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India's के निजी अंतरिक्ष युग के नए सितारे, पवन चंदाना और नागा भरत डाका ने रचा इतिहास

Ratna Netam
18 July 2026 7:40 PM IST
Indias  के निजी अंतरिक्ष युग के नए सितारे, पवन चंदाना और नागा भरत डाका ने रचा इतिहास
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New Delhi नई दिल्ली : भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी ने देश को एक नई दिशा दी है। इसी कड़ी में स्काईरूट एयरोस्पेस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। वर्ष 2018 में इसरो के दो पूर्व वैज्ञानिकों द्वारा शुरू किया गया एक छोटा सा सपना अब भारत की सबसे सफल निजी स्पेस कंपनियों में शामिल हो गया है।

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना इसरो के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। दोनों वैज्ञानिकों का उद्देश्य था कि भारत में सैटेलाइट लॉन्चिंग को अधिक आसान, किफायती और व्यावसायिक बनाया जाए। उनका सपना था कि जिस तरह लोग आसानी से कमर्शियल फ्लाइट की बुकिंग कर यात्रा कर सकते हैं, उसी तरह भविष्य में छोटे सैटेलाइट लॉन्च करना भी आसान हो सके।

हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसी सोच के साथ निजी रॉकेट तकनीक विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया। कंपनी ने कम समय में अपनी तकनीकी क्षमता साबित करते हुए भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को नई पहचान दिलाई है। स्काईरूट की सफलता को देश में स्पेस स्टार्टअप के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदाना वर्तमान में स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि नागा भरत डाका कंपनी के मुख्य संचालन अधिकारी (COO) हैं। दोनों की अगुवाई में कंपनी ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

स्काईरूट का सबसे चर्चित प्रोजेक्ट विक्रम सीरीज के रॉकेट हैं। कंपनी ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल के जरिए यह साबित किया कि देश का निजी क्षेत्र भी अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने में सक्षम है। इस उपलब्धि ने भारत के स्पेस सेक्टर में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

पवन चंदाना और नागा भरत डाका का सफर इस बात का उदाहरण है कि सरकारी संस्थानों में मिले अनुभव को निजी क्षेत्र की सोच के साथ जोड़कर किस तरह बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। इसरो में काम करने के दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने रॉकेट और अंतरिक्ष तकनीक की बारीकियों को समझा और उसी अनुभव को लेकर निजी अंतरिक्ष उद्योग में कदम रखा।

भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद स्काईरूट जैसी कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिला। निजी भागीदारी से अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ लॉन्चिंग की लागत कम होने और नई तकनीकों के विकास की उम्मीद भी बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्काईरूट की सफलता भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद कर सकती है। आने वाले समय में छोटे उपग्रहों की मांग बढ़ने के साथ निजी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

स्काईरूट एयरोस्पेस की कहानी केवल एक कंपनी की सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के नए अंतरिक्ष युग की शुरुआत का संकेत भी है। दो पूर्व इसरो वैज्ञानिकों का वर्ष 2018 में देखा गया सपना अब देश के निजी स्पेस सेक्टर की प्रेरणादायक उपलब्धि बन चुका है।

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