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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर PM मोदी का लेख, आर्टिकल 370 हटाने को बताया श्रद्धांजलि

Delhi दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाना भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की “शहादत” के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। मुखर्जी की जयंती के अवसर पर विभिन्न अखबारों में प्रकाशित अपने हस्ताक्षरित लेख में प्रधानमंत्री ने उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद किया।
अपने लेख में पीएम मोदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हमेशा “भारत पहले और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता” देने की बात की। उन्होंने ऐसे संस्थानों और प्रणालियों की नींव रखी, जो अपने समय की पारंपरिक राजनीतिक सोच से अलग थे। मोदी ने कहा कि उनके विचार और दृष्टिकोण आज भी देश की नीतियों और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरणा देते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में यह भी उल्लेख किया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उस समय भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जब देश में कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक प्रभाव व्यापक था। उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना एक वैकल्पिक विचारधारा के रूप में हुई, जिसने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को केंद्र में रखा।
मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर को लेकर आर्टिकल 370 के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया और इसे देश की एकता में बाधा मानते हुए इसका विरोध किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका यह संघर्ष भारत को एक सूत्र में जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 6 जुलाई का दिन उन सभी लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और उनके बलिदान को याद करने का अवसर है।
लेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि 6 जुलाई 1901 को जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 23 जून 1953 को श्रीनगर में हिरासत में अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य हिस्सों के साथ पूरी तरह जोड़ने और आर्टिकल 370 को समाप्त करने की मांग को लेकर संघर्ष किया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2019 में आर्टिकल 370 को समाप्त करना डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। उन्होंने इसे उनके विचारों और बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
अपने लेख में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कैसे दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित की भावना से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका योगदान भारतीय राजनीति और राष्ट्र निर्माण के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री के इस लेख के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे ऐतिहासिक निर्णयों और विचारधारा से जोड़कर देखा है, जबकि समर्थकों ने इसे डॉ. मुखर्जी के योगदान को सम्मान देने वाला बयान बताया है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री के इस लेख ने एक बार फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, उनके संघर्ष और आर्टिकल 370 के ऐतिहासिक फैसले को राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस के केंद्र में ला दिया है।





