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दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से पहले पाबंदियों पर पुलिस का बचाव, जुलाई की हिंसा का जिक्र
Kiran
10 Oct 2026 9:33 AM IST

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Delhi जंतर-मंतर पर सुरक्षित रूप से सिर्फ़ 1,000 लोगों के ही जमा होने की जगह है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को नई दिल्ली में लगाई गई अस्थायी पाबंदियों का बचाव किया। ये पाबंदियां CJP की प्रस्तावित सभा से पहले लगाई गई थीं, जिसके लिए पहले से कोई इजाज़त नहीं ली गई थी। पुलिस ने जुलाई में हुए एक महीने लंबे विरोध-प्रदर्शन का हवाला दिया, जिसमें 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे और आपराधिक बैकग्राउंड वाले 2,000 से ज़्यादा लोग शामिल हुए थे। पाबंदियों के पीछे की वजह बताते हुए एडिशनल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (PRO) राजीव रंजन ने कहा कि ये उपाय एहतियात के तौर पर किए गए थे। इनका मकसद भीड़ को बहुत ज़्यादा बढ़ने से रोकना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और प्रदर्शनकारियों व आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
रंजन ने जगह की कमी, भीड़ को संभालने, इमरजेंसी में आने-जाने के रास्ते और लोगों की सुरक्षा से जुड़ी सीमाओं का ज़िक्र करते हुए कहा, "जंतर-मंतर एक छोटी जगह है, जहाँ एक बार में सुरक्षित रूप से लगभग 1,000 लोग ही आ सकते हैं।" जुलाई में उसी जगह पर हुए विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए दिल्ली पुलिस के PRO ने कहा कि एक दिन के प्रदर्शन की इजाज़त दी गई थी, लेकिन सभा लगभग एक महीने तक चलती रही। उन्होंने बताया कि इस दौरान 200 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और आपराधिक बैकग्राउंड वाले 2,000 से ज़्यादा लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जिससे हिंसा की घटनाएं हुईं। बयान के मुताबिक, झड़पों में छात्र भी घायल हुए।
पुलिस ने पिछले हफ़्ते जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल लोगों द्वारा महिला कॉन्स्टेबलों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की खबरों का भी ज़िक्र किया और इन आरोपों को "गंभीर चिंता" का विषय बताया। रंजन ने कहा, "शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और उस इलाके से गुज़रने वाले आम लोगों की सुरक्षा सबसे ज़रूरी है। ऐसी घटनाओं को दोबारा नहीं होने दिया जाना चाहिए।"
पुलिस के मुताबिक, यह बयान तब आया है जब CJP ज़रूरी इजाज़त लिए बिना उसी जगह पर एक और सभा करने की तैयारी कर रहा है। रंजन ने कहा कि पिछली सभाओं के अनुभव को देखते हुए, किसी और सभा की इजाज़त देने से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित इंतज़ाम करना ज़रूरी है। PRO ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये पाबंदियां कुछ समय के लिए थीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और राजधानी में रहने वाले लोगों, कामगारों, आने-जाने वालों, दुकानदारों और कारोबारियों की सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाना था।
उन्होंने कहा, "विरोध प्रदर्शन के लिए पहले से मंज़ूरी लेना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के ख़िलाफ़ नहीं है; यह एक ज़रूरी प्रशासनिक कदम है।" उन्होंने आगे कहा कि जगह, समय और भीड़ के संभावित आकार के बारे में पहले से जानकारी होने से अधिकारियों को ट्रैफ़िक मैनेजमेंट, इमरजेंसी सेवाओं और भीड़ को नियंत्रित करने की योजना बनाने में मदद मिलती है।
रंजन ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े कानूनी नियमों का पालन करने के महत्व पर ज़ोर दिया है। उन्होंने आयोजकों से कहा कि वे प्रतिभागियों को कानूनी स्थिति और बिना मंज़ूरी वाली भीड़ में शामिल होने के नतीजों के बारे में बताएं। उन्होंने कहा, "लोगों को अपनी बात शांति से रखने का मौका मिलना चाहिए। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम ऐसे हालात बनाएं जिनमें वे सुरक्षित रूप से ऐसा कर सकें और साथ ही शहर का कामकाज भी चलता रहे।" पुलिस ने कहा कि इन पाबंदियों का मकसद लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना और कामकाज में कम से कम रुकावट डालना था, ताकि ज़रूरी कमर्शियल और कारोबारी गतिविधियां जारी रह सकें।
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