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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत

Ratna Netam
26 Oct 2026 9:00 PM IST
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे और मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को आशीष मिश्रा को दिवाली का त्योहार अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ मनाने के लिए गृहनगर लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दे दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति पहले से लागू जमानत की शर्तों के अधीन होगी। न्यायालय ने मामले की सुनवाई समय पर पूरी करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दी अनुमति
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने आशीष मिश्रा की याचिका पर सुनवाई की। आशीष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत से दिवाली के अवसर पर गृहनगर जाने की अनुमति मांगी।अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को पहले भी विशेष अवसरों पर यात्रा की अनुमति मिल चुकी है। इस पर अदालत ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए उन्हें सीमित अवधि के लिए अपने परिवार से मिलने की अनुमति प्रदान की।रिपोर्ट के अनुसार, आशीष मिश्रा को 16 नवंबर तक वापस लौटना होगा। अदालत ने साफ किया कि यात्रा के दौरान पूर्व में निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
मुकदमे में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में चल रही न्यायिक प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। अदालत ने कहा कि मुकदमे को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए, लेकिन जल्दबाजी में सुनवाई पूरी करना भी उचित नहीं होगा।पीठ ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि गवाहों की उपस्थिति और साक्ष्यों की जांच सुनिश्चित करते हुए मुकदमे को उचित समय में पूरा किया जाए।न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष सुनवाई और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
131 में से 90 गवाहों के बयान दर्ज
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में अब तक कुल 131 गवाहों में से 90 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। शेष गवाहों की गवाही और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं अभी पूरी होनी हैं।सरकार ने यह भी जानकारी दी कि मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश का तबादला हो चुका है और नए सरकारी वकील की नियुक्ति की गई है।न्यायिक अधिकारी लोकेश राय ने 14 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश का पदभार संभाला था। उन्होंने पूर्व न्यायाधीश शिव कुमार सिंह का स्थान लिया।पीड़ित पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि वे मुकदमे में हालिया प्रगति से संतुष्ट हैं।
क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला?
लखीमपुर खीरी हिंसा की घटना 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के तिकुनिया क्षेत्र में हुई थी। उस समय केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन चल रहा था।तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के प्रस्तावित दौरे के विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक एसयूवी ने प्रदर्शनकारी किसानों को कुचल दिया था।घटना में चार किसानों की मौत हुई थी। इसके बाद भड़की हिंसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं, एक वाहन चालक और एक पत्रकार की भी जान चली गई थी। इस प्रकार पूरे घटनाक्रम में आठ लोगों की मौत हुई थी।आशीष मिश्रा पर इस घटना में शामिल होने का आरोप है। हालांकि मामले में अंतिम न्यायिक फैसला आना अभी बाकी है।
हत्या और आपराधिक साजिश समेत गंभीर आरोप
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आशीष मिश्रा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए गए हैं।दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने आशीष मिश्रा और 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसके बाद मुख्य मामले में सुनवाई आगे बढ़ी।आशीष मिश्रा फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। इससे पहले अदालत ने उनकी आवाजाही को लेकर कई प्रतिबंध लगाए थे। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया था।
अब मुकदमे की अगली सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से आशीष मिश्रा को दिवाली के अवसर पर परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति मिली है। हालांकि इस आदेश का उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे के गुण-दोष या आरोपों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।अब मामले में शेष गवाहों की गवाही और सुनवाई की प्रगति महत्वपूर्ण होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
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