए रखने पर केंद्रित है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वह पहले दिन से ही इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि CBSE की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह जांच बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय न हो।
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि देश के लाखों युवाओं को सच्चाई जानने का अधिकार है और परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Read this story. Carefully.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 29, 2026
CBSE called for OSM tenders thrice. Zero bids the first time. No qualified bidder the second time. And finally, the technical bar was lowered until COEMPT could clear it.
Scanning resolution cut. Robotic scanner requirement dropped. CMMI… pic.twitter.com/pnkYvVcdrJ
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और संबंधित कॉन्ट्रैक्ट को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है।
वहीं सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं।
इस पूरे विवाद ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन लोगों में जो बोर्ड परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से सीधे जुड़े हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि किसी भी तकनीकी बदलाव को लागू करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच और परीक्षण जरूरी होना चाहिए।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक गर्म होता दिख रहा है, जहां एक तरफ सरकार अपनी प्रक्रिया को सही बता रही है, वहीं विपक्ष इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है।





