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एंटीलिया बम केस में पूर्व IPS प्रदीप शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

New Delhi नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2021 के बहुचर्चित एंटीलिया बम कांड और इसके बाद व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या से जुड़े मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रदीप रामेश्वर शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में उन्होंने निचली अदालत और हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देते हुए आरोपमुक्त किए जाने की मांग की थी।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें 25 फरवरी 2021 को मुंबई स्थित उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास एक संदिग्ध वाहन में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। इसके बाद इस मामले की जांच के दौरान व्यवसायी मनसुख हिरेन की मौत भी हुई, जिसे हत्या का मामला माना गया।
मामले की जांच के बाद पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा पर कथित रूप से इस साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए गए और उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस पूरी साजिश में कथित भूमिका निभाई थी, जिसमें मनसुख हिरेन की मौत भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपमुक्त करने का आधार नहीं बनता है।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह जमानत या अग्रिम जमानत जैसे मामलों को समझ सकती है, लेकिन इस चरण में आरोपों को समाप्त करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और मामले को आगे ट्रायल प्रक्रिया के लिए जारी रखने का संकेत दिया।
शर्मा के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुख्य आरोप केवल इतना है कि उन्होंने मनसुख हिरेन को खत्म करने की कथित साजिश में एक अन्य पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे से मुलाकात की थी। हालांकि, अदालत ने इस दलील को इस स्तर पर पर्याप्त नहीं माना।
यह मामला मुंबई पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा है। जांच के दौरान कई बड़े अधिकारियों और संदिग्धों के नाम सामने आए थे, जिससे यह केस और भी जटिल हो गया था।
फिलहाल अदालत के इस फैसले के बाद अब मामला निचली अदालत में आगे की सुनवाई के लिए जारी रहेगा, जहां सबूतों और गवाहों के आधार पर ट्रायल प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस फैसले को केस की जांच में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में और भी कानूनी घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।





