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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने गुरशरण कौर से की मुलाकात
Ratna Netam
4 Oct 2026 4:21 PM IST

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नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह ने रविवार को दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर से उनके आवास पर मुलाकात की। पंजाब जाने से पहले हुई इस मुलाकात के दौरान परगट सिंह ने गुरशरण कौर का आशीर्वाद लिया और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के देश तथा पंजाब के लिए किए गए योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की विरासत केवल आर्थिक सुधारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि ईमानदारी, सच्चाई, मानवीय मूल्यों और मजबूत संस्थानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए परगट सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री को पंजाब का बड़ा नेता बताया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि दुनिया के सामने इंसानियत, ईमानदारी और मूल्यों की राजनीति का उदाहरण भी पेश किया।परगट सिंह ने कहा, “वे पंजाब के एक बड़े नेता थे। उन्होंने न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया, बल्कि दुनिया भर में इंसानियत, ईमानदारी और मूल्यों को भी ऊंचे स्तर तक पहुंचाया। पंजाब जाने से पहले श्रीमती मनमोहन सिंह का आशीर्वाद लेना जरूरी था।”
परगट सिंह का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब उन्हें पंजाब कांग्रेस की नई जिम्मेदारी मिली है। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पंजाब जाने से पहले उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार से मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान उन्होंने मनमोहन सिंह के सार्वजनिक जीवन और उनके नेतृत्व में विकसित संस्थागत व्यवस्था का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल और सार्वजनिक जीवन के दौरान जिन संस्थानों को मजबूत करने की कोशिश की, वे आज राजनीतिक व्यवस्था के कारण कमजोर हुए हैं। यह परगट सिंह का राजनीतिक आकलन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की मजबूती और उनकी स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का पंजाब से गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए और इससे पहले केंद्र सरकार में वित्त मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। आर्थिक नीतियों और सुधारों में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति और आर्थिक इतिहास में व्यापक रूप से चर्चा का विषय रही है।परगट सिंह ने भी उनके आर्थिक योगदान के साथ उनके व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं को प्रमुखता से याद किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की पहचान केवल एक अर्थशास्त्री या प्रधानमंत्री के रूप में नहीं थी, बल्कि सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी और ईमानदारी को भी याद किया जाता है।
गुरशरण कौर से हुई मुलाकात को परगट सिंह ने भावनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। नई जिम्मेदारी के साथ पंजाब लौटने से पहले उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार का आशीर्वाद लेकर अपनी राजनीतिक यात्रा के अगले चरण की शुरुआत का संकेत दिया।
परगट सिंह भारतीय हॉकी के जाने-माने नाम रहे हैं। खेल के मैदान से राजनीति तक का उनका सफर लंबा रहा है। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया और बाद में पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। अब पंजाब कांग्रेस की नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने पार्टी संगठन को मजबूत करने की चुनौती है।पंजाब की राजनीति में कांग्रेस लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक दलों में शामिल रही है। राज्य में संगठनात्मक स्तर पर पार्टी को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाना और आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को तैयार करना नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
परगट सिंह की गुरशरण कौर से मुलाकात को कांग्रेस की राजनीतिक विरासत से जोड़कर भी देखा जा रहा है। मनमोहन सिंह का नाम कांग्रेस के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल है, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजाब से उनके संबंधों के कारण राज्य की कांग्रेस राजनीति में भी उनकी विरासत का विशेष महत्व रहा है।मीडिया से बातचीत में परगट सिंह ने जिस तरह मनमोहन सिंह के मूल्यों और संस्थागत योगदान का उल्लेख किया, उससे उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी के शुरुआती दौर में राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत दिया। उन्होंने ईमानदारी, मानवता और संस्थानों की मजबूती जैसे मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा।
परगट सिंह ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत उसके संस्थानों से आती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत संस्थाएं शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि मौजूदा संस्थागत स्थिति को लेकर उनका बयान राजनीतिक आलोचना का हिस्सा है और इस पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने दृष्टिकोण हो सकते हैं।
पंजाब कांग्रेस की कमान संभालने के बाद परगट सिंह के सामने संगठन को एकजुट रखने और पार्टी कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाने जैसी जिम्मेदारियां होंगी। राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच कांग्रेस संगठन की रणनीति पर भी नजर रहेगी।पंजाब पहुंचने के बाद परगट सिंह पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों से मुलाकात कर सकते हैं। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके कार्यक्रमों और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में दिलचस्पी बनी हुई है।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विरासत का उल्लेख करते हुए परगट सिंह ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक नेतृत्व में व्यक्तिगत ईमानदारी और संस्थागत मूल्यों का महत्व बना रहना चाहिए। उन्होंने मनमोहन सिंह के आर्थिक योगदान के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन में अपनाए गए मूल्यों को भी याद किया।गुरशरण कौर से मुलाकात के बाद परगट सिंह ने कहा कि पंजाब जाने से पहले उनका आशीर्वाद लेना उनके लिए जरूरी था। इस मुलाकात के जरिए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके योगदान को याद किया।अब पंजाब कांग्रेस के नए नेतृत्व के रूप में परगट सिंह की आगामी रणनीति पर नजर रहेगी। संगठन में बदलाव, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और राज्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर कांग्रेस का रुख आने वाले दिनों में उनकी नई भूमिका की दिशा तय करेगा।
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