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वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने के आरोपों पर सियासी घमासान

Ratna Netam
12 Oct 2026 8:43 PM IST
वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने के आरोपों पर सियासी घमासान
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों और विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। संजय सिंह ने अपने पत्र में दावा किया कि देश में मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए संसद में व्यापक चर्चा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों को डराने-धमकाने और हिरासत में लेने की घटनाओं पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम गलत तरीके से हटाए जाने का दावा संजय सिंह द्वारा उठाया गया आरोप है। उपलब्ध जानकारी में इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि या निर्वाचन आयोग का जवाब शामिल नहीं है।
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोप चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राज्यसभा सांसद ने कहा, "स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के नाम पर बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाने से हमारी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इतने बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नाम हटाने के आरोपों पर स्पष्टीकरण, जवाबदेही और संसद में व्यापक चर्चा की जरूरत है। हर योग्य नागरिक को बिना इस डर के कि उन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए।"
संजय सिंह ने अपने पत्र में मताधिकार को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों के कारण लोगों में अपने मतदान अधिकार को लेकर आशंकाएं पैदा हो सकती हैं।
आम आदमी पार्टी नेता ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, संसद ऐसा मंच है जहां चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जा सकती है और सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में बदलाव और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जैसे विषयों पर जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण निर्वाचन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य निर्धारित नियमों के अनुसार मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करना होता है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने, त्रुटियों को सुधारने और नियमों के अनुसार अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
हालांकि, किसी भी पुनरीक्षण प्रक्रिया में पात्र नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका गंभीर चिंता का विषय हो सकती है। ऐसे मामलों में प्रभावित मतदाताओं के लिए उपलब्ध दावा और आपत्ति प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण होती है।
संजय सिंह ने अपने पत्र में इसी पहलू पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नाम हटाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं, तो उन पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।
राज्यसभा सांसद ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे नागरिकों को डराने-धमकाने और हिरासत में लेने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी संसद में चर्चा जरूरी है।
हालांकि, उपलब्ध पत्र के विवरण में इन कथित घटनाओं की स्थानवार सूची, प्रभावित लोगों की संख्या या पुलिस की ओर से दी गई सफाई शामिल नहीं है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित घटनाओं के आधिकारिक रिकॉर्ड की आवश्यकता होगी।
संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से संबंधित सवालों और विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त एक संवैधानिक पद पर कार्यरत अधिकारी होते हैं। निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी चुनावी प्रक्रिया का संचालन और मतदाता सूची से संबंधित निर्धारित कार्यों का निर्वहन करना है। आयोग के कामकाज को लेकर उठने वाले आरोपों और सवालों का परीक्षण संबंधित तथ्यों तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
आम आदमी पार्टी नेता ने कहा कि चुनावी व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। उन्होंने मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की।
संजय सिंह के अनुसार, संसद में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा होने से जनप्रतिनिधियों को अपनी चिंताएं रखने और संबंधित विषयों पर जवाब मांगने का अवसर मिलेगा।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी पात्र मतदाता को यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि उसे मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा।
भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान का अधिकार कानून द्वारा निर्धारित पात्रता और शर्तों के अनुसार प्राप्त होता है। मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान प्रक्रिया में भाग लेने की महत्वपूर्ण शर्त है। इसलिए सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि या गलत विलोपन का समाधान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना आवश्यक है।
संजय सिंह ने अपने पत्र के माध्यम से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह करते हुए कहा कि चुनावी निष्पक्षता, पारदर्शिता और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों पर व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्र सरकार या निर्वाचन आयोग की ओर से संजय सिंह के इस पत्र पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। संसद का विशेष सत्र बुलाने के संबंध में भी किसी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
संजय सिंह की इस मांग के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण, कथित वोट चोरी और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। अब यह देखना होगा कि उनके पत्र पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और संसद के विशेष सत्र की मांग पर आगे कोई निर्णय लिया जाता है या नहीं।
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