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दिल्ली-एनसीआर
टेरा इन्वेस्ट केस में नितिन नरेश को राहत नहीं, अग्रिम जमानत खारिज
Ratna Netam
31 Oct 2026 8:53 PM IST

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में टेरा इन्वेस्ट से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म 'इन्वेंटिवा' (Inventiva) के प्रकाशक नितिन नरेश को अदालत से राहत नहीं मिली है। जयपुर की एक सत्र अदालत ने 28 अक्टूबर 2026 को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला टेरा इन्वेस्ट से जुड़े व्यक्तियों के संबंध में प्रकाशित सामग्री, कथित धमकी भरे ईमेल और धन की मांग के आरोपों से संबंधित है। अदालत के फैसले के बाद इस मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है।जानकारी के अनुसार, जयपुर के शास्त्री नगर पुलिस थाने में नितिन नरेश, नाइन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
यह विवाद वैश्विक निवेश संगठन टेरा इन्वेस्ट से जुड़े प्रतिनिधि की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक संदेश भेजे गए, जिनमें निवेश कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिकूल सामग्री प्रकाशित करने की धमकी देकर धन की मांग की गई थी। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित होनी बाकी है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रेणुका सिंह हुड्डा की अदालत ने 28 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, केस डायरी और जांच की वर्तमान स्थिति पर विचार किया। न्यायालय का मानना था कि आरोपों की प्रकृति और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इस चरण में गिरफ्तारी से पूर्व संरक्षण देना उचित नहीं होगा।शिकायत के अनुसार, 26 अगस्त और 3 सितंबर 2026 को कुछ ईमेल प्राप्त हुए थे। आरोप है कि इन संदेशों के माध्यम से टेरा इन्वेस्ट और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ आगे नकारात्मक सामग्री प्रकाशित करने की धमकी दी गई थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन संदेशों में धन की मांग भी शामिल थी।
इस मामले में 11,700 रुपये के एक बैंक लेनदेन को महत्वपूर्ण बताया गया है। शिकायत के अनुसार, 3 सितंबर को जयपुर स्थित एचडीएफसी बैंक की एक शाखा में कैश डिपॉजिट मशीन के माध्यम से यह रकम नाइन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते में जमा कराई गई थी। यह कंपनी इन्वेंटिवा से जुड़ी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद भी धन की मांग बंद नहीं हुई।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इस बैंक लेनदेन और कथित ईमेल के बीच संबंध होने का तर्क दिया। वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नितिन नरेश ने किसी से पैसे की मांग नहीं की और न ही कथित धमकी भरे ईमेल भेजे थे।नितिन नरेश की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि संबंधित बैंक खाते में रकम उनकी जानकारी के बिना जमा की गई थी। बचाव पक्ष के अनुसार, ऐसा कोई निर्णायक प्रमाण नहीं है जिससे यह स्थापित हो कि कथित ईमेल भेजने वाला अकाउंट नितिन नरेश का ही था।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि नरेश जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है। उन्होंने अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करने की भी बात कही। हालांकि, अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोपों की गंभीरता तथा आगे की जांच की आवश्यकता का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का विरोध किया।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय के अग्रिम जमानत संबंधी सिद्धांतों, आरोपों की प्रकृति और जांच की जरूरतों पर भी विचार किया।इस मामले का संबंध दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही अलग-अलग दीवानी कार्यवाहियों से भी है। टेरा इन्वेस्ट से जुड़े अंकिति बोस और कृष्ण रतन ने इन्वेंटिवा से प्रकाशित कुछ सामग्री को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को अंकिति बोस से संबंधित मामले में कुछ विवादित लेखों के सोशल मीडिया प्रसार पर अंतरिम रोक लगाई थी। इसके बाद 14 सितंबर को कृष्ण रतन से जुड़े मामले में भी अदालत ने मानहानिकारक आरोपों वाली कुछ नई सामग्री के प्रकाशन पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया था।
हालांकि, इन आदेशों को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे दीवानी मामले और जयपुर पुलिस की आपराधिक जांच अलग-अलग कानूनी कार्यवाहियां हैं। दीवानी मामलों में प्रकाशित सामग्री और उससे संबंधित अधिकारों का सवाल है, जबकि जयपुर में कथित जबरन वसूली, धमकी और साजिश के आरोपों की जांच की जा रही है।इस बीच 26 अक्टूबर को जयपुर में शिकायतकर्ता पक्ष के एक अधिवक्ता को कथित रूप से धमकाने का आरोप भी सामने आया है। अधिवक्ता गर्वित खंडेलवाल ने इस संबंध में सदर पुलिस थाने में अलग शिकायत दर्ज कराई थी। अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान इस आरोप का भी उल्लेख हुआ, लेकिन इसे न्यायालय द्वारा प्रमाणित अपराध नहीं माना गया।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति दोषी सिद्ध हो गया है। अग्रिम जमानत का उद्देश्य गिरफ्तारी से पहले कानूनी संरक्षण प्रदान करना होता है। अदालत आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध सामग्री और जांच की आवश्यकताओं के आधार पर इस प्रकार की राहत देने या नहीं देने का निर्णय करती है।
नितिन नरेश के मामले में भी अदालत ने केवल अग्रिम जमानत देने से इनकार किया है। कथित ईमेल की वास्तविकता, बैंक लेनदेन की परिस्थितियां और आपराधिक आरोपों की सत्यता जांच तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित होगी।फिलहाल जयपुर पुलिस इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक संचार, बैंक लेनदेन और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कर रही है। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायालय के आदेशों पर निर्भर करेगी।इस घटनाक्रम ने डिजिटल मीडिया संस्थानों, कारोबारी प्रतिष्ठानों और कानूनी विवादों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखे हैं। किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ समाचार प्रकाशित करना पत्रकारिता की स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन धमकी देकर धन मांगने जैसे आरोप अलग आपराधिक जांच का विषय होते हैं। दोनों के बीच अंतर करना जरूरी है।अब इस मामले में आगे होने वाली जांच और न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी। नितिन नरेश ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष अपने आरोपों पर कायम है। अंतिम रूप से दोष या निर्दोषता का निर्धारण सक्षम अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।
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