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2030 तक लाइव इवेंट्स सेक्टर दोगुना करने की तैयारी

Ratna Netam
7 Oct 2026 9:59 PM IST
2030 तक लाइव इवेंट्स सेक्टर दोगुना करने की तैयारी
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नई दिल्ली। भारत का लाइव इवेंट्स सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। सूचना और प्रसारण सचिव चंचल कुमार ने बुधवार को बताया कि पिछले साल इस क्षेत्र में करीब 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। देशभर में लगभग 34,000 लाइव इवेंट्स आयोजित हुए और यह सेक्टर अब एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।चंचल कुमार ने यह जानकारी लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल यानी LEDC की पांचवीं बैठक को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2030 तक लाइव इवेंट्स सेक्टर का आकार दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में 1.5 से 2 करोड़ प्रत्यक्ष और सहायक रोजगार पैदा करने की क्षमता मौजूद है।
उन्होंने LEDC को उद्योग, राज्यों और केंद्र सरकार के बीच सहयोग का एक प्रभावी उदाहरण बताया। उनका कहना था कि लाइव इवेंट्स सेक्टर के विस्तार के लिए नीतिगत सहयोग, बेहतर बुनियादी ढांचा, अनुमतियों की आसान प्रक्रिया और राज्यों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है।लाइव इवेंट्स सेक्टर में संगीत कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन, खेल आयोजन, कॉरपोरेट इवेंट्स, प्रदर्शनियां, सम्मेलन, फैशन शो, धार्मिक आयोजन और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम शामिल होते हैं। इन आयोजनों से केवल कलाकारों या आयोजकों को ही रोजगार नहीं मिलता, बल्कि परिवहन, होटल, पर्यटन, खाद्य सेवाएं, सुरक्षा, तकनीकी सेवाएं, स्टेज प्रोडक्शन, लाइटिंग, साउंड और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलता है।
सरकार का मानना है कि लाइव इवेंट्स सेक्टर में बढ़ती मांग भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी कॉन्सर्ट, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक आयोजनों की संख्या बढ़ रही है। इससे स्थानीय रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।चंचल कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष लगभग 34,000 कार्यक्रमों का आयोजन होना इस सेक्टर की बढ़ती ताकत को दिखाता है। 44 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत देती है कि दर्शकों की रुचि, निजी निवेश और इवेंट आधारित मनोरंजन में तेजी आई है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का लाभ उठाने के लिए संगठित तरीके से काम करने की जरूरत होगी। खासकर बड़े आयोजनों के लिए अनुमति, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और स्थल उपलब्धता जैसे मुद्दों पर एक समान और सरल व्यवस्था उद्योग की गति बढ़ा सकती है।LEDC की बैठक में केंद्र सरकार, राज्यों और उद्योग जगत के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हितधारकों को एक मंच पर लाकर समस्याओं की पहचान करना और उनका व्यावहारिक समाधान ढूंढना है।
लाइव इवेंट्स उद्योग का रोजगार पर प्रभाव भी काफी व्यापक है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में अस्थायी, प्रोजेक्ट आधारित और स्वतंत्र पेशेवर काम करते हैं। इनमें इवेंट मैनेजर, डिजाइनर, तकनीशियन, कैमरा ऑपरेटर, साउंड इंजीनियर, सुरक्षा कर्मी, कलाकार, ड्राइवर, कैटरिंग स्टाफ और अन्य सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं।सरकार के अनुमान के मुताबिक, यदि 2030 तक इस सेक्टर का आकार दोगुना होता है तो 1.5 से 2 करोड़ तक प्रत्यक्ष और सहायक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यह रोजगार सृजन खास तौर पर युवाओं और क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़े पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस सेक्टर की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसका असर कई अन्य उद्योगों पर एक साथ पड़ता है। किसी बड़े कॉन्सर्ट या खेल आयोजन के दौरान होटल बुकिंग, टैक्सी सेवाएं, रेस्तरां, स्थानीय बाजार और पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आती है। इसी कारण लाइव इवेंट्स को स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले क्षेत्रों में भी गिना जाता है।भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के विस्तार ने भी लाइव इवेंट्स की लोकप्रियता बढ़ाने में भूमिका निभाई है। बड़े कार्यक्रमों के प्रचार, टिकट बिक्री और दर्शकों तक पहुंच अब पहले की तुलना में आसान हुई है। इससे छोटे आयोजकों को भी नए बाजार तक पहुंचने का मौका मिल रहा है।
सरकार इस सेक्टर को अधिक संगठित बनाने पर भी काम कर रही है। LEDC के जरिए नीतिगत सुझावों, अनुमतियों की प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और राज्यों में बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर लगातार चर्चा की जा रही है।चंचल कुमार ने कहा कि उद्योग और सरकार के बीच बेहतर सहयोग से इस क्षेत्र की विकास गति को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि LEDC का उद्देश्य सिर्फ समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए विभिन्न एजेंसियों को साथ लाना भी है।
उन्होंने इस मंच को केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताते हुए कहा कि लाइव इवेंट्स सेक्टर के लिए एक स्पष्ट विकास रोडमैप तैयार करना जरूरी है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और आयोजकों को भी बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।इस क्षेत्र में भारत के पास बड़ी युवा आबादी, विविध सांस्कृतिक परंपराएं और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार जैसी महत्वपूर्ण ताकतें हैं। संगीत, खेल, मनोरंजन और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ने से आने वाले वर्षों में इस उद्योग के और विस्तार की संभावना है।
हालांकि बड़े पैमाने पर विकास के लिए कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। इनमें आयोजन स्थलों की कमी, अलग-अलग विभागों से अनुमति, सुरक्षा प्रबंधन और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम शामिल हैं। सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से इन चुनौतियों को कम करने की कोशिश की जा रही है।चंचल कुमार ने कहा कि 2030 तक सेक्टर को दोगुना करने का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य रोजगार, स्थानीय कारोबार और क्रिएटिव उद्योग को भी बढ़ावा देना है।कुल मिलाकर, भारत का लाइव इवेंट्स सेक्टर तेजी से उभरते उद्योगों में शामिल हो रहा है। पिछले साल 44 प्रतिशत की वृद्धि और 34,000 से अधिक आयोजनों के बाद सरकार अब 2030 तक इस क्षेत्र को दोगुना करने की दिशा में काम कर रही है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो लाइव इवेंट्स उद्योग देश में करोड़ों लोगों के लिए नए रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
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