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दिल्ली-एनसीआर
सत्यम निकेतन हादसे के बाद हाईकोर्ट पहुंचा छात्र PG सुरक्षा के लिए PIL
Ratna Netam
26 Sept 2026 3:11 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली में पेइंग गेस्ट यानी PG आवास, किराए के फ्लैट और निजी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में छात्रों के लिए एक विशेष निगरानी और सलाहकार व्यवस्था तैयार करने की मांग की गई है, ताकि उनकी रिहाइश से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की नियमित निगरानी हो सके।यह याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय के PGDAV कॉलेज में पढ़ने वाले दूसरे वर्ष के छात्र शिवांश कालिया की ओर से दायर की गई है। याचिका में कॉलेज, विश्वविद्यालय और बड़े छात्र या कोचिंग हब के स्तर पर 'स्टूडेंट अकोमोडेशन एडवाइजरी और मॉनिटरिंग कमेटियां' बनाने की मांग की गई है। याचिका वकील आशु बिधूड़ी के माध्यम से दायर की गई है।
याचिका के पीछे 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई इमारत गिरने की घटना को प्रमुख वजह बताया गया है। इस हादसे में पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल होने वाली इमारतों और निजी आवासीय व्यवस्थाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे। याचिका में इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए छात्रों की रिहाइश की निगरानी के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।दिल्ली में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों और शहरों से छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। इनमें कई छात्र कॉलेज या विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने के बजाय PG, किराए के फ्लैट या निजी हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं की निगरानी के लिए अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत को याचिका में उठाया गया है।
प्रस्तावित कमेटियों का उद्देश्य छात्रों के रहने की जगहों से जुड़े सुरक्षा और कल्याण के मुद्दों पर निगरानी रखना है। याचिका में कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के साथ-साथ उन इलाकों में भी निगरानी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है, जहां बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा रहते हैं।याचिका में छात्र आवासों की स्थिति की नियमित समीक्षा की बात कही गई है। इसमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई है कि छात्रों के रहने वाले भवनों में आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन हो। इसके साथ ही भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, आग से सुरक्षा और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं पर भी निगरानी की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है।
छात्रों की सुरक्षा केवल भवन की संरचना तक सीमित नहीं है। PG और निजी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए स्वच्छता, पेयजल, बिजली, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन संपर्क जैसी सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं। प्रस्तावित निगरानी व्यवस्था के जरिए इन सुविधाओं से जुड़े मामलों को भी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की मांग की गई है।
याचिका में कॉलेज और विश्वविद्यालयों की भूमिका बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है। छात्र जब किसी दूसरे शहर से पढ़ाई के लिए आते हैं तो उन्हें अक्सर निजी आवास की व्यवस्था खुद करनी पड़ती है। ऐसे में संस्थानों के पास आसपास उपलब्ध छात्र आवासों की जानकारी और सुरक्षा से जुड़े मानकों की निगरानी के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था होने की मांग उठाई गई है।बड़े छात्र और कोचिंग हब में इस तरह की व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बताया गया है क्योंकि इन इलाकों में बड़ी संख्या में युवा किराए के कमरों, PG और निजी हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे स्थानों पर भवनों में क्षमता से अधिक लोगों के रहने, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य सुरक्षा पहलुओं की नियमित जांच छात्रों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
याचिका में 'स्टूडेंट अकोमोडेशन एडवाइजरी और मॉनिटरिंग कमेटी' के जरिए छात्रों और प्रशासन के बीच संपर्क व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है। इससे छात्र अपने आवास से जुड़ी समस्याओं की जानकारी संबंधित संस्थान या प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। साथ ही गंभीर सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर समय रहते संबंधित एजेंसियों को जानकारी देने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।दिल्ली में किराए और छात्र आवास की जरूरत को लेकर मास्टर प्लान से जुड़े दस्तावेजों में भी छात्रों की आवासीय जरूरतों का उल्लेख किया गया है। दिल्ली के लिए तैयार मास्टर प्लान में छात्रों, अकेले कामकाजी लोगों और प्रवासियों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल, किराए के मकान और अन्य किफायती आवास विकल्पों की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।
इस मामले में सत्यम निकेतन की घटना ने छात्र आवासों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सामने ला दिया है। छात्रों के लिए रहने की जगह का चयन अक्सर किराया, कॉलेज से दूरी और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर किया जाता है। लेकिन भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की जानकारी हर छात्र को उपलब्ध हो, यह भी महत्वपूर्ण है।याचिका के जरिए मांग की गई है कि कॉलेज, विश्वविद्यालय और छात्र-बहुल इलाकों में ऐसी कमेटियां बनाई जाएं जो छात्र आवासों से जुड़े सुरक्षा और कल्याण के मामलों पर नजर रख सकें। इससे छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक निर्धारित मंच मिल सकता है।
फिलहाल याचिका में उठाए गए मुद्दों का केंद्र छात्रों की सुरक्षित रिहाइश और उनकी बुनियादी सुविधाओं की निगरानी है। सत्य निकेतन हादसे के बाद दायर इस याचिका में मांग की गई है कि छात्रों के लिए उपलब्ध PG, किराए के फ्लैट और निजी हॉस्टल की सुरक्षा को केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी न मानकर संस्थागत और प्रशासनिक निगरानी के दायरे में भी लाया जाए।याचिका पर अदालत की ओर से आगे क्या निर्देश दिए जाते हैं, इससे प्रस्तावित निगरानी व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल याचिका में छात्र आवासों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
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