दिल्ली-एनसीआर

फरीदाबाद के बड़खल में 25 एकड़ वन भूमि पर खुदाई NGT ने जारी किया नोटिस

Ratna Netam
23 Sept 2026 7:31 PM IST
फरीदाबाद के बड़खल में 25 एकड़ वन भूमि पर खुदाई NGT ने जारी किया नोटिस
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नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बड़खल इलाके में संरक्षित अरावली भूमि पर कथित खनन और खुदाई के मामले में हरियाणा सरकार, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के जरिए अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।NGT की प्रधान पीठ में चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद ने मामले पर सुनवाई की। ट्रिब्यूनल ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अरावली क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय से खनन पर रोक होने के बावजूद फरीदाबाद के बड़खल इलाके में लगभग 25 एकड़ वन भूमि पर दो एक्सकेवेटर काम करते पाए गए।
मीडिया रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर चट्टानों की खुदाई किए जाने, मौके पर बड़ी मात्रा में टूटे पत्थर जमा होने और जमीन के एक बड़े हिस्से से पेड़-पौधे तथा अन्य वनस्पति हटाए जाने का आरोप लगाया गया था। इन्हीं तथ्यों को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण नियमों के संभावित उल्लंघन पर सवाल उठाए हैं। हालांकि कथित गतिविधियों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।NGT के आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि संबंधित भूमि पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट की धारा 4 और 5 के तहत संरक्षित है और अरावली परिदृश्य का हिस्सा है। आदेश के मुताबिक कथित खुदाई के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि सामने आए तथ्य वन संरक्षण कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून और पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट सहित पर्यावरण संबंधी प्रावधानों के अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि खुदाई की गतिविधि करीब दो दिनों तक चली और लगभग 500 मीट्रिक टन पत्थर निकाले गए। हालांकि वन विभाग ने 500 मीट्रिक टन पत्थर निकाले जाने के आंकड़े से इनकार किया है। ऐसे में कथित खनन की वास्तविक मात्रा और गतिविधि की प्रकृति भी जांच तथा संबंधित विभागों के जवाब का विषय रहेगी।ट्रिब्यूनल ने हरियाणा सरकार को मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाया है। इसके अलावा प्रधान मुख्य वन संरक्षक, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन महानिरीक्षक, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी जवाब देने के लिए कहा गया है। सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना हलफनामा दाखिल करना होगा।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित खुदाई वाली जगह बड़खल झील के आसपास के पर्यावरणीय परिदृश्य से जुड़ी है। NGT ने बड़खल झील को पुनर्जीवित करने के लिए चल रही परियोजना का भी अपने आदेश में उल्लेख किया है। बड़खल झील वर्ष 2002 में सूख गई थी और इसके पुनर्जीवन के लिए कई स्तर पर काम किया जा रहा है।झील के पुनर्जीवन की योजना में इसकी जल धारण क्षमता में सुधार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी के जरिए झील को रिचार्ज करना, झील तल का उपचार, बांध को मजबूत करना और झील के आसपास विकास कार्य शामिल हैं। इसके लिए 10 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का उपयोग किए जाने की योजना भी है।
अरावली पर्वतमाला दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। वन क्षेत्र और पहाड़ियां मिट्टी के कटाव को रोकने, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता को बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं। ऐसे में संरक्षित जमीन पर अनधिकृत खुदाई या खनन की शिकायतें पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर मानी जाती हैं।NGT ने अपने आदेश में अरावली से जुड़े दूसरे कथित अवैध खनन मामलों का भी उल्लेख किया। इनमें नूंह के रावा क्षेत्र में कथित तौर पर करीब 6,000 मीट्रिक टन पत्थर निकाले जाने और ब्लास्टिंग के आरोप वाली रिपोर्ट शामिल है। इसके अलावा बसई मेव क्षेत्र में कथित अवैध सड़क निर्माण से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया गया।
बड़खल के मौजूदा मामले में NGT ने अभी किसी संबंधित विभाग या व्यक्ति को अंतिम रूप से दोषी नहीं ठहराया है। ट्रिब्यूनल ने मीडिया रिपोर्ट में सामने आए आरोपों को पर्यावरण कानूनों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला मानते हुए संबंधित सरकारी एजेंसियों से जवाब मांगा है।अब हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों को स्पष्ट करना होगा कि लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में हुई कथित खुदाई की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसके लिए किसी प्रकार की अनुमति जारी की गई थी या नहीं और अगर गतिविधि अनधिकृत थी तो उसे रोकने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और वन अधिकारियों के जवाब भी महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि मामला केवल खनन तक सीमित नहीं है। वनस्पति हटाने और भूमि की प्रकृति बदलने के आरोप भी सामने आए हैं। इससे संभावित पर्यावरणीय नुकसान और संरक्षण नियमों के पालन से जुड़े सवाल उठते हैं।फरीदाबाद में अरावली भूमि पर विकास और खनन से जुड़े विवाद पहले भी पर्यावरणीय मंचों तक पहुंचते रहे हैं। NGT ने अन्य मामलों में भी संरक्षित वन क्षेत्रों में बिना आवश्यक अनुमति खनन को गंभीर विषय माना है और राज्य अधिकारियों को अवैध गतिविधियों पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।फिलहाल बड़खल की लगभग 25 एकड़ वन भूमि पर कथित खुदाई का मामला NGT के सामने विचाराधीन है। हरियाणा सरकार, वन अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के हलफनामे आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी, जिसमें ट्रिब्यूनल संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
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