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PM मोदी ने की 53वीं PRAGATI बैठक, 30 हजार करोड़ की परियोजनाओं की समीक्षा

Gulabi Jagat
25 Aug 2026 11:01 PM IST
PM मोदी ने की 53वीं PRAGATI बैठक, 30 हजार करोड़ की परियोजनाओं की समीक्षा
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 'सेवा तीर्थ' में 'प्रगति' (PRAGATI) की 53वीं बैठक की अध्यक्षता की। 'प्रगति' सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए ICT-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
इन परियोजनाओं का मकसद कनेक्टिविटी को मजबूत करना, औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करना है। समीक्षा के दौरान समय-सीमा का पालन, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों का समाधान और काम को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया।प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी से लागत बढ़ने के अलावा और भी नुकसान होते हैं, क्योंकि इससे नागरिकों, व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले फायदे भी टल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, टुकड़ों या पैकेजों के बजाय एक एकीकृत इकाई के रूप में देखा और मॉनिटर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पैकेजों में प्रगति का नतीजा आखिरकार पूरी परियोजना के समय पर पूरा होने और चालू होने के रूप में दिखना चाहिए।मंत्रालयों और राज्यों से कहा गया कि वे 'एंड-टू-एंड' (शुरू से आखिर तक) दृष्टिकोण अपनाएं और उन अहम कमियों को दूर करें जिनसे पूरी परियोजना के चालू होने और फायदे मिलने में देरी हो सकती है। प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य-संस्कृति अपनाने और परियोजना को लागू करने के हर स्तर पर अधिक जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचा सेवाओं के लिए 'कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर' (साझा उपयोग वाले गलियारे) की संभावना तलाशने पर जोर दिया, खासकर बड़े परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बनाते समय। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से कहा कि वे योजना बनाने के चरण में ही ऐसे एकीकृत तरीकों पर विचार करें और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता को देखें।उन्होंने कहा कि काम तेजी से होने के साथ-साथ गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीक अपनाने और हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निगरानी को मजबूत करने को कहा।
'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' के तहत 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि डेटा से अधिक लाभ उठाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नवीनतम डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
उन्होंने जोर दिया कि डेटा इकोसिस्टम का इस्तेमाल कृषि मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) में प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए - इनपुट की योजना बनाने से लेकर प्रोसेसिंग तक - ताकि बेहतर जानकारी के आधार पर कदम उठाए जा सकें, सही लोगों तक लाभ पहुंचाया जा सके और डेटा-आधारित फैसले लिए जा सकें।
प्रधानमंत्री ने 'एग्रीस्टैक' इकोसिस्टम बनाने में राज्यों और केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की और किसानों के लिए बेहतर नतीजे पाने के लिए इसके इस्तेमाल को और मजबूत करने का आह्वान किया। साइबर धोखाधड़ी के मामलों (जिनमें 'डिजिटल अरेस्ट' की घटनाएं भी शामिल हैं) की समीक्षा के दौरान, प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रेनिंग, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर रोकथाम के उपायों को मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने खास तौर पर बुजुर्गों, युवाओं और समाज के अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए लगातार और लक्षित जन-जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि उन्हें धोखाधड़ी के आम तरीकों, चेतावनी के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रयासों का भी आह्वान किया, ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों की पहचान की जा सके और उन पर तेजी से कार्रवाई की जा सके।
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