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80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का 75 मिनट का भाषण, चार साल में सबसे छोटा संबोधन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। इस बार प्रधानमंत्री का भाषण करीब 75 मिनट लंबा रहा, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन है। हालांकि, स्वतंत्रता दिवस के इतिहास में यह उनका अब तक का चौथा सबसे छोटा भाषण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश की विकास यात्रा, आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और राष्ट्रीय सुरक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी।
75 मिनट के भाषण में विकास और भविष्य पर फोकस
लाल किले से दिए गए अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य है।
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया और कहा कि देश की आजादी लाखों लोगों के संघर्ष और त्याग का परिणाम है।
पिछले साल दिया था 103 मिनट लंबा भाषण
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की लंबाई पर नजर डालें तो पिछले साल उनका संबोधन काफी लंबा रहा था। वर्ष 2025 में उन्होंने लाल किले से 103 मिनट का भाषण दिया था।
इससे पहले 2024 में 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का भाषण 98 मिनट का था, जिसने उनके पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। लगातार दो वर्षों तक प्रधानमंत्री के भाषण लंबे रहे थे।
इस बार 75 मिनट का संबोधन चार वर्षों में सबसे छोटा रहा।
2014 में दिया था पहला स्वतंत्रता दिवस भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार वर्ष 2014 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया था। उनका पहला भाषण करीब 65 मिनट लंबा था।
इसके बाद प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि में लगातार बदलाव देखने को मिला। कई वर्षों में उन्होंने लंबे संबोधन दिए, जिनमें सरकार की योजनाओं, नीतियों और देश के भविष्य के लक्ष्यों का विस्तार से उल्लेख किया।
भाषणों में जनता से सीधा संवाद
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन की खासियत रही है कि वह लाल किले से सीधे देशवासियों से संवाद करते हैं। अपने भाषणों में वह सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाले समय की चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा करते हैं।
इस बार भी प्रधानमंत्री ने आम लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि देश के विकास में हर नागरिक की भूमिका जरूरी है।
स्वतंत्रता दिवस भाषणों में बदलाव
स्वतंत्रता दिवस के भाषण प्रधानमंत्री के लिए देश की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखने का बड़ा मंच होता है। अलग-अलग वर्षों में भाषणों की अवधि विषयों और परिस्थितियों के अनुसार बदलती रही है।
कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री ने लंबा संबोधन देकर कई योजनाओं और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण दिया, जबकि कुछ अवसरों पर उन्होंने सीमित समय में प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
इस बार के भाषण की प्रमुख बातें
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने भारत की विकास यात्रा, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय एकता, युवाओं की भूमिका और भविष्य के लक्ष्यों पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत चुनौतियों से घबराने वाला देश नहीं है और हर परिस्थिति का मजबूती से सामना करने की क्षमता रखता है।
ऐतिहासिक लाल किले से दिया संदेश
लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन स्वतंत्रता दिवस समारोह का सबसे प्रमुख हिस्सा होता है। इस बार भी देशभर के लोगों ने प्रधानमंत्री का भाषण सुना और उनके संदेश पर ध्यान दिया।
75 मिनट के इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के वर्तमान और भविष्य की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि भारत अपनी विरासत और क्षमता के बल पर दुनिया में नई पहचान बना रहा है।





