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BRICS सांसदों से मुलाकात के बाद PM मोदी का बड़ा बयान

Ratna Netam
26 Oct 2026 9:13 PM IST
BRICS सांसदों से मुलाकात के बाद PM मोदी का बड़ा बयान
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नई दिल्ली : 26 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) में भाग लेने आए विभिन्न देशों के सांसदों और संसदीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत को सुखद बताते हुए कहा कि विभिन्न मुद्दों पर प्रतिनिधियों के दृष्टिकोण जानने का अवसर मिला।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान ब्रिक्स देशों के सांसदों के साथ उनकी शानदार बातचीत हुई और कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
ब्रिक्स देशों के सांसदों से पीएम मोदी की अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में भाग लेने आए विभिन्न देशों की संसदों के अध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से बातचीत की। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसदीय संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में संवाद हुआ।भारत की मेजबानी में आयोजित इस सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को आमंत्रित किया गया है।ब्राजील, रूस, युगांडा और क्यूबा सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य संसदीय संस्थाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना और साझा वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर विचार करना है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया सम्मेलन का उद्घाटन
नई दिल्ली के ऐतिहासिक संविधान सदन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में सदस्य देशों से जन-केंद्रित विकास, वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया।ओम बिरला ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधताएं होने के बावजूद साझा चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए सहयोग आवश्यक है।उन्होंने कहा कि संसदीय संस्थाएं नागरिकों की आकांक्षाओं को समझने और लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
चार प्रमुख विषयों पर हो रहा विचार-विमर्श
दो दिवसीय ब्रिक्स संसदीय मंच का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को सुदृढ़ बनाना' रखा गया है।सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा हो रही है। इनमें संस्थागत लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास शामिल हैं।प्रतिनिधि संसदीय संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और निगरानी, डिजिटल तकनीक तथा वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे विषयों पर विचार कर रहे हैं।इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अस्थिरता और विकासशील देशों की चुनौतियों को लेकर भी चर्चा निर्धारित की गई है।
वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सहयोग पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें क्षेत्रीय संघर्ष, युद्ध, आतंकवाद, व्यापारिक तनाव और जलवायु परिवर्तन प्रमुख हैं।उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाना जरूरी है।बिरला ने ब्रिक्स देशों की संसदों से अपने अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले परिणाम भी सामने आने चाहिए।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत बनाने पर चर्चा
ब्रिक्स संसदीय मंच में विकासशील देशों की भागीदारी और वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।भारत लंबे समय से ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का समर्थन करता रहा है। इस सम्मेलन में भी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवश्यकताओं और साझा प्राथमिकताओं को महत्व दिया गया है।संसदीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से सदस्य देशों को अपनी नीतियों, अनुभवों और विकास संबंधी चुनौतियों को साझा करने का अवसर मिल रहा है।
27 अक्टूबर को होगा सम्मेलन का समापन
भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच 26 और 27 अक्टूबर तक चलेगा। सम्मेलन में संसदीय कूटनीति, संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी सांसदों से मुलाकात को इसी व्यापक संसदीय संवाद का हिस्सा माना जा रहा है।सम्मेलन के माध्यम से ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के बीच आपसी विश्वास, संसदीय सहयोग और जन-केंद्रित विकास के मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
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