- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- BRICS में मोदी जिनपिंग...
दिल्ली-एनसीआर
BRICS में मोदी जिनपिंग की बैठक को लेकर विपक्ष ने घेरा
Ratna Netam
13 Sept 2026 3:03 PM IST

x
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस बैठक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी पार्टी ने इसे चीन के सामने झुकने जैसा कदम बताया और सरकार से सीमा, व्यापार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुई, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग को लेकर बातचीत की। बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस ने उठाए सरकार पर सवाल
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति की मुलाकात को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि चीन के साथ बातचीत करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को चीन के साथ संबंधों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और देश को बताना चाहिए कि दोनों देशों के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई।
चीन के साथ रिश्तों पर सियासी बहस
भारत और चीन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। सीमा विवाद, सैन्य तनाव और कूटनीतिक मतभेदों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में चुनौती बनी रही है।
हालांकि, दोनों देश कई मौकों पर बातचीत के जरिए संबंधों को सामान्य करने की कोशिश करते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों के नेताओं की मुलाकातों को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
सरकार की ओर से सहयोग पर जोर
केंद्र सरकार की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सभी देशों के साथ संबंध बनाए रखता है। सरकार का कहना है कि कूटनीतिक बातचीत का उद्देश्य देश के हितों की रक्षा करना और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत करना है।
भारत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मंचों पर चीन के साथ भी काम करता है, वहीं सुरक्षा और सीमा से जुड़े मामलों में अपनी स्थिति स्पष्ट रखता है।
सीमा विवाद रहा है बड़ा मुद्दा
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव के बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत भी हुई है।
भारत का रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के सामान्य संबंधों के लिए जरूरी है। वहीं चीन भी कई स्तरों पर बातचीत के जरिए समाधान की बात करता रहा है।
विपक्ष और सरकार आमने-सामने
प्रधानमंत्री मोदी की जिनपिंग से मुलाकात के बाद विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस इसे विदेश नीति से जोड़कर सरकार को घेर रही है, जबकि सरकार समर्थक पक्ष इसे कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रहा है।
राजनीतिक दल अक्सर विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग नजरिया रखते हैं। जहां सरकार बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताती है, वहीं विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अहम बैठक
भारत और चीन दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की कोई भी मुलाकात वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जाती है।
व्यापार, क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को लेकर भारत और चीन के बीच बातचीत का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं। कांग्रेस के आरोपों के बाद यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है। वहीं सरकार का रुख है कि भारत अपनी विदेश नीति में राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
Next Story





