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दिल्ली हाई कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, साकेत कोर्ट जज निलंबित

Saba Naaz
18 July 2026 7:16 PM IST
दिल्ली हाई कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, साकेत कोर्ट जज निलंबित
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दिल्ली: हाई कोर्ट ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए साकेत स्थित कमर्शियल कोर्ट की जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीणा रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वीणा रानी दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (डीएचजेएस) की वरिष्ठ अधिकारी हैं। यह कार्रवाई सतर्कता जांच के बाद की गई है। हाई कोर्ट ने कहा है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित है, जिसके चलते उन्हें निलंबित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय के निर्देश पर वीणा रानी के खिलाफ सतर्कता जांच शुरू की गई थी। जांच रिपोर्ट को फुल कोर्ट की बैठक में रखा गया, जिसके बाद निलंबन का फैसला लिया गया। 10 जुलाई को हुई फुल कोर्ट बैठक में निर्णय लिया गया और इसके बाद 15 जुलाई को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज ने निलंबन आदेश जारी किया।

हाई कोर्ट द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अवधि के दौरान वीणा रानी का मुख्यालय साकेत स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) का कार्यालय रहेगा। उन्हें सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा नियमों के तहत उन्हें निर्वाह भत्ता और अन्य निर्धारित सुविधाएं मिलती रहेंगी।

हाई कोर्ट ने यह कार्रवाई ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 और दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा नियम, 1970 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए की है। हालांकि, हाई कोर्ट ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि सतर्कता जांच किन शिकायतों के आधार पर शुरू की गई थी और निलंबन का वास्तविक कारण क्या है।

सूत्रों के अनुसार, वीणा रानी के खिलाफ विजिलेंस जांच के दौरान कुछ गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। बताया जा रहा है कि मामला कोर्ट आक्शनियर यानी नीलामकर्ता की नियुक्ति से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ ऐसे अधिवक्ताओं को कोर्ट आक्शनियर नियुक्त किया गया, जो निर्धारित पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।

इसके अलावा यह भी आरोप लगाए गए हैं कि कुछ न्यायिक आदेशों के जरिए इन नीलामकर्ताओं को हाई कोर्ट के नियमों में तय सीमा से अधिक मानदेय और भुगतान की अनुमति दी गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से नहीं की गई है। इसलिए इन्हें केवल जांच से जुड़े आरोपों के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह मामला 20 अगस्त 2025 को एक कोर्ट आक्शनियर की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट फुल कोर्ट के सामने रखी गई और उसके आधार पर निलंबन का निर्णय लिया गया।

वीणा रानी दक्षिण-पूर्व जिले के साकेत स्थित वाणिज्यिक न्यायालय की अध्यक्षता कर रही थीं। उनका निलंबन ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली हाई कोर्ट अधीनस्थ न्यायपालिका में अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

इससे पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसी महीने फुल कोर्ट ने जिला न्यायाधीश विनय सिंघल को भी निलंबित किया था। इसके अलावा वर्ष 2025 में जिला न्यायाधीश संजीव कुमार सिंह को सतर्कता जांच के बाद निलंबित किया गया था और एक अन्य न्यायिक अधिकारी अनिल कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी।

हाई कोर्ट की इस कार्रवाई को न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल वीणा रानी के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया जारी रहेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

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