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मॉक पार्लियामेंट में राहुल गांधी के तीखे तेवर, CEC को दी चेतावनी

Ratna Netam
31 Oct 2026 8:03 PM IST
मॉक पार्लियामेंट में राहुल गांधी के तीखे तेवर, CEC को दी चेतावनी
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नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने चुनाव आयोग की जवाबदेही और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए कहा, "तुम्हें बचकर नहीं जाने दूंगा।" उनके इस बयान के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता, विपक्ष के आरोपों और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।राहुल गांधी की टिप्पणी को चुनावी व्यवस्था पर कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ कानूनी या संसदीय कार्रवाई के बीच स्पष्ट अंतर है। केवल राजनीतिक बयान देने या आरोप लगाने से किसी अधिकारी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होता।
मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुआ आयोजन
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को विपक्षी INDIA गठबंधन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नई दिल्ली स्थित आवास, 10 राजाजी मार्ग पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया। विपक्ष ने इसे 'जन महाभियोग' का नाम दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और विभिन्न विपक्षी दलों के नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर आयोजित किया गया था। हालांकि, यह संसद का आधिकारिक सत्र नहीं था और इसमें पारित किसी भी प्रस्ताव को संवैधानिक महाभियोग की कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर छह आरोप लगाए
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यक्रम के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप प्रस्तुत किए। विपक्ष ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।राहुल गांधी ने भी चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग की।हालांकि, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने संबंधी आरोप विपक्ष के दावे हैं। इन आरोपों को स्वतंत्र जांच या न्यायिक निर्णय के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी ने जवाबदेही तय करने की मांग की
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को आगे भी उठाता रहेगा।राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को महत्वपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।उनकी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है।
क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया?
भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिनके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।इस प्रक्रिया में संसद की निर्धारित विशेष बहुमत संबंधी शर्तों को पूरा करना आवश्यक होता है। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई की जाती है।विपक्ष द्वारा आयोजित 'जन महाभियोग' इस संवैधानिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य विपक्ष के अनुसार, चुनाव आयोग के कामकाज पर सार्वजनिक चर्चा और राजनीतिक दबाव बनाना था।इसलिए शनिवार के कार्यक्रम से मुख्य चुनाव आयुक्त के पद या अधिकारों पर कोई प्रत्यक्ष संवैधानिक प्रभाव नहीं पड़ता।
भाजपा ने कार्यक्रम को बताया राजनीतिक नाटक
विपक्ष के इस कार्यक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे संसद की कार्यवाही का उपहास बताते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की।पात्रा ने कहा कि विपक्ष को अपने आरोप संसद में उठाने चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को प्राप्त संवैधानिक और कानूनी संरक्षण का भी बचाव किया।दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को मतदाता सूची के मुद्दे पर संसद में बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।इस तरह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
एक नवंबर की रैली से पहले विपक्ष की तैयारी
यह कार्यक्रम विपक्षी गठबंधन की प्रस्तावित एक नवंबर की रैली से ठीक पहले आयोजित किया गया। दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस अभियान के माध्यम से वे मतदाता सूची, चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाएंगे।कार्यक्रम पहले 30 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष के आरोपों और भाजपा की प्रतिक्रिया ने चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस तेज कर दी है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग का दायित्व स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। वहीं राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने और उपलब्ध कानूनी माध्यमों से शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।फिलहाल विपक्ष का 'जन महाभियोग' एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किसी औपचारिक संवैधानिक कार्रवाई का निर्णय केवल निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।आने वाले दिनों में विपक्ष की प्रस्तावित रैली और चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
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