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बिहार बाढ़ पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

Ratna Netam
4 Oct 2026 4:11 PM IST
बिहार बाढ़ पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
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नई दिल्ली/पटना। बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को चिंता जताई। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित लोगों और जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भाजपा की अगुवाई वाली सरकार से सवाल किए। राहुल गांधी ने कहा कि बिहार में बाढ़ की समस्या नई नहीं है और राज्य के लोगों को हर साल राहत तथा आश्वासन देने के बजाय इसका स्थायी समाधान तलाशने की जरूरत है।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी अपने बयान में कहा कि बिहार में बाढ़ ने एक बार फिर भारी तबाही मचाईहै। उन्होंने कहा कि लाखों लोग प्रभावित हैं और सैकड़ों गांव पानी में डूबे हुए हैं। कई लोगों की मौत और लापता होने की खबरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सबसे दुखद पहलू यह है कि बिहार के लिए बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। राज्य के कई हिस्सों में लगभग हर साल बाढ़ का संकट सामने आता है। इससे जान-माल का नुकसान होता है, परिवारों को घर छोड़ना पड़ता है और लोगों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि कई लोगों को ऐसी परिस्थितियों के कारण पलायन के लिए भी मजबूर होना पड़ता है।राहुल गांधी ने भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार से सवाल किया कि पिछले 17 वर्षों में हर साल सामने आने वाली इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए और जमीन पर क्या बदलाव हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को हर वर्ष केवल राहत और आश्वासन नहीं बल्कि बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए स्थायी समाधान चाहिए।
बिहार में बाढ़ लंबे समय से एक बड़ी प्राकृतिक और मानवीय चुनौती रही है। राज्य की भौगोलिक स्थिति और नदियों का विस्तृत नेटवर्क इसे बाढ़ के प्रति संवेदनशील बनाता है। खास तौर पर गंगा के साथ कोसी, गंडक, बागमती और अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने पर कई जिलों के निचले इलाकों में पानी फैल जाता है। मौजूदा बाढ़ के दौरान भी कई नदियों के बढ़े जलस्तर को हालात बिगड़ने की वजहों में शामिल बताया गया है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में बाढ़ की समस्या को केवल तत्काल राहत तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालिक योजना से जोड़ने की कोशिश की। उनका कहना है कि जब कोई संकट लगातार हर वर्ष सामने आता है तो उससे निपटने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण और नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को होती है। पानी बढ़ने पर सड़क संपर्क टूट सकता है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा पशुधन, खेती और घरों को होने वाला नुकसान भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान चलाए गए हैं। सारण में ही करीब 3.32 लाख लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत केंद्र, सामुदायिक रसोई, नावों और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमों की मदद ली गई है।बिहार में बाढ़ का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। हर साल मानसून के दौरान बाढ़ आने पर तटबंधों की स्थिति, नदियों की सफाई, जल निकासी, राहत व्यवस्था और दीर्घकालिक बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को लेकर बहस तेज हो जाती है। विपक्ष सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाता है, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता तत्काल राहत, बचाव और प्रभावित आबादी तक जरूरी सामग्री पहुंचाने की होती है।
राहुल गांधी के ताजा बयान में भी इसी दीर्घकालिक समाधान पर जोर दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले वर्षों में किए गए प्रयासों के बाद जमीनी स्तर पर क्या बदलाव हुआ है। कांग्रेस नेता के मुताबिक बिहार के लोगों को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिससे उन्हें हर साल एक जैसी त्रासदी और विस्थापन का सामना न करना पड़े।बाढ़ का असर केवल घरों और सड़कों तक सीमित नहीं रहता। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। कई क्षेत्रों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय बाजार भी बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक पानी जमा रहने पर पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने की आशंका रहती है।
ऐसी स्थिति में राहत एवं बचाव के साथ बाढ़ प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति महत्वपूर्ण हो जाती है। इसमें तटबंधों का रखरखाव, जल निकासी व्यवस्था, समय पर चेतावनी, सुरक्षित आश्रय स्थल और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।राहुल गांधी के बयान के बाद बिहार में बाढ़ को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। उन्होंने मौजूदा हालात को आधार बनाकर सरकार से पिछले 17 वर्षों के कामकाज पर सवाल पूछा है। यह सरकार पर उनका राजनीतिक आरोप है और उन्होंने अपने बयान में स्थायी समाधान को प्राथमिकता देने की मांग की है।
फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है। वहीं राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर इस सवाल को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है कि बिहार में बार-बार आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

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